कोविड-19 संक्रमण से ठीक होने के बाद की जिंदगी कैसी होगी, क्या दूसरे लोगों के तरह आप भी सामान्य जीवन जी सकेंगे, ऐसे कई सवाल लोगों को मन में उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण के बाद लोग दोबारा से सामान्य जीवनयापन कर सकते हैं। इतना ही नहीं हैदराबाद के डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण से ठीक होने के बाद आप अंग दान भी कर सकते है। डॉक्टरों ने कोविड से ठीक हो चुके 31 लोगों के किडनी दान को लेकर किए गए अध्ययन के आधार पर यह जानकारी दी है।
एक ओर जब देश में संक्रमण के मामले दोबारा से बढ़ रहे हैं, ऐसे में इस तरह की खबरें ठीक हो चुके रोगियों के हौसले को बढ़ाने के लिए सबसे बेहतर हो सकती हैं। आइए जानते हैं, संक्रमण के बाद अंगों के प्रत्यारोपण को लेकर डॉक्टरों का क्या कहना है?
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हैदराबाद और सिकंदराबाद सहित देश भर के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टरों की टीम ने पाया है कि कोविड -19 से उबरने वाले लोग अपने अंगों, विशेष रूप से किडनी का दान कर सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि दाता या प्राप्तकर्ता, दोनों में ही संक्रमण के कोई मामले देखने को नहीं मिले हैं।
डॉक्टरों की यह टीम देश के 19 प्रत्यारोपण केंद्रों में 31 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण के मामलों में हिस्सा रही है। 'द इकोनामिक टाइम्स' में छपी रिपोर्ट में ट्रांसप्लांटेशन का हिस्सा रहे सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. केएस नायक ने बताया कि किडनी के प्रत्यारोपण के बाद अध्ययन के दौरान हमें किसी भी प्राप्तकर्ता में कोविड-19 के लक्षण देखने को नहीं मिले हैं। इस अध्ययन को साइंस जर्नल ट्रांसप्लांटेशन में प्रकाशित भी किया गया है।
डॉ. नायक ने कहा कि अध्ययन के आधार पर हम कह सकते हैं कि कोविड संक्रमण से ठीक हो चुके रोगी बिना किसी डर के अंगों का दान कर सकते हैं। कोविड-19 के दौर में जब लोगों के मन में कई तरह के डर पैदा हो रहे हैं ऐसे में यह अध्ययन अंगों का इंतजार कर रहे लोगों के लिए काफी सुकूनदायक हो सकती है। किडनी की खराबी वाले रोगियों को इससे नई उम्मीद मिलती है।
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इस दौरान मरीजों को ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है।
- फोटो : Demo pic
अध्ययन में बताया गया है कि अंग दान से कोरोनोवायरस होने का जोखिम इसलिए कम है क्योंकि परीक्षण के समय अधिकांश दाता एसिम्टोमैटिक थे। वहीं जिन लोगों में कोविड के हल्के लक्षण थे उनसे 28 दिन पश्चात दो नकारात्मक पीसीआर परीक्षणों के बाद किडनी का दान लिया गया।कोविड -19 के सभी प्रोटोकॉल का पालन करने के बाद ही अंगों के ट्रांसप्लांटेशन की प्रक्रिया को पूरा किया गया।