क्या आपको भी सुबह उठने पर हाथ-पैर में सुन्नपन या झुनझुनी जैसा महसूस होता है? आमतौर पर लोग इस समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। वैसे तो हर बार यह चिंता की बात भी नहीं होती, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे तो इसपर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत होती है। कई बार छोटी सी लगनी वाली ये दिक्कत बड़ी समस्याओं का संकेत भी हो सकती है।
Hand Feet Numbness: हाथ-पैर सुन्न होना कब सामान्य और कब खतरे की घंटी? आप भी हैं परेशान तो जरूर जानिए ये बातें
हाथ-पैर सुन्न होने या झुनझुनी महसूस होने की स्थिति को पेरेस्थीसिया कहा जाता है। यह तब होती है जब त्वचा या अंगों तक संवेदना पहुंचाने वाली नसों पर दबाव पड़ता है, उनमें चोट लगती है या वे किसी बीमारी के कारण ठीक से काम नहीं कर पातीं।
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हाथ-पैर सुन्न क्यों होते हैं?
हाथ-पैर सुन्न होने की समस्या आमतौर पर शरीर के पेरिफेरल नर्वस सिस्टम, रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क से जुड़े तंत्रिका तंत्र में किसी गड़बड़ी के कारण हो सकती है।
- जब नसों पर दबाव पड़ता है या उनमें रक्त की आपूर्ति कुछ समय के लिए कम हो जाती है, तब मस्तिष्क तक संदेश ठीक से नहीं पहुंच पाते और हाथ या पैर सुन्न महसूस होने लगते हैं।
- अधिकांश मामलों में यह कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है, लेकिन यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो यह नसों को नुकसान का संकेत भी हो सकता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के अनुसार, यदि सुन्नपन बार-बार हो या लगातार बढ़ रहा हो तो इसकी जांच जरूरी होती है। कई बार ये किसी गंभीर बीमारी के कारण भी हो सकती है।
कब सामान्य मानी जाती है ये समस्या?
हर बार हाथ-पैर सुन्न होना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। आमतौर पर नसों पर दबाव पड़ने के कारण ये दिक्कत हो सकती है।
- लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने, पैर पर पैर चढ़ाकर बैठने या सिर के नीचे हाथ रखकर सोने के कारण आपको ऐसी दिक्कत हो सकती है।
- इन स्थितियों में नस और रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है, जिससे कुछ समय के लिए संवेदना कम हो जाती है।
- हालांकि जैसे ही आप अपनी स्थिति बदलते हैं और दबाव हटता है, इससे रक्त संचार सामान्य होने लगता है और कुछ मिनटों में झुनझुनी व सुन्नपन खत्म हो जाती है।
- यह शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया मानी जाती है और आमतौर पर किसी इलाज की जरूरत नहीं होती।
कब बन सकती है खतरे की घंटी?
हाथ-पैर सुन्न होना तब गंभीर माना जाता है जब यह अचानक शुरू हो, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी दिखाई दें।
- यदि शरीर के केवल एक तरफ हाथ और पैर अचानक सुन्न हो जाएं, बोलने में कठिनाई हो, देखने में दिक्कत आए या संतुलन बिगड़ जाए, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है क्योंकि स्ट्रोक में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
- इसी तरह यदि सुन्नपन के साथ मांसपेशियों में कमजोरी, चलने में कठिनाई हो, गर्दन-पीठ में तेज दर्द हो तो यह रीढ़ की हड्डी, नसों या मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
- यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज है और उसके हाथ-पैर लगातार सुन्न रहते हैं, तो यह डायबिटिक न्यूरोपैथी का लक्षण हो सकता है।
- विटामिन बी12 की कमी, थायरॉयड या कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां भी ऐसी समस्या पैदा कर सकती हैं।
मल्टीपल स्केलेरोसिस में भी होती है ये दिक्कत
मल्टीपल स्केलेरोसिस एक ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की नसों की सुरक्षात्मक परत पर अटैक कर देती है।
- इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में हाथ-पैर सुन्न होने-झुनझुनी, धुंधला दिखने, संतुलन बिगड़ने और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी दिक्कत होती है।
- कई बार लक्षण कुछ दिनों तक रहते हैं और फिर कम हो जाते हैं, जिससे मरीज इन्हें नजरअंदाज कर देता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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