HRT Treatment: मेनोपॉज में राहत के लिए लाखों महिलाएं ले रहीं एचआरटी, अब सामने आया इसका सबसे खतरनाक साइड-इफेक्ट
एचआरटी को मेनोपॉज के दौरान कम होने वाले एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सही मरीजों में यह हॉट फ्लैशेज से लेकर नींद की समस्या और योनि में सूखेपन तक कई परेशानियों से राहत दिलाने में मदद कर सकती है।
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विस्तार
मेनोपॉज के बाद सभी महिलाओं के शरीर में कई ऐसे बदलाव आते हैं जिसका उनकी सेहत पर सीधा असर होता है। मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन की वह प्राकृतिक अवस्था है जब उनका मासिक धर्म (पीरियड्स) हमेशा के लिए बंद हो जाता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, जब किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक माहवारी नहीं आती है, तो उसे रजोनिवृत्ति की स्थिति माना जाता है। यह उम्र बढ़ने की एक सामान्य प्रक्रिया है, भारत में मेनोपॉज की उम्र आमतौर पर 45 से 55 के बीच की मानी जाती है।
मेनोपॉज के कारण महिलाओं में रात में पसीना आने, नींद की कमी, मूड में बदलाव, बेचैनी से लेकर दिल की बीमारियों और आर्थराइटिस का खतरा काफी बढ़ जाता है। इन्हीं समस्याओं को कम करने के लिए दुनियाभर में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी एचआरटी का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। आलम ये है कि ब्रिटेन जैसे कैसे देशों में एचआरटी लेने वाली महिलाओं की संख्या कुछ ही वर्षों में दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी है।
एक तरफ एचआरटी के इस्तेमाल में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञ इसके गलत इस्तेमाल और ज्यादा डोज को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि एचआरटी को जिस मकसद के साथ इस्तेमाल में लाया जाता है, उसका गलत इस्तेमाल कई तरह की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
बहुत सी महिलाओं के लिए यह मेनोपॉज के कठिन दौर से राहत पाने का तरीका तो है, पर इसके साइड-इफेक्ट्स कहीं ज्यादा बड़ी समस्याओं का कारण हो सकते हैं।
बढ़ गई है एचआरटी लेने वाली महिलाओं की संख्या
यूनाइटेड किंगडम की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। साल 2025-26 में 40 साल से अधिक उम्र की करीब 20 लाख महिलाओं को एचआरटी दी गई।
- साल 2020-21 में यह संख्या लगभग 8 लाख थी।
- यानी पांच साल में एचआरटी का इस्तेमाल इतना बढ़ा कि अब यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
मेनोपॉज के दौरान लो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की भरपाई के लिए एचआरटी का इस्तेमाल किया जाता है। ये मरीजों में हॉट फ्लैशेज से लेकर नींद की समस्या और वजाइनल ड्राइनेस तक कई परेशानियों से राहत दिलाने में मदद कर सकती है। यही वजह है कि बहुत सी महिलाओं के लिए यह मेनोपॉज के कठिन दौर में राहत का एक अहम विकल्प बन चुका है।
लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खास चिंता सोशल मीडिया पर फैली वाली उन सलाहों को लेकर है, जिनमें कुछ इंफ्लूएंसर महिलाओं को सामान्य निर्धारित सीमा से दो या तीन गुना ज्यादा एचआरटी लेने तक की सलाह दे रहे हैं। जिसके वास्तव में कई तरह के गंभीर जोखिम हो सकते है। ये मेनोपॉज के कारण होने वाली दिक्कतों से कई गुना खतरनाक हो सकते हैं।
ब्रेस्ट और गर्भाशय के कैंसर का खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक मेनोपॉज के समय महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। एचआरटी इसी कमी को कुछ हद तक पूरा करने का काम करती है। लेकिन एचआरटी को लेकर अब डॉक्टर सभी महिलाओं को अलर्ट कर रहे हैं।
- अध्ययन में सामने आया है कि एचआरटी लेने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। जो महिलाएं एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दोनों के लिए थेरेपी ले रही हैं उनमें जोखिम कहीं ज्यादा देखा जा रहा है।
- ब्रिटेन में हर साल होने वाले ब्रेस्ट कैंसर के करीब 2 प्रतिशत मामले एचआरटी से जुड़े माने जाते हैं।
- विशेषज्ञ कहते हैं, एचआरटी लेने की अवधि जितनी लंबी होती है, ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम उतना बढ़ सकता है। हालांकि, एचआरटी बंद करने के बाद यह जोखिम धीरे-धीरे कम होने लगता है।
इस थेरेपी के कुछ अन्य संभावित जोखिम भी हैं। इससे स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा अगर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन की मात्रा सही संतुलन में न हो या हार्मोन की डोज जरूरत से ज्यादा ली जाए, तो लंबे समय में गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी वॉम्ब लाइनिंग मोटी हो सकती है। इसे एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया कहा जाता है। इस स्थिति में बहुत ज्यादा या असामान्य ब्लीडिंग हो सकती है और आगे चलकर गर्भाशय के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को सामान्य निर्धारित मात्रा से कहीं ज्यादा एचआरटी लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ऑक्सफोर्डशायर में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. केटी बार्बर के अनुसार, मेनोपॉज को लेकर सोशल मीडिया ने बातचीत को बढ़ावा देने में सकारात्मक भूमिका निभाई है। यह अच्छी बात है कि महिलाएं अब मेनोपॉज के बारे में खुलकर बात कर रही हैं, एक-दूसरे के अनुभव साझा कर रही हैं और समस्याओं का समाधान खोज रही हैं। पहले कई महिलाएं मेनोपॉज से जुड़ी परेशानियों को ऐसी चीज मानकर चुपचाप सहती रहती थीं, जिसे बस झेलना ही पड़ेगा।
लेकिन सोशल मीडिया का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है।
- डॉ. बार्बर के मुताबिक, कुछ लोग ऐसी बातें भी प्रचारित कर रहे हैं जिनका कोई मजबूत वैज्ञानिक आधार नहीं है और जो महिलाओं के लिए सुरक्षित भी नहीं हो सकतीं।
- कई वीडियो में कहा जा रहा है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए एचआरटी की सामान्य अधिकतम स्वीकृत मात्रा से दो या तीन गुना ज्यादा डोज लेनी चाहिए। जबकि वास्तव में ये बहुत नुकसानदायक हो सकता है।
- बिना डॉक्टरी सलाह के कोी भी हार्मोनल थेरेपी फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती है।
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स्रोत:
Risk of breast cancer linked to receiving HRT during menopause is a lower risk than previously feared,
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