फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Yoga In Indian Lifestyle: भारतीय जीवनशैली में कितना गहरा है योग का रिश्ता?

Sat, 08 Aug 2026 02:52 PM IST
Abhay kumar अभय कुमार
Updated Sat, 08 Aug 2026 02:52 PM IST
सार

Daily Yoga Routine: भारत ने योग को लेकर एक तरह की क्रांति देखी है। आज मैं अक्सर ऐसे लोगों से मिलता हूं, जो मुझे अनुलोम-विलोम करने की सलाह देते हैं। अनुलोम-विलोम एक तरह का प्राणायाम यानी श्वास अभ्यास है। कई लोग स्वस्थ जीवनशैली के लिए आयुर्वेदिक उत्पादों के इस्तेमाल की भी सलाह देते हैं।

विज्ञापन
Yoga Is Embedded in Traditional Indian Lifestyle: A Personal Journey
पद्मासन में योग मुद्रा करते - फोटो : Abhay K.

1980 के दशक में बिहार के नालंदा जिले के एक सुदूर इलाके में मेरा बचपन बीता। उस समय मैंने कभी योग का अभ्यास नहीं किया था और न ही योग के बारे में सुना था। मेरे दादा पहलवान थे और मैं उन्हें सुबह व्यायाम करते हुए देखता था। मेरे पिता खेतों की ओर टहलने के साथ-साथ फसलों की देखभाल करने जाते थे, जबकि मेरी मां सुबह से देर शाम तक घर के कामों में व्यस्त रहती थीं।



योग मेरे परिवार की दिनचर्या का हिस्सा नहीं था। आसपास दूर-दूर तक भी मुझे कोई ऐसा व्यक्ति याद नहीं आता, जो योग का अभ्यास करता हो।

जेएनयू में पहली बार योग से हुआ परिचय

योग के बारे में मुझे पहली बार तब पता चला, जब मैंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। विश्वविद्यालय परिसर में मैंने एक योग प्रशिक्षक को लोगों को योग सिखाते हुए देखा। मैंने कभी योग की कक्षा में हिस्सा नहीं लिया। मुझे लगता था कि योग के लिए बहुत अभ्यास की जरूरत होती है और यह हर किसी के बस की बात नहीं है, कम से कम मेरे लिए तो नहीं।

इसके बजाय मैं हर शाम जॉगिंग करता था और कुछ सामान्य शारीरिक व्यायाम करता था। बाद में मैंने महर्षि महेश योगी द्वारा शुरू किए गए ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन का अभ्यास भी शुरू किया। लेकिन उस समय मेरे मन में यह बात कभी नहीं आई कि ध्यान भी अष्टांग योग यानी योग के आठ अंगों का हिस्सा है।

दो-तीन दशकों में बदल गई योग की तस्वीर

आज मुझे लगता है कि भारत में लगभग हर कोई आसन और प्राणायाम से परिचित है। यहां तक कि दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोग भी योग के बारे में जानते हैं, जबकि दो-तीन दशक पहले ऐसा नहीं था।

भारत ने योग को लेकर एक तरह की क्रांति देखी है। आज मैं अक्सर ऐसे लोगों से मिलता हूं, जो मुझे अनुलोम-विलोम करने की सलाह देते हैं। अनुलोम-विलोम एक तरह का प्राणायाम यानी श्वास अभ्यास है। कई लोग स्वस्थ जीवनशैली के लिए आयुर्वेदिक उत्पादों के इस्तेमाल की भी सलाह देते हैं।

एक दशक पहले शुरू किया योग का अभ्यास

मैंने करीब एक दशक पहले योग का नियमित अभ्यास शुरू किया। इसमें अलग-अलग आसनों का अभ्यास शामिल था। कुछ आसन सरल थे, जैसे वज्रासन, जबकि कुछ बेहद कठिन आसन भी थे, जैसे पद्म-मयूरासन यानी लोटस-पीकॉक पोज और पूर्ण शलभासन यानी फुल ग्रासहॉपर पोज।

कुछ योग सत्रों के बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरा शरीर काफी लचीला है और मैं सरल से लेकर कठिन योग मुद्राओं को भी आसानी से कर सकता हूं। धीरे-धीरे मैंने आसनों का अभ्यास अधिक समय तक करना शुरू किया। इसी दौरान मुझे भारतीय पारंपरिक जीवनशैली और योग के बीच संबंध समझ में आने लगा। मुझे महसूस हुआ कि भारतीय जीवनशैली में सुबह जागने से लेकर रात को सोने तक योग किसी न किसी रूप में मौजूद रहा है।

Yoga Is Embedded in Traditional Indian Lifestyle: A Personal Journey
वक्रासन या ट्विस्टेड पोज - फोटो : Abhay K.

सुबह की दिनचर्या से शुरू होती है योग की झलक

सुबह की सबसे पहली दिनचर्या में दैनिक शारीरिक स्वच्छता यानी शौच आदि की प्रक्रिया आती है। पारंपरिक तरीके में व्यक्ति पैरों के बल बैठने जैसी मुद्रा में रहता है, जिसमें जांघों का दबाव आंतों पर पड़ता है और मल त्याग में सहायता मिलती है। यह मुद्रा उत्कटासन से जुड़ी हुई है, जो दोनों नासिकाओं को सक्रिय करती है और व्यक्ति को तरोताजा तथा रिलैक्स महसूस कराने में मदद करती है।

इसके बाद व्यक्ति दांत साफ करता है। आयुर्वेद में इसे दंतधावन कहा जाता है। पुराने समय में इसके लिए आज इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक टूथब्रश की जगह नीम की टहनी का इस्तेमाल किया जाता था। नीम यानी Azadirachta indica को औषधीय गुणों वाला पेड़ माना जाता है।

इसके बाद व्यक्ति व्यायाम करता है और स्नान करता है। फिर सूर्य को जल अर्पित करते हुए सूर्य नमस्कार किया जाता है, जिसमें सात योग मुद्राओं का समावेश बताया गया है। देवी-देवताओं की प्रार्थना में भी श्वास पर नियंत्रण के साथ शब्दों या मंत्रों की पुनरावृत्ति की परंपरा रही है, जिसे शाव्दा प्राणायाम से जोड़ सकते हैं।


भोजन करने के तरीके में भी योग

सुबह की प्रार्थना के बाद काम पर निकलने से पहले व्यक्ति लकड़ी की आयताकार चौकी, जिसे पीढ़ा कहा जाता है, पर अर्ध-पद्मासन में बैठकर नाश्ता करता था। इसे भोजनासन भी कहा जाता है। भोजनासन में रक्त संचार और विशेष रूप से अपान वायु को नियंत्रित करने की बात कही गई है, जिसका संबंध प्राण या श्वास से माना जाता है। योग परंपरा में शरीर में पांच प्रकार के प्राण बताए गए हैं, प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान।

पद्मासन के बारे में कहा जाता है कि यह प्राण और रक्त संचार को नियंत्रित करता है, घुटनों के जोड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है और रीढ़ को सीधा रखता है। इससे व्यक्ति सजग और सतर्क बना रह सकता है।


भारतीय शास्त्रीय नृत्य में भी योग की झलक

भारतीय शास्त्रीय नृत्य या नृत्य की परंपरा नाट्यशास्त्र से निर्देशित होती है, जिसकी जड़ें योगशास्त्र से जुड़ी मानी जाती हैं। अगर आप किसी भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाकार को ध्यान से देखें, चाहे वह भरतनाट्यम हो या ओडिसी, तो आपको उसकी कई शारीरिक गतियों में योगासनों और मुद्राओं की झलक दिखाई देगी।

हठ योग प्रदीपिका के अनुसार, मुद्रा को योगासन की उच्च अवस्था माना गया है। इस तरह भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल कला का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि शरीर, मुद्रा, संतुलन और एकाग्रता का भी अद्भुत मेल दिखाई देता है।

कबड्डी और चिका जैसे खेलों में सांस पर नियंत्रण

भारत के कुछ पारंपरिक खेल, जैसे कबड्डी और चिका, ऐसे हैं जिनमें खिलाड़ी को अपनी बारी के दौरान अधिक से अधिक समय तक सांस रोककर रखने की जरूरत पड़ती है। इस तकनीक की जड़ें शाव्दा प्राणायाम में बताई गई हैं, जिसमें सांस को बिना तोड़े अधिक से अधिक समय तक नियंत्रित रखने पर ध्यान दिया जाता है।

इन खेलों में जो खिलाड़ी सबसे लंबे समय तक अपनी सांस रोककर खेल जारी रख पाता है, उसके जीतने की संभावना भी अधिक होती है। इस तरह पारंपरिक भारतीय खेलों में भी सांस पर नियंत्रण और शारीरिक क्षमता का एक खास संबंध दिखाई देता है।

Yoga Is Embedded in Traditional Indian Lifestyle: A Personal Journey
शीर्षासन और वृक्षासन - फोटो : AI

कामसूत्र और योगासनों का संबंध

दुनिया भारतीय कामसूत्र से परिचित है। वात्स्यायन द्वारा लिखा गया यह भारतीय ग्रंथ यौन आचरण और दांपत्य जीवन से जुड़े विषयों पर आधारित है। कामसूत्र की जड़ें योगासनों में भी देखी जा सकती हैं। जो व्यक्ति योगासनों में अच्छी तरह पारंगत है, वह कामसूत्र में वर्णित कई बातों को बेहतर ढंग से समझ सकता है।

कामसूत्र में दिखाई गई कई मुद्राओं को अपनाने के लिए शरीर का लचीला होना जरूरी है। इसके लिए योगिक आसनों और योगिक मुद्राओं का अभ्यास उपयोगी हो सकता है। योग का अभ्यास एक स्वस्थ और बेहतर दांपत्य जीवन में भी योगदान दे सकता है।


सोने तक साथ चलता है योग

योग केवल दिन के समय ही साथ नहीं रहता, बल्कि नींद के समय भी उससे जुड़ी अवधारणाएं दिखाई देती हैं। जब कोई व्यक्ति निद्रासन यानी Sleeping Pose में बाईं करवट सोता है, तो इसे दाईं नासिका को सक्रिय करने और शरीर में गर्मी पैदा करने से जोड़ा गया है।

वहीं शवासन यानी Pose of the Dead शरीर और मन को पूरी तरह आराम देने वाली मुद्रा है। शवासन व्यक्ति को जल्दी नींद आने में मदद कर सकता है।


सुबह से रात तक जीवन में योग

इस तरह चाहे दिन हो या रात, सुबह जागने से लेकर रात को सोने तक योग भारतीय पारंपरिक जीवनशैली में किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ दिखाई देता है। चाहे बात पारंपरिक खेलों की हो, भारतीय शास्त्रीय नृत्य की, भोजन करने की पद्धति की, शरीर और सांस पर नियंत्रण की या फिर शारीरिक निकटता और दांपत्य जीवन की, इन सभी पहलुओं में योग की झलक दिखाई देती है। यानी योग केवल कुछ कठिन आसनों का अभ्यास नहीं, बल्कि भारतीय जीवनशैली के कई पहलुओं से जुड़ी एक व्यापक परंपरा है।

योग के अध्ययन ने बदली मेरी समझ

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान से फाउंडेशन कोर्स इन योग साइंस फाॅर वेलनेस करने के दौरान मुझे महसूस हुआ कि ये सभी शारीरिक व्यायाम यानी व्यायाम केवल सांस के अभ्यास और अंततः ध्यान की तैयारी हैं। प्राणायाम के बाद ध्यान यानी ध्यान की अवस्था आती है, जो मन को शांत करने और धीरे-धीरे उसे नियंत्रित करने में मदद करती है। मेरे लिए योग का अंतिम उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा पर नियंत्रण हासिल करना है।

पारंपरिक भारतीय जीवनशैली इस लक्ष्य को हासिल करने में कई तरीकों से मदद कर सकती है-

1. शाकाहार और वीगन जीवनशैली
2. आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य
3. सजग होकर भोजन करना और पोषण
4. टिकाऊ जीवनशैली और पर्यावरण के प्रति जागरूकता
5. समुदाय और सामाजिक जिम्मेदारी
6. व्यक्तिगत विकास और आत्म-सुधार
7. आध्यात्मिक खोज और आत्मचिंतन

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Yoga Is Embedded in Traditional Indian Lifestyle: A Personal Journey
बकासन और मयुरासन - फोटो : Abhay K.

योग के शारीरिक फायदे

योग का नियमित अभ्यास शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है। इनमें शामिल हैं,

1. शरीर का लचीलापन और मूवमेंट बेहतर होना
2. मांसपेशियों की ताकत और टोन में सुधार
3. संतुलन, समन्वय और पोश्चर में सुधार
4. वजन प्रबंधन और मेटाबॉलिज्म में सहायता
5. इम्यून फंक्शन में सुधार
6. रक्त संचार और हृदय संबंधी स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद
7. लंबे समय से होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में सहायता


मानसिक और भावनात्मक फायदे

योग का प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं माना जाता। इसके मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी कई फायदे बताए जाते हैं,

1. तनाव, चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद
2. फोकस, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता में सुधार
3. भावनाओं को नियंत्रित करने और संतुलन बनाने में सहायता
4. मूड और समग्र मानसिक स्वास्थ्य में सुधार
5. आत्म-जागरूकता, आत्म-स्वीकृति और आत्म-प्रेम में वृद्धि
6. नींद की गुणवत्ता में सुधार
7. रचनात्मकता और उत्पादकता बढ़ाने में मदद

योग के आध्यात्मिक फायदे

योग का एक आध्यात्मिक पक्ष भी है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर और अपने जीवन के उद्देश्य को समझने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। योग के आध्यात्मिक पहलुओं में शामिल हैं, 

1. अपने भीतर और जीवन के उच्च उद्देश्य से जुड़ाव
2. ऊर्जा और चक्रों में संतुलन
3. माइंडफुलनेस और वर्तमान क्षण के प्रति जागरूकता
4. शांति और आंतरिक सुकून की अनुभूति
5. चेतना और आत्म-जागरूकता का विस्तार
6. अंतर्ज्ञान और आंतरिक मार्गदर्शन में वृद्धि
7. उद्देश्य और एकता की गहरी भावना
 

विज्ञापन
Yoga Is Embedded in Traditional Indian Lifestyle: A Personal Journey
धनुरासन और चक्रासन - फोटो : AI

योग शिक्षक बनने तक का सफर

एक दशक से अधिक समय तक योग का अभ्यास करने के बाद आखिरकार मैंने योग शिक्षक और मूल्यांकनकर्ता बनने का फैसला किया। मैंने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान में योग का अध्ययन किया और फिर भारत के योग सर्टिफिकेशन बोर्ड द्वारा आयोजित कठिन परीक्षा दी। फरवरी 2025 में मैं योग शिक्षक और मूल्यांकनकर्ता के रूप में प्रमाणित हुआ।

इसके बाद से मैं राजनयिकों और योग में रुचि रखने वाले लोगों के लिए योग कक्षाएं आयोजित कर रहा हूं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मैंने अजरबैजान के बाकू में पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक विशेष योग सत्र भी आयोजित किया।


योग आखिर है क्या?

दस साल से अधिक समय तक योग का अभ्यास करने के बाद मेरी समझ में योग केवल व्यायाम नहीं है। आसन शरीर को तैयार करते हैं, प्राणायाम सांस पर ध्यान केंद्रित करना सिखाता है और ध्यान मन को शांत करने की दिशा में ले जाता है। योग की व्यापक परंपरा में शरीर, सांस और मन पर नियंत्रण के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर अधिक संतुलन विकसित करने की कोशिश करता है।

मेरी योग यात्रा ने मुझे यही सिखाया है कि योग किसी एक वर्ग, उम्र या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी परंपरा है, जिससे हर व्यक्ति अपनी क्षमता और जरूरत के अनुसार कुछ न कुछ सीख सकता है। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे आश्चर्य होता है कि जिस योग के बारे में बचपन में मैंने कभी सुना तक नहीं था, वही आज मेरे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

योग ने मुझे शरीर को समझने, सांस पर ध्यान देने और मन को शांत करने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

योग हम सभी को जोड़ता है। रोजाना सिर्फ 15 मिनट भी योग के लिए निकालना आपको शांति, सकारात्मकता और बेहतर जीवनशैली की दिशा में एक कदम आगे ले जा सकता है। मैं योग को सभी के लिए अपनाने की दिल से सलाह देता हूं।

-------------------------

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed