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Health Alert: 2HS फॉर्मूला से 40% तक कम हो सकता है क्रॉनिक बीमारियों का खतरा, डॉक्टरों ने बताया

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 17 Mar 2026 04:08 PM IST
सार

 वैश्विक स्तर पर क्रॉनिक बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दशकों में डायबिटीज-हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता हुआ रिपोर्ट किया जा रहा है, विशेषज्ञ इसके लिए खान-पान में गड़बड़ी को प्रमुख कारण मानते हैं।

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डाइट में सुधार करना जरूरी - फोटो : Amarujala.com

लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा दिया है, नतीजतन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में इसका जोखिम देखा जा रहा है। डायबिटीज-हाई ब्लड प्रेशर हो या हार्ट की बीमारी हाल के वर्षों में इन सभी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। विशेषज्ञ इसके लिए खान-पान में गड़बड़ी को प्रमुख कारण मानते हैं।



क्रॉनिक बीमारियां दुनियाभर में मौत का सबसे बड़ा कारण हैं। साल 2021 में महामारी से जुड़ी मौतों को छोड़कर बाकी सभी मौतों (43 मिलियन) में से 75% इन्हीं बीमारियों के कारण हुईं। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि जिस तरह से सभी उम्र के लोग इन रोगों का शिकार होते जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में रोग-मौत के आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं।

क्रॉनिक बीमारियों में हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह और श्वसन संबंधी रोग शामिल हैं, जिनमें से अकेले हृदय रोग के कारण हर साल लगभग 1.9 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। इन बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने 2HS फॉर्मूला के बारे में बताया है।

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शरीर को स्वस्थ रखने के लिए क्या खाएं? - फोटो : Freepik.com

विशेषज्ञों ने बताया 2HS फॉर्मूला

अमर उजाला से बातचीत में इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर उत्कर्ष सहाय कहते हैं, क्रॉनिक बीमारियों की जड़ हमारे खान-पान में छिपी हुई है। हम अगर अपनी डाइट में सुधार कर लें तो इससे कई गंभीर समस्याओं से बचाव हो सकता है। 2HS फॉर्मूला का अगर पालन कर लिया जाए तो इससे 40-50% तक डायबिटीज-हृदय रोगों का जोखिम कम हो सकता है। 

आइए 2HS फॉर्मूला और इससे होने वाले फायदे को जान लेते हैं। 

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खाने से कम कर लें नमक की मात्रा - फोटो : Freepik

डॉक्टर उत्कर्ष कहते हैं, 2HS हमारी सेहत के लिए सबसे हानिकारक माना जाता है। 2HS यानी हाई शुगर (High Sugar) और हाई सॉल्ड (High Salt)। आहार में नमक और चीनी की अधिकता कई रोगों का घर हो सकती है। अगर हम सभी इन दोनों का सेवन कम कर दें तो ये कई खतरनाक बीमारियों से बचाने वाली हो सकती है।

हाई सॉल्ट हृदय रोगों का घर

अधिक नमक यानी ज्यादा सोडियम लेना दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाला माना जाता है।
 

  • हाई सॉल्ट वाली चीजें खाते रहने से शरीर में पानी रुकने लगता है और ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।
  • यही कारण है कि हाई-सोडियम डाइट को सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है। 
  • स्वस्थ व्यक्ति को रोज 5 ग्राम से कम मात्रा में ही नमक लेना चाहिए, हालांकि अधिकांश लोग इससे ज्यादा सेवन कर रहे होते हैं।  
  • ज्यादा नमक किडनी पर भी अतिरिक्त बोझ डालता है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। 
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आहार से कम कर लें शुगर - फोटो : Freepik.com

हाई शुगर के क्या नुकसान हैं?

हाई सॉल्ट की तरह हाई शुगर भी सेहत के लिए नुकसानदायक है। 
 

  • अधिक मात्रा में चीनी वाली चीजें खाने से शरीर में ग्लूकोज तेजी से बढ़ता है, जिससे इंसुलिन हार्मोन में गड़बड़ी होने लग जाती है।
  • लंबे समय तक ज्यादा चीनी खाते रहने से मोटाप और टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • मोटापा अपने आप में हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और फैटी लिवर का जोखिम बढ़ाने वाला माना जाता है। 



फिर क्या चीजें खानी चाहिए?

डॉक्टर कहते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए 2HS की मात्रा आहार से कम करने के साथ पौष्टिक चीजों को आहार में शामिल किया जाना चाहिए। आपकी डाइट में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, हेल्दी फैट, विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर चीजें जरूर होनी चाहिए।  

खाने के प्लेट का आधा हिस्सा सब्जियां और सलाद से भरें, एक चौथाई में प्रोटीन और एक चौथाई में साबुत अनाज शामिल करें। ये सेहत के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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