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बदलते लाइफस्टाइल से बड़ों से ज्यादा बच्चों को हो रहा नुकसान, ऐसी आदतें तुरंत बदल लें
Mon, 07 Jan 2019 08:30 AM IST
मोना नारंग
रूपायन डेस्क, अमर उजाला
रूपायन डेस्क, अमर उजाला
Published by: मोना नारंग
Updated Mon, 07 Jan 2019 08:30 AM IST
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children
- फोटो : file photo
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आप ऑफिस जाती हैं, रात को देरी से घर आती हैं और कई बार घर पर भी ऑफिस का काम करती हैं। इसके चलते बच्चे पर भी पूरा ध्यान नहीं दे पातीं। आपकी इस दिनचर्या का असर आपके बच्चों पर भी पड़ता है, जिसके कारण वेे कई प्रकार की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल के कंसल्टेंट पेडियाट्रिक्स डॉ. हिमांशु बत्रा कहते हैं, “हर मां चाहती है कि उसका बच्चा स्वस्थ हो, लेकिन बच्चों की बदलती जीवनशैली के कारण वे मोटापा, अस्थमा, एनीमिया, त्वचा की समस्याएं और एलर्जी के साथ-साथ तनाव और मानसिक बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। लेकिन उनकी जीवनशैली में कुछ परिवर्तन कर आप उन्हें इन बीमारियों से दूर रख सकती हैं।”
obesity
मोटापा
बचपन में होने वाला मोटापा वयस्क अवस्था में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों को पैदा कर सकता है। इसलिए बच्चों के खान-पान और उनकी दिनचर्या को बदलें। कार्बोनेटेड पेय पदार्थ, पैक किए गए फलों के जूस, और उच्च कैलोरीयुक्त खाद्य पदार्थ जैसे फास्ट फूड और तले हुए पदार्थों का सेवन कम करें। उनके आहार में अधिक से अधिक फल
और सब्जियों को शामिल करें और एक निश्चित दिनचर्या बनाएं, जिसमें वे पूरे परिवार के साथ रात का खाना खाएं। उन्हें शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें और व्यवस्थित तरीके से मोबाइल और टीवी जैसे अन्य उपकरणों से दूर रखें।
बचपन में होने वाला मोटापा वयस्क अवस्था में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों को पैदा कर सकता है। इसलिए बच्चों के खान-पान और उनकी दिनचर्या को बदलें। कार्बोनेटेड पेय पदार्थ, पैक किए गए फलों के जूस, और उच्च कैलोरीयुक्त खाद्य पदार्थ जैसे फास्ट फूड और तले हुए पदार्थों का सेवन कम करें। उनके आहार में अधिक से अधिक फल
और सब्जियों को शामिल करें और एक निश्चित दिनचर्या बनाएं, जिसमें वे पूरे परिवार के साथ रात का खाना खाएं। उन्हें शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें और व्यवस्थित तरीके से मोबाइल और टीवी जैसे अन्य उपकरणों से दूर रखें।
asthma
अस्थमा
अस्थमा एक एलर्जिक प्रतिक्रिया है, जो एलर्जन (एलर्जी पैदा करने वाले तत्व) के कारण होता है। इसकी वजह से बच्चों को खांसी, छींक और फफूंदी या दूसरी एलर्जी पैदा करने वाली चीजों के संपर्क में आने से सांस लेने में समस्या हो सकती है। ऐसे में एलर्जी रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसके संपर्क में आने से बचें। घर पर हेपा फिल्टर से लैस एयर प्यूरीफायर लगाएं और जब बच्चे बाहर जाएं, तो उनको एन95 या एन99 मास्क जरूर पहनाएं।
प्रदूषण की स्थिति में घर के बाहर खेलने-कूदने से बच्चों को रोंके और घर के अंदर होने वाली गतिविधियों के लिए उनको प्रोत्साहित करें। यदि आपके बच्चे को सांस संबंधी बीमारी है, तो तुरंत पल्मोनोलॉजिस्ट से संपर्क करें। सप्ताह में एक बार गर्म पानी से बच्चे की चादरें और कंबल को जरूर धोएं।
अस्थमा एक एलर्जिक प्रतिक्रिया है, जो एलर्जन (एलर्जी पैदा करने वाले तत्व) के कारण होता है। इसकी वजह से बच्चों को खांसी, छींक और फफूंदी या दूसरी एलर्जी पैदा करने वाली चीजों के संपर्क में आने से सांस लेने में समस्या हो सकती है। ऐसे में एलर्जी रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसके संपर्क में आने से बचें। घर पर हेपा फिल्टर से लैस एयर प्यूरीफायर लगाएं और जब बच्चे बाहर जाएं, तो उनको एन95 या एन99 मास्क जरूर पहनाएं।
प्रदूषण की स्थिति में घर के बाहर खेलने-कूदने से बच्चों को रोंके और घर के अंदर होने वाली गतिविधियों के लिए उनको प्रोत्साहित करें। यदि आपके बच्चे को सांस संबंधी बीमारी है, तो तुरंत पल्मोनोलॉजिस्ट से संपर्क करें। सप्ताह में एक बार गर्म पानी से बच्चे की चादरें और कंबल को जरूर धोएं।
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Wool allergy
त्वचा की समस्याएं और एलर्जी
बच्चों को गर्म पानी या बबल बॉथ कराने से भी त्वचा की समस्या खासकर रूखी त्वचा की समस्या अधिक होती हैं। क्योंकि गर्म पानी त्वचा को सुखाता है। नियमित तौर पर नहाने के बाद शरीर में तेल या लोशन लगाकर त्वचा को जरूर मॉइस्चर करें। इसके अलावा ठंड के मौसम में भी बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने को कहें, चाहे वह सादा पानी, फलों का जूस या अधिक पानी वाली सब्जियों के रूप में ही क्यों न हो।
बच्चों को गर्म पानी या बबल बॉथ कराने से भी त्वचा की समस्या खासकर रूखी त्वचा की समस्या अधिक होती हैं। क्योंकि गर्म पानी त्वचा को सुखाता है। नियमित तौर पर नहाने के बाद शरीर में तेल या लोशन लगाकर त्वचा को जरूर मॉइस्चर करें। इसके अलावा ठंड के मौसम में भी बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने को कहें, चाहे वह सादा पानी, फलों का जूस या अधिक पानी वाली सब्जियों के रूप में ही क्यों न हो।
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Anemia
मनोवैज्ञानिक समस्या और चिंता
कई बच्चे मनोवैज्ञानिक समस्याएं जैसे चिंता, मनोदशा विकार, अवसाद, खाने का विकार और हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) का अनुभव करते हैं। उनमें से कुछ के लिए मनोवैज्ञानिक कारक जिम्मेदार हैं, जबकि कुछ बच्चे पर्यावरण में होने वाले बदलाव के चलते इन बीमारियों की चपेट में आते हैं। इसलिए जरूरी है कि इससे बचाव के लिए आप बच्चे के चारों ओर एक स्वस्थ वातावरण बनाएं।
कई बच्चे मनोवैज्ञानिक समस्याएं जैसे चिंता, मनोदशा विकार, अवसाद, खाने का विकार और हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) का अनुभव करते हैं। उनमें से कुछ के लिए मनोवैज्ञानिक कारक जिम्मेदार हैं, जबकि कुछ बच्चे पर्यावरण में होने वाले बदलाव के चलते इन बीमारियों की चपेट में आते हैं। इसलिए जरूरी है कि इससे बचाव के लिए आप बच्चे के चारों ओर एक स्वस्थ वातावरण बनाएं।