Health Tips: सर्दी में च्यवनप्राश क्यों जरूरी है, जानें इस आयुर्वेदिक टॉनिक का इम्यूनिटी से क्या है संबंध?
ठंड के दिनों में अक्सर लोगों को च्यवनप्राश खाने का सुझाव दिया जाता है। इसके रोजाना एक चम्मच सेवन से आप कई बीमारियों को दूर भगा सकते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके फायदों के बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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इम्यूनिटी बढाने में मदद करता है
च्यवनप्राश सबसे पहले आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करता है। यह 40 से ज्यादा जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनता है, जो पूरे शरीर को ताकत देती हैं। यह मिश्रण केवल सर्दी-जुकाम से ही नहीं बचाता, बल्कि हर तरह के मौसमी संक्रमणों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा ढाल तैयार करता है। इसलिए इसका नियमित सेवन आपको सर्दियों में बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार करता है।
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शरीर को अंदर से गर्माहट देता है
च्यवनप्राश में दालचीनी, इलायची और तेजपत्ता जैसे खास मसाले होते हैं, जो शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं। ठंड के दिनों में यह शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। इस आंतरिक गर्माहट के कारण आपको ठंड जल्दी नहीं लगती और सर्दी-खांसी जैसी आम समस्याएं कम होती हैं। यह मिश्रण आपकी शारीरिक गर्मी को नियंत्रित करके आपको ठंड के प्रकोप से बचाता है।
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श्वसन तंत्र के लिए लाभ
यह आयुर्वेदिक मिश्रण फेफड़ों के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। च्यवनप्राश श्वसन मार्ग (सांस की नली) को अंदर से साफ रखने और मजबूत बनाने में मदद करता है। जिन लोगों को अस्थमा या एलर्जी के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है, उन्हें सर्दियों में इसका सेवन करने से काफी राहत मिल सकती है।
च्यवनप्राश का पूरा फायदा लेने के लिए इसे सही तरीके से सेवन करना जरूरी है। वयस्कों को रोजाना एक या दो चम्मच च्यवनप्राश गर्म दूध के साथ लेना चाहिए। इसे खाने का सबसे अच्छा समय सुबह खाली पेट या नाश्ते से ठीक पहले होता है। इस समय शरीर जड़ी-बूटियों के सभी पोषक तत्वों को सबसे अच्छे से सोख लेता है, जिससे आपको अधिकतम स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।