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Air Pollution: बच्चों के सेहत पर क्या असर डालती है 300 AQI वाली जहरीली हवा? जरूर बरतें ये सावधानियां

Tue, 28 Oct 2025 06:32 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Tue, 28 Oct 2025 06:32 PM IST
सार

Effect of Air Pollution on Children: दिल्ली में प्रदूषण चरम पर है, जहां AQI 300 के पार पहुंच चुका है। यह जहरीली हवा बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है, जिससे उनमें कई गंभीर बीमारियों और संक्रमणों का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। आइए इस लेख में इससे बचाव के कुछ उपाय जानते हैं।

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How does toxic air with an AQI of 300 affect children health Take these precautions
मास्क प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock

How to Protect Children From Pollution: देशभर के कई बड़े शहरों में इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम पर है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिल्ली-एनसीआर है। दिल्ली के कई हिस्सों में एक्यूआई 300 से अधिक है। वायू प्रदूषण इतना अधिक स्तर सभी लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन इसका  गहरा और गंभीर असर बच्चों के स्वास्थ्य पर देखने को मिलता है।  



छोटे बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, और उनकी श्वसन दर वयस्कों की तुलना में अधिक होती है, इसलिए वे प्रदूषक कणों (खासकर PM2.5) को ज्यादा मात्रा में सांस लेते हैं। शोध बताते हैं कि जहरीली हवा केवल वर्तमान की स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह गर्भ में पल रहे भ्रूण तक को प्रभावित कर सकती है, जिससे समय से पहले जन्म (प्रीमेच्योर बर्थ) और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याएं हो रही हैं।

प्रदूषण के कारण बच्चों में न केवल अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसे श्वसन संक्रमणों का खतरा बढ़ता है, बल्कि यह उनके दिमागी विकास को भी प्रभावित करता है, जिससे आगे चलकर एकाग्रता में कमी और कम बुद्धिमत्ता जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। यह प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत गंभीरता से प्रभावित करता है, ऐसे में इसके लिए माता-पिता को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।

How does toxic air with an AQI of 300 affect children health Take these precautions
इम्युनिटी - फोटो : Adobe stock photos

इम्यूनिटी और बीमारी का खतरा
प्रदूषण के जहरीले कण बच्चों की इम्यूनिटी को बहुत कमजोर कर देते हैं। इस वजह से बच्चों को बार-बार खांसी, जुकाम, गले में खराश और वायरल इंफेक्शन होने लगते हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह स्थिति बहुत गंभीर और जानलेवा हो सकती है। माता-पिता को समझना चाहिए कि यह सिर्फ सामान्य सर्दी नहीं है, बल्कि कमजोर इम्यूनिटी के कारण होने वाला प्रदूषण का सीधा हमला है।


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वायु प्रदूषण का खतरा (AI) - फोटो : Freepik.com

बाहर की गतिविधियों से बचाव
जब एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से अधिक हो, तो बच्चों को बाहर बिल्कुल न भेजें। उन्हें पार्क या खेलने के मैदान से दूर रखें। अगर स्कूल या किसी जरूरी काम के लिए बाहर जाना ही पड़े, तो उन्हें सही आकार का N95 मास्क जरूर पहनाएं। यह सुनिश्चित करें कि मास्क उनके मुंह और नाक को अच्छी तरह से ढके। खुली हवा में खेलने से अच्छा है कि बच्चे घर के अंदर रहें और सुरक्षित रहें।


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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe stock

घर के अंदर हवा साफ रखने की कोशिश करें
घर के अंदर की हवा को साफ रखना सबसे पहला और बड़ा बचाव है। इसके लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। साथ ही घर के भीतर धूपबत्ती, अगरबत्ती, मच्छर मारने वाली कॉइल और मोमबत्ती जैसी चीजों को न जलाएं, क्योंकि इनसे निकलने वाला धुआं भी हवा को प्रदूषित करता है। खिड़कियां बंद रखें ताकि बाहर की जहरीली हवा अंदर न आ सके।

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स्वस्थ आहार का करें सेवन - फोटो : Freepik.com
आहार और चिकित्सा देखभाल
बच्चों को प्रदूषण से बचाने के लिए, उनके खाने में विटामिन सी और ई वाले फल और सब्जियां शामिल करें। हल्दी, अदरक और तुलसी का काढ़ा पीने से उनकी इम्यूनिटी बढ़ती है।

उन्हें गुनगुना पानी और तरल पदार्थ नियमित रूप से पिलाते रहें। सबसे जरूरी अगर बच्चे को सांस लेने में कोई भी दिक्कत या घरघराहट महसूस हो, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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