कोरोना वायरस का संक्रमण देश और दुनिया में बड़ी तेजी से फैलता जा रहा है। इसके फैलने को लेकर सबसे प्राथमिक बात यह है कि यह किसी संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। किसी कोरोना मरीज के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान नाक या मुंह से जो ड्रॉपलेट्स निकलते हैं, उनके जरिए संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। लेकिन ये ड्रॉपलेट्स किसी मेटल, प्लास्टिक या अन्य किसी सतह पर पड़े हों तो क्या होगा? इन सतहों पर भी वायरस जीवित रहता है और उन सतहों के संपर्क में आने से, उसे छूने से और फिर उन्हीं हाथों से अपना चेहरा छूने से ये वायरस हमारे शरीर में प्रवेश कर सकता है। ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि किसी सतह पर कोरोना वायरस आखिर कितनी देर तक जिंदा रहता है।
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Coronavirus: ऐसी सतहों पर पांच दिन तक जिंदा रह सकता है कोरोना वायरस, 10 घंटे में तेजी से हो सकता है प्रसार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Mon, 06 Jul 2020 10:58 PM IST
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Coronavirus
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
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कोरोना वायरस(प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
- किसी सतह पर कोरोना वायरस कितनी देर जिंदा रह सकता है, इसको लेकर पहले भी कई तरह के अध्ययन हो चुके हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी, ब्रिटेन की स्वास्थ्य एजेंसी एनएचएस समेत कई संस्थानों ने इस पर शोध अध्ययन किए हैं। अभी पिछले दिनों ब्रिटेन में लंदन कॉलेज यूनिवर्सिटी की ओर से इस संबंध में एक अध्ययन किया गया है, जिसमें चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। इस अध्ययन में कोरोना संक्रमण फैलने को लेकर भी अध्ययन किया गया है।
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कोरोना वायरस(प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
10 घंटे में संक्रमण विस्तार
- जर्नल ऑफ हॉस्पिटल इंफेक्शन में यह शोध अध्ययन प्रकाशित हुआ है। इसके मुताबिक, कोरोना वायरस किसी सतह पर पांच दिनों तक जिंदा रह सकता है और साथ ही 10 घंटे के भीतर बड़े क्षेत्र में अपना प्रसार कर सकता है। लंदन कॉलेज यूनिवर्सिटी के इस शोध अध्ययन के अनुसार, पांचवे दिन के बाद संक्रमण में कमी देखी गई।
कोरोना वायरस(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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अस्पताल में किया प्रयोग
- इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के ग्रेट ओरमंड स्ट्रीट अस्पताल में बेड की रेलिंग पर संक्रमण छोड़ा और इसके 10 घंटे बाद पूरे अस्पताल का गहराई से अवलोकन किया तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। शोधकर्ताओं ने पाया कि संक्रमण पूरे वार्ड के कोने-कोने तक फैल चुका है।
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कोरोना वायरस(प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
50 फीसदी नमूनों में वायरस
- शोधकर्ताओं ने प्रयोग के दौरान एक कोरोना मरीज की सांस से लिए वायरस के साथ कृत्रिम तौर पर पौधों को संक्रमित करने वाले एक अन्य वायरस का इस्तेमाल किया, जो मनुष्य को संक्रमित नहीं कर सकता था। इन दोनों वायरस को पानी की एक बूंद में मिलाकर बेड की रेलिंग पर छोड़ दिया गया। बाद में अस्पताल से लिए गए 50 फीसदी नमूनों में वायरस मिला।

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