इबोला मौजूदा समय में दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। अफ्रीकी देश कांगो और यूगांडा से शुरू हुई ये संक्रामक बीमारी लोगों में डर बढ़ाती जा रही है। इसी हफ्ते जारी एक रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने बताया कि अफ्रीका के अधिकतर क्षेत्रों में इसका उच्च जोखिम है, लेकिन अच्छी बात ये है कि वैश्विक स्तर पर इसका खतरा फिलहाल कम ही है। इस प्रकोप में अब तक कम से कम 600 संदिग्ध मामले सामने आए हैं और 139 मौतें हुई हैं।
Ebola Outbreak 2026: बंडिबुग्यो स्ट्रेन बढ़ा रहा खतरा, जान लीजिए ये जरूरी बातें; सरकार ने जारी की एडवाइजरी
भारत में फिलहाल इबोला का कोई प्रकोप नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक संपर्क के कारण सतर्कता बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग, संदिग्ध यात्रियों की निगरानी और स्वास्थ्य विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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इबोला का खतरा- सरकार की एडवाइजरी
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा में इबोला बीमारी के फैलने और इसके खतरों को देखते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) पहले ही 17 मई 2026 को इसे 'अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर चुका है।
- 22 मई 2026 को डब्ल्यूएचओ की इमरजेंसी कमेटी ने सभी देशों को सलाह दी कि एयरपोर्ट और बॉर्डर जैसे एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ाई जाए।
- प्रभावित इलाकों से आने वाले बुखार या संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों की जल्दी पहचान के लिए ये जरूरी है।
- सरकार ने लोगों को उन देशों की यात्रा करने से बचने की सलाह भी दी गई है, जहां इबोला संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं।
क्या है भारतीयों के लिए सलाह?
भारत सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि कांगो और युगांडा के अलावा इससे सटे देशों, खासकर दक्षिण सुडान में भी संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा माना जा रहा है। ऐसे में यहां भी अगर यात्रा की प्लानिंग है तो इसे कैंसिल कर दें।
- इसके अलावा जो भारतीय नागरिक फिलहाल इन देशों में रह रहे हैं उन्हें स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने और अतिरिक्त सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है।
- इबोला के मौजूदा प्रकोप के लिए बंडिबुग्यो स्ट्रेन को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
- अभी तक भारत में इबोला का कोई भी मामला सामने नहीं आया है।
- यह गंभीर बीमारी है और इसमें मौत का खतरा काफी ज्यादा होता है। फिलहाल इस स्ट्रेन के इबोला से बचाव या इलाज के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है।
भारत के इतिहास में अब तक केवल एक केस
इबोला संक्रमण को पहली बार 1976 में अफ्रीका में देखा गया था। डब्ल्यूएचओ अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में समय-समय पर फैलता रहा है।
भारत में अबतक इतिहाल में केवल एक व्यक्ति को इस बीमारी का शिकार पाया गया है। साल 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैले वैश्विक इबोला के जोखिमों के दौरान एकमात्र मामला 10 नवंबर, 2014 में सामने आया था।
लाइबेरिया से लौटे 26 वर्षीय भारतीय नागरिक में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के दौरान पुष्टि हुई थी। हालांकि उसे सफलतापूर्वक आइसोलेट कर ठीक कर लिया गया था और देश में इससे संबंधित संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया था।
कैसे फैलती है ये संक्रामक बीमारी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला संक्रमितों की मृत्यु दर कई बार 50% तक या उससे अधिक देखी गई है।
- इबोला मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित जानवरों के संपर्क से फैलता है।
- शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है।
- गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव तक हो सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बेहद खतरनाक संक्रमण मानते हैं।
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स्रोत:
WHO Declares Ebola Outbreak a Public Health Emergency of International Concern; Africa CDC Declares Public Health Emergency of Continental Security
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