हमारा शरीर स्वस्थ रहे, सभी अंग ठीक तरीके से काम करते रहें और हर अंग तक निरंतर पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचता रहे इसके लिए जरूरी है कि खून का संचार बेहतर तरीके से हो। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खून का संचार हमारे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है। जब इस रक्त प्रणाली में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है।
Health Alert: ये बीमारी हो गई तो पूरी जिंदगी चढ़वाना पड़ सकता है खून, कहीं आपको भी तो नहीं है खतरा?
भारत सहित दुनिया के कई देशों में थैलेसीमिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीमारी से पीड़ित लोगों को अक्सर बार-बार खून चढ़ाने (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की जरूरत पड़ती है। आखिर ये समस्या होती क्यों है और आप इससे कैसे बचे रह सकते हैं?
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थैलेसीमिया रोग और इसका खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि थैलेसीमिया रोग को लेकर सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि इसके गंभीर मामलों में रोगियों को जीवनभर नियमित अंतराल पर खून चढ़वाते रहने की जरूरत होती है। चूंकि शरीर में खुद से हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता है इसलिए ऐसे मरीजों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर रहना पड़ता है।
हर साल 8 मई को इंटरनेशनल थैलेसीमिया डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच व इलाज के महत्व को समझाना है।
- थैलेसीमिया एक आनुवांशिक रक्त विकार है, जो जीन में गड़बड़ी के कारण होता है।
- ये जीन शरीर को पर्याप्त मात्रा में जरूरी हीमोग्लोबिन बनाने से रोकते हैं, जिसके कारण लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और एनीमिया हो जाता है।
- यह एक लाइफ-लॉन्ग यानी जीवनभर रहने वाली बीमारी है जिसका पूरी तरह इलाज संभव नहीं है।
थैलेसीमिया में क्या दिक्कतें होती हैं?
मायोक्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार थैलेसीमिया की बीमारी माता-पिता से बच्चों में ट्रांसफर होती है।
- ये दो प्रकार की होती है, माइनर और मेजर।
- माइनर में लक्षण हल्के होते हैं और व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है, हालांकि मेजर थैलेसीमिया की स्थिति में मरीजों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है।
- यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को शादी से पहले ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं जिससे पहले से ही इस समस्या के पता चल जाए और बच्चों में इसके खतरे को कम किया जा सके।
- थैलेसीमिया के साथ पैदा होने वाले बच्चों का शारीरिक विकास धीमा हो जाता है। ऐसे लोगों में हड्डियों की कमजोरी और ब्रेन से संबंधित दिक्कतें भी देखी जाती हैं।
इस बीमारी की पहचान क्या है?
थैलेसीमिया के लक्षण आमतौर पर इस बात पर निर्भर करते हैं कि ये बीमारी कितनी गंभीर स्थिति की है। माइल्ड थैलेसीमिया में आमतौर परलक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन गंभीर मामलों में बचपन में ही इसकी पहचान की जा सकती है।
- हीमोग्लोबिन की कमी और एनीमिया के कारण लगातार कमजोरी और थकान बने रहता है।
- त्वचा में पीलापन, सांस लेने में तकलीफ, दिल की धड़कन तेज होने जैसी दिक्कतें भी होती रहती हैं।
- थैलेसीमिया वाले बच्चों का शारीरिक विकास भी धीमा होता है। उनका वजन व लंबाई भी सामान्य से कम रह जाती है।
थैलेसीमिया से बचाव कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, थैलेसीमिया को रोका नहीं जा सकता। अगर आपको यह बीमारी है तो जेनेटिक काउंसलर की सलाह लें, इससे पता किया जा सकता है कि आप बच्चों को इस बीमारी से कैसे बचा सकते हैं?
- थैलेसीमिया के शिकार मरीजों को नियमित रूप से खून चढ़वाते रहने की जरूरत होती है। डॉक्टर आपको इस बीमारी के कारण होने वाली दिक्कतों से बचाने के लिए दवाएं और जरूर उपाय बताते हैं।
- शादी से पहले स्क्रीनिंग टेस्ट कराना बेहद जरूरी है। इससे बीमारी की पहचान करके आने वाली पीढ़ियों में इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
- गर्भावस्था के दौरान भी जांच के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि बच्चा थैलेसीमिया से प्रभावित है या नहीं?
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।