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Alert: कोरोना के साथ फैलने लगी एक और जानलेवा बीमारी, इलाज के बाद भी 15% लोगों की हो जाती है मौत

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 21 Jun 2025 05:57 PM IST
सार

  • कई देशों में जारी कोरोना के संक्रमण के बीच एक और नई संक्रामक बीमारी के बढ़ने की खबर है।
  • हाल ही में दो तस्मानियाई महिलाओं को इनवेसिव मेनिंगोकोकल बीमारी का निदान किया गया है।
  • इनवेसिव मेनिंगोकोकल डिजीज एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है जिसकी मृत्युदर काफी अधिक हो सकती है।

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संक्रामक रोगों के बढ़ते मामले - फोटो : Adobe stock photos

Meningococcal Disease: दुनिया के कई देशों में जारी कोरोना संक्रमण के बीच एक और नई संक्रामक बीमारी के खतरे को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दो तस्मानियाई महिलाओं में इनवेसिव मेनिंगोकोकल बीमारी का निदान किया गया है जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके साथ इस साल अब राष्ट्रीय स्तर पर इस रोग के मामलों की संख्या बढ़कर 48 हो गई है।



स्वास्थ्य अधिकारियों ने सभी लोगों से लक्षणों पर नजर रखने और बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि प्रभावित क्षेत्रों में सभी लोग एक बार डॉक्टर से मिलकर जांच करा लें कि क्या उन्हें टीकाकरण की जरूरत है?

इनवेसिव मेनिंगोकोकल डिजीज एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है जो नीसेरिया मेनिंगिटिडिस (Neisseria meningitidis) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। इनवेसिव का मतलब है कि संक्रमण रक्त के माध्यम से और आपके अंगों में तेजी से फैलता है। इसके कारण दीर्घकालिक स्वास्थ्य जटिलताओं की आशंका रहती है, यही कारण है कि रोगियों के लिए आपातकालीन चिकित्सा देखभाल महत्वपूर्ण हो जाता है। 

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मेनिंगोकोकल डिजीज के हो सकते हैं गंभीर मामले - फोटो : Freepik.com

इलाज के बाद भी सेहत में नहीं होता सुधार

अध्ययन की रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि ये बीमारी बहुत गंभीर है। उपचार के साथ इसकी मृत्युदर 10-15% तक हो सकती है वहीं जिन लोगों का इलाज नहीं हो पाता है उनमें  मृत्युदर 50% तक हो सकती है। गंभीर बात ये भी है कि जो लोग इस रोग से बच जाते हैं, उनमें से भी 30% लोग स्थाई रूप से संज्ञानात्मक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक विकलांगता का शिकार हो जाते हैं।

हालांकि अच्छी बात ये है कि इससे बचाव के लिए वैक्सीन मौजूद हैं, जो संक्रमण और मौत के खतरे को कम कर सकते हैं।

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बैक्टीरियल संक्रमण - फोटो : Freepik.com

बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हर दस में से लगभग एक व्यक्ति की नाक या गले में ये बैक्टीरिया होता है। हवा के माध्मय से या भोजन साझा करने से ये आसानी से एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। ये मुख्यरूप से मौखिक और श्वसन स्राव जैसे लार के संपर्क के माध्यम में आने या चुंबन के माध्यम से फैल सकता है।

जिस व्यक्ति के शरीर में ये बैक्टीरिया होते हैं उनमें इसके कोई खास लक्षण नजर नहीं आते हैं, इसलिए ये समझना कि किससे आपको खतरा है? ये कठिन हो सकता है।

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संक्रमण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock

किसे संक्रमण का खतरा अधिक और क्या हैं इसके लक्षण?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मेनिंगोकोकल डिजीज किसी को भी हो सकता है। लेकिन एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं, किशोरों और 15-25 वर्ष की आयु के युवाओं में इसके विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में संक्रमण के कारण गंभीर रोग विकसित होने के मामले भी अधिक देखे जाते रहे हैं। 

संक्रमण के शिकार लोगों में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है। संक्रमण के कारण बुखार, सिर दर्द, गर्दन में अकड़न, तेज रोशनी से परेशानी होना (फोटोफोबिया), मतली, उल्टी या दस्त के अलावा त्वचा पर लाल और बैंगनी रंग के दाने हो सकते हैं। 

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो आपको तुरंत अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क करना चाहिए, जल्दी निदान और इलाज आपको गंभीर समस्याओं से सुरक्षित रखने के लिए बहुत जरूरी है।

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संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण - फोटो : Freepik.com

कैसे करें इस रोग से बचाव?

डॉक्टर बताते हैं, मेनिंगोकोकल रोग का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। लक्षणों को ठीक रखने के लिए आपको अन्य दवाएं और उपचार दी जा सकती हैं। 

हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना, बीमार लोगों से दूर रहना इस संक्रामक रोग से बचाव के लिए जरूरी है। हाथों को अच्छी तरह से धोना और गंदे हाथों से अपनी आंखें, नाक या मुंह को छूने से बचना बैक्टीरिया के फैलने से रोकने में मदद करता है।  जिन स्थानों पर संक्रमण का जोखिम देखा जा रहा है वहां वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है।


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स्रोत

Practice avoidance and infection prevention

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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