दुनियाभर में तेजी से बढ़ती क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों के लिए जिन कारणों को सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है- मोटापा उनमें से एक है। भारतीय आबादी में ये समस्या और भी तेजी से बढ़ती जा रही है। गुरुवार (29 जनवरी) को संसद में पेश इकोनॉमिक सर्वे में देश में बढ़ती इस गंभीर चुनौती को लेकर लोगों को अलर्ट किया गया है।
Economic Survey 2026: हर उम्र पर भारी पड़ रहा मोटापा, तुरंत सुधार लें ये आदत वरना बढ़ सकती है परेशानी
इकोनॉमिक सर्वे 2026 में कहा गया है कि भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है और ये देश के लिए
गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। मोटापे को कंट्रोल करने के लिए विशेषज्ञों ने भोजन में सही पोषण वाली चीजें लेने और डाइट में सुधार को प्राथमिकता के तौर पर मानने पर जोर दिया है।
इकोनॉमिक सर्वे में मोटापे को लेकर जताई गई चिंता
सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक आहार में गड़बड़ी, लाइफस्टाइल में बदलाव जैसे ज्यादा देर तक बैठे रहने की आदत, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स अधिक खाने और कुछ पर्यावरणीय कारक मोटापे की समस्या को बढ़ाते जा रहे हैं।
- मोटापा सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है। इसके कारण डायबिटीज, दिल की बीमारी और हाइपरटेंशन का खतरा भी बढ़ रहा है।
- सर्वे में शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी को मोटापे से प्रभावित पाया गया है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि खाने वाली चीजों के पैकेट के सामने की तरफ चेतावनी के साथ हाई फैट, शुगर और सॉल्ट (एचएफएसएस) की न्यूट्रिशन लेबलिंग की जानी चाहिए। ताकि लोग जो खा रहे हैं वह कितना हेल्दी या नुकसानदायक है ये समझ सकें।
भारत में बढ़ते मोटापे की स्थिति चिंताजनक
इससे पहले नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2019-21 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन वाले या मोटापे का शिकार थे।
- रिपोर्ट के मुताबिक 15-49 साल के आयु वर्ग में 6.4 प्रतिशत महिलाएं और 4 प्रतिशत पुरुष मोटापे से पीड़ित थे।
- इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में वजन बढ़ने की समस्या 2015-16 में 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 2019-21 में 3.4 प्रतिशत हो गई है।
- 2020 में भारत में 3.3 करोड़ से ज्यादा बच्चे मोटापे का शिकार थे। रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि 2035 तक यह संख्या 8.3 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स सेहत के लिए खतरनाक
इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स मोटापा बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार खाद्य पदार्थ है। वहीं भारत अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की बिक्री के लिए सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से भी एक है। इसमें 2009 से 2023 तक 150 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। जिसका मतलब है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का खपत देश में तेजी से बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर लोगों के वजन पर देखा जा रहा है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स, लंबे समय से चले आ रहे खाने-पीने के तरीकों की जगह ले रहे हैं, जिससे डाइट की क्वालिटी खराब हो रही है और कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस तरह की चीजों की खपत पर रोक लगाने के लिए सुबह से लेकर देर रात तक चलने वाले इनके विज्ञापनों पर भी बैन लगाने की जरूरत है।
मोटापा कम करने के लिए चलाई गई योजनाएं
सर्वे में कहा गया है, 2009 से 2023 के दौरान पुरुषों और महिलाओं दोनों में मोटापा लगभग दोगुना हो गया है।
कई मंत्रालयों द्वारा रणनीतिक रूप से ऐसे कदम उठाए गए हैं जो स्वास्थ्य, पोषण, शारीरिक गतिविधि, खाद्य सुरक्षा और जीवनशैली में बदलाव में सुधार लाने वाले हो सकते हैं। पोषण अभियान और पोषण 2.0, फिट इंडिया मूवमेंट, खेलो इंडिया, ईट राइट इंडिया और 'आज से थोड़ा कम' अभियान खान-पान और दिनचर्या में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सर्वे में बताया गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तेल की खपत में 10 प्रतिशत की कमी लाने और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने मोटापा को रोकने और तेल की खपत को कम करने के लिए 'मोटापा रोको और मोटापे से लड़ने के लिए जागरूकता पहल' अभियान शुरू की है।
---------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।