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World Heart Day 2022: बढ़ते हृदय रोगों के जोखिम को लेकर वैज्ञानिकों का बड़ा दावा, इस वजह से बिगड़ रहे हालात

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 29 Sep 2022 12:05 AM IST
हृदय रोगों को बढ़ते वैश्विक खतरे को लेकर अलर्ट
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वैश्विक स्तर पर हृदय रोगों का खतरा काफी तेजी से बढ़ता हुआ रिपोर्ट किया जा रहा है। हृदय रोगों को कुछ दशक पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियों के तौर पर जाना जाता था, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसके मामले 40 से भी कम उम्र के लोगों में देखे जा रहे हैं। कई लोगों की कम उम्र में हार्ट अटैक के कारण मौत भी हो गई है, विशेषज्ञ इसे बड़े खतरे के तौर पर देख रहे हैं। हृदय रोगों के बारे में लोगों को जागरूक करने और इसके बढ़ते गंभीर मामलों के वैश्विक जोखिम को कम करने के उद्देश्य के साथ हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है।

हृदय रोगों के बढ़ते जोखिम के कारणों के समझने के लिए किए जा रहे एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बड़ा दावा किया है। वैज्ञानिकों ने लोगों को सचेत करते हुए बताया है कि पृथ्वी के तापमान में वृद्धि और ग्लोबल वार्मिंग को हृदय रोगों के जोखिम के तौर पर पाया गया है और इसके और भी बदतर होने के संकेत हैं।

इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने हार्ट फेलियर वाले रोगियों में शरीर के वजन और वातावरण में बढ़ते तापमान के बीच के संबंध को समझने की कोशिश की है। वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि जिस तरह से समय के साथ तापमान में वृद्धि दर्ज की जा रही है, इसके काफी गंभीर परिणाम हो सकते हैं, विशेषकर यह हृदय रोगों के जोखिम को काफी बढ़ाने वाली स्थिति है। ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
बढ़ता तापमान हृदय के लिए खतरनाक
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तापमान में वृद्धि के दुष्परिणाम

फ्रांस स्थित मोंटपेलियर यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में बताया कि साल 2019 में  हीटवेब के दौरान, हार्ट फेलियर के शिकार रोगियों में वजन कम होने के लिए बढ़ते तापमान और ग्लोबल वार्मिंग को एक कारण के तौर पर देखा गया है, जो उनकी स्थिति के बिगड़ने का संकेत देते हैं।

अध्ययन के लेखक प्रोफेसर फ्रेंकोइस रूबिल कहते हैं, इस अध्ययन में हमने हार्ट फेलियर वाले रोगियों में वजन कम होने की जो समस्या देखी है वह सामान्यतौर पर खड़े होने की स्थिति में निम्न रक्तचाप का कारण बन सकती है। भविष्य के लिए बढ़ते तापमान के पूर्वानुमान के आधार पर इस तरह की समस्याओं को जोखिम बढ़ाने वाला माना जा रहा है, यह बड़ा खतरा हो सकता है।
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हृदय रोगों का बढ़ता जोखिम
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हीटवेब और हार्ट फेलियर के बीच संबंध

अध्ययन की रिपोर्ट में शोधर्ताओं ने बताया कि हार्ट फेलियर वाले रोगियों का हृदय, शरीर में पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता है। इस स्थिति में शरीर में अपशिष्ट उत्पाद जमा होने लग जाते हैं, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है और फेफड़ों, पैरों और पेट में तरल पदार्थ का निर्माण होता है। ऐसे रोगियों में वजन का ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है। ऐसे रोगियों को अक्सर मूत्रवर्धक दवाएं दी जाती रही हैं जो मूत्र उत्पादन बढ़ाने और सांस फूलने-सूजन को कम करने में मदद करती हैं। इस शोध में अध्ययन के लेखकों ने अनुमान लगाया कि हीटवेब के दौरान हार्ट फेलियर वाले मरीजों के शरीर का वजन कम हो सकता है। 
हृदय रोगों के बढ़ते जोखिम को लेकर अलर्ट
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अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए क्रोनिक हार्ट फेलियर वाले 1420 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इनकी औसत आयु 73 वर्ष थी इसमें 28% महिलाएं थीं। वजन और लक्षणों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए एक राष्ट्रीय टेलीमॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया गया था। अध्ययन के तहत इन रोगियों को एक विशेष उपकरण के माध्यम से रोजाना वजन को मॉनीटर करने के लिए कहा गया। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि तापमान बढ़ने साथ लोगों का वजन भी कम हो रहा था। 78 किलो वजन वाले मरीजों ने थोड़े समय में 1.5 किलो वजन कम किया। 
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हृदय की सेहत का रखें ख्याल
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अध्ययन का निष्कर्ष

अध्ययन के निष्कर्ष में प्रोफेसर फ्रेंकोइस रूबिल कहते हैं, तापमान में बढ़ोतरी के साथ शरीर के वजन में नोट किया गया परिवर्तन हृदय रोगियों के लिए जोखिमों को बढ़ाने वाला है। इस खतरे को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों को मूत्रवर्धक की खुराक कम करने के बारे में भी विचार करना चाहिए। बढ़ता तापमान कई प्रकार से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता रहा है, इस अध्ययन में इसके हृदय रोगियों में गंभीर परिणाम देखे गए हैं। इस अध्ययन के परिणाम पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है, तापमान में वृद्धि वैश्विक रूप से हृदय स्वास्थ्य की समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। 



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स्रोत और संदर्भ
Scientists warn of worsening heart disease as global warming sees temperatures soar

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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