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Alert: डायबिटीज से लेकर हार्ट की बीमारियों के लिए ये दो आदतें सबसे ज्यादा जिम्मेदार, समय रहते कर लें सुधार

Fri, 03 Jan 2025 08:33 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 03 Jan 2025 08:33 PM IST
सार

मधुमेह और हृदय रोगों का खतरा सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। 30 से कम आयु के लोगों में इसका जोखिम देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। आइए जानते हैं कि ये बीमारियां क्यों बढ़ रही हैं?

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sedentary lifestyle and smoking These Two Habits Are Responsible for Diabetes to Heart Problems
डायबिटीज-हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com

लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण वैश्विक स्तर पर कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा देखा जा रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोग इसका शिकार हो रहे हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। 30 से कम आयु के लोगों में भी इसका जोखिम बढ़ता देखा जा रहा है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज और हार्ट की बीमारियों का जोखिम आनुवांशिक रूप से अधिक होता है, यानी कि जिन लोगों के माता-पिता को ये समस्या रही है उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि दिनचर्या की दो आदतें डायबिटीज से लेकर हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा रही हैं, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। कहीं आप भी तो इन आदतों का शिकार नहीं हैं?

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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com

युवा वयस्कों में बढ़ रही हैं ये बीमारियां

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, युवा वयस्क कई कारणों से हृदय रोग-डायबिटीज का शिकार होते जा रहे हैं। धूम्रपान, अस्वास्थ्यकर आहार, नींद संबंधी विकार और शारीरिक निष्क्रियता की कमी इसका प्रमुख कारक हैं। हृदय रोग और डायबिटीज का पारिवारिक इतिहास होना भी आपमें इन गंभीर बीमारियों को बढ़ाने वाला हो सकता है। इसके अलावा अगर आपका वजन अधिक है तो ये स्थिति भी आपमें इन दोनों बीमारियों का जोखिम बढ़ाने वाली हो सकती है। 

हालांकि जिन दो कारकों को हार्ट और डायबिटीज रोग के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जा रहा है वो हैं- सेंडेंटरी लाइफस्टाइल और धूम्रपान की आदत।

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सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के नुकसान - फोटो : Freepik.com

सेंडेंटरी लाइफस्टाइल का शिकार तो नहीं?

सेंडेंटरी लाइफस्टाइल का मतलब दिन का ज्यादातर समय बैठे-बैठे या आराम करते हुए बिताने से है। शारीरिक रूप से निष्क्रियता की इस स्थिति को सेहत के लिए कई प्रकार से गंभीर माना जाता रहा है। क्रोनिक बीमारियों के लिए इसे प्रमुख कारण माना जाता है। 

सेंडेंटरी लाइफस्टाइल (लंबे समय तक बैठे रहने से) रक्त प्रवाह की समस्या प्रभावित हो जाती है। इससे एथेरोस्क्लेरोसिस होने का खतरा रहता है जिसमें धमनियां संकरी और सख्त हो जाती हैं। ये स्थिति हार्ट के लिए खतरनाक है। वहीं अधिक बैठे रहने के कारण इंसुलिन संवेदनशीलता भी प्रभावित हो जाती है, जिससे डायबिटीज हो सकता है।

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धूम्रपान से होने वाली समस्याएं - फोटो : freepik.com

आप धूम्रपान तो नहीं करते?

धूम्रपान की आदत भी आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। धूम्रपान धमनियों की परत को नुकसान पहुंचाने लगता है जिसमें कोरोनरी धमनियां भी शामिल हैं, जो हृदय को ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति करती हैं। इसके अलावा धूम्रपान से रक्त में फाइब्रिनोजेन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे रक्त का थक्का जम जाता है। इससे हृदय रोगों का खतरा रहता है।

इसी तरह अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान करने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज होने की आशंका धूम्रपान न करने वाले लोगों की तुलना में 30-40% अधिक होती है।

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सेहत का रखें ख्याल - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टर्स कहते हैं, भले ही आपको अभी हार्ट-डायबिटीज की कोई समस्या न हो फिर भी इसके जोखिमों को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहना चाहिए। आहार और दिनर्या को ठीक रखकर आप इन दोनों बीमारियों से बचाव कर सकते हैं। खान-पान को पौष्टिक रखें और शरीर को सक्रिय रखें। इसके अलावा नियमित रूप से सेहत की जांच कराते रहना भी इन बीमारियों से बचे रहने के लिए आवश्यक है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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