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Sleep Disorder Effect: 7 घंटे से कम लेते हैं नींद तो शरीर में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा, करें ये उपाय

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Mon, 30 Jun 2025 07:09 PM IST
सार

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में तनाव और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के कारण, लोग अक्सर नींद से समझौता करते हैं और 7 घंटे से कम सोते हैं। बता दें कि कम सोने से शरीर में कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

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Sleep Disorder Effect on Health Less Than 7 Hours Sleep Increases Risk of These Health Issues
नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock

Kam Sone Ke Nuksan: हमारे शरीर और मस्तिष्क के लिए नींद उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना भोजन और पानी है। यह केवल आराम करने का समय नहीं है, बल्कि एक जटिल जैविक प्रक्रिया है जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक वयस्क को रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेनी चाहिए।



हालांकि, आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में, तनाव और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के कारण, लोग अक्सर नींद से समझौता करते हैं और 7 घंटे से कम सोते हैं। अनियमित और अपर्याप्त नींद लेने से शरीर में कई समस्याएं हो सकती हैं, जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। नींद की कमी का असर हमारी एकाग्रता, मूड, प्रतिरक्षा प्रणाली और यहां तक कि हृदय स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। आइए इस लेख में, हम जानते हैं कि जो लोग पूरी नींद नहीं ले पाते हैं या 7 घंटे से कम की नींद लेते हैं, उनमें किन बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है, और उससे बचने के क्या उपाय हैं।

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Sleep Disorder Effect on Health Less Than 7 Hours Sleep Increases Risk of These Health Issues
नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock

हृदय रोगों का खतरा
कम नींद लेने से रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है, जो हृदय रोग और स्ट्रोक का कारण बन सकता है। नींद की कमी तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को बढ़ाती है, जो धमनियों में सूजन पैदा करता है। इसलिए रोज लगभग 7 घंटे की नींद लें।


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नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock

मधुमेह का खतरा
अपर्याप्त नींद इंसुलिन संवेदनशीलता को कम करती है, जिससे टाइप-2 मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। नींद की कमी ब्लड शुगर लेवल को असंतुलित करती है। ऐसे में रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें और रात में भारी भोजन से बचें। गुनगुना पानी या हर्बल चाय को अपनी डाइट में शामिल करें, ये स्लिप साइकिल को बनाए रखने में मदद करता है। संतुलित आहार और हल्का व्यायाम भी मधुमेह के जोखिम को कम करता है।


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नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
कम नींद लेना चिंता, अवसाद और तनाव को बढ़ाती है। यह मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को प्रभावित करता है, जो भावनाओं और निर्णय लेने की क्षमता को नियंत्रित करता है। नींद की कमी से एकाग्रता और याद रखने की क्षमता भी कमजोर होती है। रोजाना एक निश्चित समय पर सोएं और जागें। सोने से पहले स्क्रीन टाइम (मोबाइल, टीवी) कम करें, क्योंकि नीली रोशनी मेलाटोनिन (नींद वाले) हार्मोन को प्रभावित करती है।

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इम्युनिटी - फोटो : Adobe stock photos
कमजोर इम्यूनिटी और मोटापा
नींद की कमी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है, जिससे सर्दी, फ्लू और अन्य इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। साथ ही, यह भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन को बढ़ाती है, जिससे मोटापा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित सोने और जागने का समय निर्धारित करें। सोने से 2 घंटे पहले भारी भोजन और कैफीन से बचें। सोने से पहले गहरी सांस लेने की तकनीक या योग निद्रा अपनाएं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 
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