शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ अच्छा खाना और रोजाना व्यायाम करना ही काफी नहीं है। पर्याप्त नींद भी उतनी ही जरूरी है। रात में अच्छी और गहरी नींद मिलने से शरीर और दिमाग को आराम मिलता है और अगले दिन हम बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं। आमतौर पर वयस्कों को हर रात करीब 6 से 8 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है।
Sleep Deprivation: गुस्सा, चिड़चिड़ापन और भूलने की आदत कर रही है परेशान? कहीं नींद की कमी तो नहीं है वजह
पर्याप्त नींद न मिलने का असर अगले दिन के कामकाज पर साफ दिखाई दे सकता है। व्यक्ति को किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है और छोटे-छोटे फैसले लेने में भी दिक्कत महसूस हो सकती है।
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नींद पूरी न होने पर शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
पर्याप्त नींद न मिलने का असर अगले दिन के कामकाज पर साफ दिखाई दे सकता है। आपको को किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है और छोटे-छोटे फैसले लेने में भी दिक्कत महसूस हो सकती है। दिनभर सुस्ती और थकान बनी रह सकती है, जिससे काम या पढ़ाई का प्रदर्शन प्रभावित होता है।
- नींद की कमी का असर व्यवहार पर भी पड़ सकता है। आपको सामान्य से ज्यादा चिड़चिड़ापन हो सकता है, जल्दी गुस्सा आ सकता है या अपनी भावनाओं को संभालने में परेशानी हो सकती है।
- अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी और काम करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।
- कुछ नींद संबंधी विकारों में रात के समय सांस लेने में रुकावट या सांस का अनियमित होना भी देखा जाता है। ऐसे मामलों में व्यक्ति पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बावजूद अच्छी नींद नहीं ले पाता।
मानसिक सेहत पर भी पड़ सकता है असर
नींद और मानसिक स्वास्थ्य का आपस में गहरा संबंध है। लगातार कम नींद लेने से तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। लंबे समय तक नींद की समस्या बनी रहने पर चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
- नींद की कमी का असर सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न लेने को मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसे स्वास्थ्य जोखिमों से भी जोड़ा गया है।
- इसके कारण व्यक्ति की रोजमर्रा की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
- बच्चों और किशोरों के लिए पर्याप्त नींद और भी महत्वपूर्ण है। नींद की कमी का असर उनकी सीखने की क्षमता, ध्यान लगाने, याददाश्त और व्यवहार पर पड़ सकता है।
- इसलिए बच्चों में लगातार नींद की समस्या को सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कहीं गंभीर तो नहीं हो रही नींद की समस्या?
नींद की गुणवत्ता पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुछ लक्षणों में आपको खास सावधानी बरतनी चाहिए।
- गाड़ी चलाते समय बार-बार झपकी आने लगना।
- टीवी देखते या किताब पढ़ते समय थोड़ी देर में ही नींद आने लगना।
- काम या पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना।
- काम करने की क्षमता या प्रदर्शन में कमी आना।
- चीजें याद रखने में पहले की तुलना में ज्यादा परेशानी होना।
- छोटी-छोटी बातों पर भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ जाना या भावनाओं को संभालने में कठिनाई होना।
- दिन के समय बहुत ज्यादा नींद महसूस होना।
अगर ये परेशानियां लगातार बनी रहती हैं, रात में सोने में दिक्कत होती है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी दिनभर नींद आती रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।