देशभर में मानसून अब रफ्तार पकड़ने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक उत्तर भारत के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। महाराष्ट्र में तेज बारिश के कारण हालात बिगड़ रहे हैं, वहीं असम में बाढ़ का प्रकोप जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून के इस मौसम में, विशेषकर बाढ़ प्रभावित हिस्सों में पानी की गंदगी के कारण कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बाढ़ के कारण होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण दूषित पानी को भी माना जा सकता है। इस खतरे को देखते हुए सरकार और प्रशासन को प्रभावित लोगों तक साफ पीने का पानी पहुंचाने का प्रबंध करना चाहिए।
UNICEF Initiative: बाढ़ प्रभावित असम के लिए अनूठा प्रयास, दूषित पानी के कारण होने वाली बीमारियों का कम होगा खतरा
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दूषित पानी से होने वाली बीमारियां
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, दूषित पानी और स्वच्छता में कमी हैजा, दस्त, पेचिश, हेपेटाइटिस-ए, टाइफाइड और पोलियो जैसी बीमारियों के संचरण का कारण बन सकती है। विशेषकर बाढ़ प्रभावित हिस्सों में सुविधाओं की कमी के कारण इन समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है। साफ पीने के पानी की अनुपलब्धता और स्वच्छता की कमी के कारण ऐसे हिस्सों में संक्रमण और बीमारियां बढ़ जाती हैं, जिसके कारण हर साल हजारों की मौत होती है।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि अस्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की कमी के कारण हर साल करीब 829,000 लोगों की डायरिया से मौत हो जाती है। अगर इन जोखिम कारकों पर ध्यान दिया जाए तो हर साल 5 साल से कम उम्र के 297 000 बच्चों की जान बचाई जा सकती है। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में हाथ धोते रहने और साफ पानी की व्यवस्था बनाकर कई तरह के संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है।
मौजूदा समय में बाढ़ प्रभावित असम के कछार में यूनिसेफ के इस प्रयास से प्रभावितों को बीमारियों से बचाने में सफलता मिल सकेगी।
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नोट: यह लेख यूनिसेफ द्वारा साझा की गई रिपोर्ट और सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।