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Autism Alert: किन बच्चों में होता है ऑटिज्म का खतरा, कैसे करें इसकी पहचान? रिपोर्ट में जानिए सबकुछ विस्तार से

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 31 Mar 2026 05:30 PM IST
सार

World Autism Awareness Day 2026: ऑटिज्म  एक न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्या है जो दिमाग के विकास के तरीके को प्रभावित करता है। दुनिया भर में लगभग 1% बच्चों में ऑटिज्म पाया जाता है। कहीं आपका बच्चा भी तो इसका शिकार नहीं है?

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ऑटिज्म की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com

क्या आपके बच्चे को भी लोगों से आई कॉन्टैक्ट करने में दिक्कत होती है? देर से बोलता है या एक ही व्यवहार को दोहराता रहता है? अगर ये समस्या कुछ समय से बनी हुई है तो समय रहते डॉक्टरी सलाह जरूर ले लें, कहीं आपका बच्चा ऑटिज्म का शिकार तो नहीं है?



ऑटिज्म वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती एक न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्या है जो दिमाग के विकास के तरीके को प्रभावित करती है। बचपन के शुरुआती वर्षों में ही इसके लक्षणों की आसानी से पहचान हो सकती है। मेडिकल की भाषा में इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर कहा जाता है। इस तरह के बच्चों के लिए दैनिक जीवन के कई कार्य काफी कठिन हो जाते हैं।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनिया भर में लगभग 1% बच्चों में ऑटिज्म हो सकता है, हर 60-65 में से एक बच्चा इस समस्या का शिकार देखा जा रहा है। सभी माता-पिता के लिए शुरुआती दिनों में बच्चों के व्यवहार और उनकी गतिविधियों पर ध्यान देते रहना जरूरी होता है।

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बच्चों में ऑटिज्म की समस्या - फोटो : Freepik.com

ऑटिज्म है क्या, इसे समझ लीजिए

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर लोगों के सामाजिक मेलजोल और व्यवहार को प्रभावित करती है। क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट में विशेषज्ञ कहते हैं, ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है। यही कारण है कि इसमें डॉक्टर बच्चे को उनकी क्षमताओं का अधिकतम लाभ उठाने और उनके सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने में मदद करने के तरीके समझाते हैं।
 

  • ऑटिज्म को स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक अलग-अलग स्तर पर दिखाई दे सकते हैं।
  • कुछ बच्चे सामान्य रूप से स्कूल जा सकते हैं, जबकि कुछ को विशेष सहायता की जरूरत होती है।
  • थेरेपी के माध्यम से लक्षणों में सुधार किया जा सकता है।
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ऑटिज्म की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com

बच्चों में ऑटिज्म की पहचान क्या है?

ऑटिज्म कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकता है, बच्चों में इसके संकेत स्पष्ट तौर पर देखे जा सकते हैं। ऑटिज्म के शिकार बच्चों को सामाजिक रूप से बातचीत और मेल-जोल में कठिनाइयां होती हैं। बच्चे के व्यवहार में अगर कुछ असामान्य सा नोटिस होता है तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए।
 

  • नाम लेने पर बच्चा कोई खास प्रतिक्रिया नहीं देता है।
  • अकेले खेलता है, साथ के बच्चों के साथ मेलजोल नहीं बना पाता।
  • बात करते समय आंखें झुकाए रहता है।
  • एक ही शब्द को या फिर एक ही गतिविधि को बार-बार करता रहता है।
  • एक काम से दूसरे काम की तरफ शिफ्ट होने में परेशानी होती है।
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कहीं आपके बच्चे को भी तो नहीं है ऑटिज्म की दिक्कत - फोटो : Freepik.com

किन बच्चों को ज्यादा खतरा?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ बच्चों में ऑटिज्म होने का खतरा अधिक रहता है। समय से पहले जन्मे (प्री-मैच्योर) बच्चे, जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं या जिनके परिवार में पहले से किसी को ऑटिज्म रहा है ऐसे बच्चों में ऑटिज्म होने का जोखिम ज्यादा रहता है। 

अध्ययन की रिपोर्ट में पाया गया है कि जिन बच्चों की नींद पूरी नहीं होती है, उनमें ऑटिज्म होने का खतरा अधिक रहता है। 
 

  • ऑस्ट्रेलिया में 1000 से अधिक मां और शिशुओं पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो बच्चे कम सोते हैं या जिनकी नींद की गुणवत्ता खराब होती है, उनमें ऑटिज्म विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है।
  • शिशुओं में नींद की समस्या न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों का कारण बन सकती है जिसके कारण उनके सामाजिक कौशल में कमी आ सकती है।



बच्चे को ऑटिज्म हो जाए तो इसे कैसे ठीक किया जाता है?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ऑटिज्म को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन शुरुआती पहचान और थेरेपी से बच्चे की सामाजिक और शैक्षणिक क्षमता में बड़ा सुधार हो सकता है। बच्चों में इस समस्या के खतरे को कम करने के लिए गर्भावस्था में नियमित जांच, संतुलित आहार, संक्रमण से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है।

2-3 साल की उम्र में बच्चे के व्यवहार में असामान्यता दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें, क्योंकि जितनी इसका इलाज होगा बच्चे के जीवन की गुणवत्ता में उतना सुधार होने के चांसेज होते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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