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World Lung Cancer Day 2025: फेफड़ों के कैंसर से जुड़े इन अफवाहों को सच तो नहीं मानते आप, जान लें हकीकत

Fri, 01 Aug 2025 08:58 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Fri, 01 Aug 2025 08:58 AM IST
सार

Lung Cancer Causes: फेफड़ों का कैंसर दुनियाभर में मौतों का एक बड़ा कारण है, और भारत में भी इसकी दरें चिंताजनक हैं। ऐसे में फेफड़े के कैंसर को लेकर हमारे समाज में कई भ्रांतियां हैं, जिसकी हकीकत के बारे में आपको भी जानना चाहिए।
 

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World Lung Cancer Day 2025 Stop Believing These Myths About Lung Cancer Know Facts
फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock

World Lung Cancer Day 2025: हर साल 1 अगस्त को 'वर्ल्ड लंग्स कैंसर डे' मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस घातक बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इसके प्रभाव को कम करने के लिए एकजुट होना है। फेफड़ों का कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है, और भारत में भी इसकी दरें चिंताजनक हैं।



इस गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के बावजूद, फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी कई ऐसी अफवाहें और गलत धारणाएं आज भी समाज में व्याप्त हैं, जो इसकी रोकथाम, शुरुआती पहचान और प्रभावी उपचार में बाधा डालती हैं। इन मिथकों को तोड़ना और वैज्ञानिक तथ्यों को जानना बेहद जरूरी है ताकि हम इस बीमारी को बेहतर ढंग से समझ सकें और इससे लड़ सकें।

World Lung Cancer Day 2025 Stop Believing These Myths About Lung Cancer Know Facts
फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock

अफवाह 1: फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही होता है
यह फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी सबसे आम और खतरनाक गलत धारणा है। हालांकि, धूम्रपान (सक्रिय और निष्क्रिय दोनों) फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है, लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि फेफड़ों के कैंसर के लगभग 10-20% मामले ऐसे लोगों में पाए जाते हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। ऐसे में, फेफड़ों का कैंसर उन लोगों को भी हो सकता है जो कभी धूम्रपान नहीं करते हैं।


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World Lung Cancer Day 2025 Stop Believing These Myths About Lung Cancer Know Facts
फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock

अफवाह 2: फेफड़ों के कैंसर के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते
यह मिथक न केवल निराशा पैदा करता है बल्कि शुरुआती निदान की संभावनाओं को भी कम करता है। यह सच है कि फेफड़ों का कैंसर अक्सर लास्ट स्टेज में पता चलता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति ने अब इसके उपचार में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। लक्षित चिकित्सा, इम्यूनोथेरेपी  और सटीक दवा जैसी नई उपचार पद्धतियों ने रोगियों के लिए जीवित रहने की दर और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार किया है, खासकर यदि कैंसर का जल्दी पता चल जाए।

जहां तक लक्षणों की बात है शुरुआती लक्षण अक्सर सूक्ष्म होते हैं, जैसे कि लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, या बिना कारण वजन घटना। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि शुरूआती स्टेज में पता चलने पर इसे ठीक किया है।


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फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock

अफवाह 3: युवा लोगों को फेफड़ों का कैंसर नहीं होता
यह एक और गलत धारणा है। हालांकि फेफड़ों का कैंसर ज्यादातर वृद्ध वयस्कों में आम है, लेकिन यह युवाओं को भी प्रभावित कर सकता है। युवाओं में होने वाले फेफड़ों के कैंसर के मामले अक्सर अलग-अलग आनुवंशिक उत्परिवर्तन(म्यूटेशन) से जुड़े होते हैं। वहीं वायु प्रदूषण निश्चित रूप से फेफड़ों के कैंसर का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है, खासकर शहरी क्षेत्रों में, लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं है।

जैसा कि पहले बताया गया है, धूम्रपान, रेडॉन गैस, व्यावसायिक जोखिम और आनुवंशिकी जैसे कई कारक मिलकर इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाते हैं। इसलिए, प्रदूषण से बचाव के साथ-साथ अन्य जोखिम कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए।

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फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock

फेफड़ों के कैंसर से जुड़े इन मिथकों को तोड़ना और वैज्ञानिक तथ्यों को समझना इस गंभीर बीमारी से लड़ने में पहला कदम है। जागरूकता बढ़ाने से शुरुआती पहचान की संभावनाएं बढ़ती हैं, जिससे उपचार के सफल होने की दर में भी सुधार होता है। जोखिम कारकों को कम करने, लक्षणों के प्रति सचेत रहने और जरूरी होने पर डॉक्टरों से सलाह लेने से हम फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते बोझ को कम कर सकते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 
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