Diabetes and Depression Link: ब्लड शुगर बढ़े रहने की समस्या संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है। इससे सिर्फ डायबिटीज का ही नहीं शरीर के कई अंगों पर भी खतरा हो सकता है।डायबिटीज आज के समय में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुकी है।
World Mental Health Day 2025: डायबिटीज का मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है असर, डिप्रेशन का बढ़ जाता है खतरा
- डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक हाई शुगर लेवल रहने से शरीर की नसें, आंखें, किडनी, हृदय और यहां तक कि दिमाग तक प्रभावित हो सकते हैं।
- अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का शुगर लेवल अक्सर बढ़ा हुआ रहता है ऐसे लोगों में मेंटल हेल्थ की समस्या जैसे स्ट्रेस और डिप्रेशन होने का खतरा भी अधिक हो सकता है।
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डायबिटीज रोगियों में डिप्रेशन होने का जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कभी-कभी उदास या निराश महसूस होना बहुत सामान्य है। यह जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। लेकिन अगर आप लंबे समय तक उदासी, चिंता और निराशा में रहते हैं, तो इसका मतलब हो सकता है कि आपको अवसाद है।
जिन लोगों को पहले से डायबिटीज की दिक्कत रही है उनमें अवसाद होने का खतरा और भी ज्यादा देखी जा सकती है। मधुमेह से पीड़ित 40% लोगों ने कहा कि निदान के बाद से उन्हें अपनी मानसिक स्थिति को लेकर संघर्ष करना पड़ा है।
मनोचिकित्सक कहते हैं, जब भी बात डायबिटीज की होती है तो इससे संबंधित शारीरिक समस्याओं के बारे मे तो लोग सावधान रहते हैं पर मानसिक सेहत पर होने वाले इसके दुष्प्रभावों को लेकर कम बात की जाती है।
डायबिटीज और अवसाद का क्या लिंक है?
डॉक्टर कहते हैं, वैसे तो मधुमेह सीधे तौर पर अवसाद का कारण नहीं बनता, लेकिन मधुमेह में होने वाली दिक्कतें इसको बढ़ाने वाली हो सकती हैं, इसलिए जिन लोगों को पहले से हाई डायबिटीज की दिक्कत होती है उन्हें मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहना चाहिए।
पिछले शोधों से पता चला है कि टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में बिना डायबिटीज वालों की तुलना में अवसाद होने की आशंका ज्यादा होती है। इसी तरह से अवसाद से ग्रस्त लोगों में भी टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा भी ज्यादा होता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
हालांकि डायबिटीज यूके द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि डिप्रेशन, टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाने में प्रत्यक्ष भूमिका भी निभा सकता है। शोध के निष्कर्ष में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में वृद्धि पर अवसाद के प्रभावों के बारे में बताया है। इसमें पाया गया है कि पूरी तरह तो नहीं लेकिन आंशिक रूप से अवसाद और मधुमेह के बीच के संबंध हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने सात आनुवंशिक परिवर्तनों की भी पहचान की है जो अवसाद और मधुमेह दोनों का कारण बन सकते हैं। ये जीन इस बात को निर्धारित करते हैं कि इंसुलिन के उत्पादन कैसे होगा और ये मस्तिष्क, अग्न्याशय में सूजन पैदा कर सकते हैं।
टाइप-2 डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य दोनों का रखें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर में ये बदलाव दर्शाते हैं कि अवसाद, टाइप-2 डायबिटीज के जोखिमों को बढ़ा सकता है। शोध से यह भी पता चला है कि टाइप-1 डायबिटीज वाले लोगों में भी अवसाद होने की आशंका अधिक हो सकती है। अवसाद के कुछ लक्षण आपके डायबिटीज प्रबंधन पर भी सीधा प्रभाव डाल सकते हैं।
- अक्सर और लंबे समय तक उदास महसूस करना।
- रात में बार-बार जागना, या बिस्तर से न उठ पाना।
डॉक्टर कहते हैं, डायबिटीज के रोगियों को मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने वाले उपाय करते रहने चाहिए, वहीं जिन लोगों को अवसाद है उन्हें डायबिटीज कंट्रोल करने पर ध्यान देना जरूरी है।
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स्रोत
Depression and diabetes
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