Air Pollution And Risk of Pneumonia: हर साल 12 नवंबर को वर्ल्ड निमोनिया डे मनाया जाता है, इसका उद्देश्य निमोनिया के प्रति लोगों को जागरूक करना है। हमारे देश के कई हिस्सों में इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम पर है, अगर दिल्ली की बात करें तो यहां के अधिकतर हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स लगभग 350 है।
World Pneumonia Day 2025: वायु प्रदूषण से निमोनिया का है गहरा संबंध, आप भी बरतें ये सावधानियां
World Pneumonia Day 2025: निमोनिया एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है। वायु प्रदूषण से इस बीमारी का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि वायु प्रदूषण कैसे निमोनिया के जोखिम को बढ़ा देता है और इससे बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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PM2.5 कण कैसे खोलते हैं संक्रमण का रास्ता
वायु प्रदूषण में मौजूद PM2.5 कण इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों में गहराई तक पहुंच जाते हैं। ये कण फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और प्राकृतिक सफाई तंत्र को बाधित करते हैं। इस क्षति के कारण, फेफड़ों में बैक्टीरिया और वायरस को आसानी से बढ़ने का मौका मिल जाता है। निमोनिया पैदा करने वाले रोगाणु इन क्षतिग्रस्त ऊतकों में तेजी से घर बना लेते हैं, जिससे सामान्य सर्दी-जुकाम भी जल्दी ही गंभीर निमोनिया में बदल सकती है।
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घर के अंदर की हवा को शुद्ध रखें
प्रदूषण के उच्च स्तर के दौरान घर के अंदर की हवा को साफ रखना सबसे महत्वपूर्ण है। अपने घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। घर में धूपबत्ती, अगरबत्ती या मच्छर भगाने वाली कॉइल जलाने से बचें, क्योंकि ये भी PM2.5 कणों का उत्पादन करते हैं। रसोई के धुएं और नमी को बाहर निकालने के लिए वेंटिलेशन का ध्यान रखें।
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मास्क का उपयोग
जब एक्यूआई 'खराब' या 'बहुत खराब' श्रेणी में हो, तो घर से बाहर की गतिविधियों से पूरी तरह बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो N95 या N99 मास्क जरूर पहनें, क्योंकि ये सूक्ष्म कणों को प्रभावी ढंग से छानते हैं। अस्थमा या COPD के मरीजों को प्रदूषण के दिनों में सुबह या शाम की सैर से बचना चाहिए।
निमोनिया से बचाव के लिए फ्लू और न्यूमोनिया का टीका लगवाना विशेष रूप से बच्चों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए जरूरी है। इसके साथ ही, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स (जैसे आंवला, अदरक) से भरपूर आहार को डाइट में शामिल करें। हाथों को नियमित रूप से धोएं और यदि सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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