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Thyroid Disorder: महिला या पुरुष, किसे थायरॉइड रोग का खतरा ज्यादा? जानिए इस बीमारी से बचने के लिए क्या करें

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 24 May 2026 07:47 PM IST
सार

World Thyroid Day 2026: भारत में थाइरॉइड के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडियन थाइरॉइड सोसाइटी के अनुसार देश में करोड़ों लोग किसी न किसी थाइरॉइड डिसऑर्डर से प्रभावित हैं, लेकिन बड़ी समस्या यह है कि बहुत से लोगों को लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चलता। आइए जानते हैं कि किसे इस बीमारी का जोखिम ज्यादा होता है और क्यों?

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थायरॉइड की समस्या का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

थायरॉइड की बीमारी वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इसका शारीरिक-मानसिक दोनों प्रकार की सेहत पर असर हो सकता है। भारत में थायरॉइड के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडियन थायरॉइड सोसाइटी के अनुसार देश में 42 मिलियन (4.2 करोड़) से अधिक लोग थायरॉइड संबंधी विकारों का शिकार हैं। हाइपोथायरॉइडिज्म सबसे आम स्थिति है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है।



थायरॉइड विकार के कारण थकान, वजन बढ़ने या कम होने, बाल झड़ने, मूड स्विंग, दिल की धड़कन तेज होने या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण बने रह सकते हैं। कम उम्र के लोग भी इस समस्या का शिकार देखे जा रहे हैं। 

थायरॉइड विकारों की शीघ्र पहचान और उनके उचित उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल  25 मई को विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी को लेकर लोगों के मन में कई सारे सवाल रहते हैं। एक बड़ा सवाल ये है कि महिला या पुरुष, किसे इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है? आइए इस बारे में जान लेते हैं।

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थायरॉइ़ड की बीमारी का खतरा - फोटो : Adobe Stock

थायरॉइड की समस्या को जानिए

थायरॉइड एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि है जो गर्दन के सामने मौजूद होती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, वजन, शरीर के तापमान, ऊर्जा के स्तर और मानसिक स्वास्थ्य तक को नियंत्रित करती है। ये मुख्यरूप से T3 और T4 (थायरॉक्सिन) हार्मोन बनाती है।
 

  • जब यह ग्रंथि सही मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती या फिर बहुत ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है तब शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
  • अध्यययनों से पता चलता है कि खराब लाइफस्टाइल, तनाव, खानपान और नींद में गड़बड़ी के अलावा बढ़ता प्रदूषण थायरॉइड की समस्याओं का बड़ा कारण है।
  • थायरॉइड की बीमारी को आमतौर पर वजन बढ़ने से जोड़ा जाता है पर असल में ये समस्या कई अन्य तरह से भी सेहत को प्रभावित करने वाली हो सकती है।
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थायरॉइड की समस्या क्यों बढ़ रही है? - फोटो : Freepik.com

क्यों बढ़ रही है थायरॉइड की बीमारी? 

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत सहित कई देशों में थायरॉइड के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। लाइफस्टाइल की गड़बड़ी और बढ़ते तनाव को इसका बड़ा कारण माना जाता है। 
 

  • बहुत ज्यादा तनाव शरीर के हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे थायरॉइड ग्रंथि की कार्यक्षमता बिगड़ सकती है।
  • प्रोसेस्ड-जंक फूड का अधिक सेवन और आहार में पोषक तत्वों की कमी भी थायरॉइड विकारों को बढ़ा सकती है।
  • आहार में आयोडीन की कमी भी आपको इस बीमारी का शिकार बना सकती है।
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महिलाओं में थायरॉइड की समस्या - फोटो : Freepik.com

महिला या पुरुष, किसे ज्यादा खतरा? 

थायरॉइड को लेकर किए गए तमाम अध्ययनों की रिपोर्ट से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड विकारों का खतरा अधिक होता है। 
 

  • अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के मुताबिक महिलाओं में यह जोखिम पुरुषों की तुलना में 5 से 8 गुना तक अधिक हो सकता है। 
  • महिलाओं में होने वाले बार-बार हार्मोनल बदलाव इसका बड़ा कारण माने जाते हैं।
  • पीरियड्स, गर्भावस्था, प्रसव और मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और अन्य हार्मोन में होने वाला बदलाव थायरॉइड की समस्याओं को बढ़ाने वाला माना जाता है।
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थायरॉइ़ड की बीमारी से कैसे बचें? - फोटो : Adobe Stock

इन समस्याओं से कैसे बचा जा सकता है?

क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर थायरॉइड की बीमारियां आनुवंशिक होती हैं जिन्हें पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता। आप जटिलताओं या हार्मोनल असंतुलन के जोखिमों को कम कर सकते हैं।
 

  • थायरॉइड की बीमारियों से बचे रहने के लिए आहार में आयोडीन की मात्रा ठीक रखना सबसे जरूरी है। 
  • आयोडीन युक्त नमक, दही, दूध, अंडे थायरॉइड की समस्याओं को कम कर सकते हैं।
  • सेलेनियम और जिंक जैसे पोषक तत्व भी जरूरी हैं। इसके लिए अखरोट, सीड्स, दालें और हरी सब्जियां खाएं।
  • स्ट्रेस-एंग्जाइटी भी इस बीमारी का बड़ा कारण है। इससे बचने के लिए नियमित योग, मेडिटेशन और व्यायाम करें।
  • जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को थायरॉइड की समस्या रही है, उन्हें नियमित थायरॉइड टेस्ट कराते रहना चाहिए।



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स्रोत:
Thyroid cancer gender disparity


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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