Office Tips: दफ्तर में निजी जीवन को पेशेवर कामकाज से दूर रखना चाहिए। इससे दोनों ही क्षेत्रों में सामंजस्य बैठाया जा सकता है और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। निजी जीवन को दफ्तर से अलग रखने से आपके व्यक्तिगत मामलों की गोपनीयता बनी रह सकती है। निजी और पेशेवर जीवन को अलग रखने से आप काम पर अधिक फोकस कर सकते हैं और घर पर भी परिवार के लिए वक्त निकाल सकते हैं। हालांकि अगर आपके दफ्तर में कोई सहकर्मी निजी जीवन और पेशेवर जीवन के बीच आने लगे या आपके निजी जीवन में हस्तक्षेप करना शुरू कर दे तो उन्हें ऐसा करने से रोकें। सहकर्मी को आपके निजी जीवन में हस्तक्षेप से रोकने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं।
Office Tips: सहकर्मी करता है निजी जीवन में हस्तक्षेप तो अपनाएं ये तरीके, बताएं दायरा
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संवाद और स्पष्टता
सबसे पहले तो सहकर्मी से मिलकर सामने से बातचीत का प्रयास करें। सहकर्मी द्वारा आपके निजी जीवन में हस्तक्षेप करने की क्या वजह या आवश्यकता है, यह पूछें। उन्हें स्पष्ट रूप से समझाएं कि आपके निजी जीवन या किसी भी तरह के मामलों में उनका हस्तक्षेप आपको पसंद नहीं है। अगर आप स्पष्ट रूप से उन्हें मना कर देंगे तो वह ये बात दोबारा करने में संकोच करेंगे।
नियमित और संयमित जीवन
सहकर्मी आपके निजी जीवन की बातें दफ्तर में तब ही करेगा, जब आप खुद अपने निजी जीवन को दूसरे से साझा करेंगे। दफ्तर में पेशेवर जीवन को अपनाएं। इसके लिए नियमित और संयमित जीवन में रहें। सहकर्मी को यह जताएं कि आप अपने काम को लेकर काफी पेशेवर हैं, ताकि उन्हें आपकी निजिता में हस्तक्षेप का मौका ही न मिले।
सीमित संपर्क
ऐसे सहकर्मियों के साथ अपना संपर्क सीमित करें। यानी सहकर्मी अगर आपके निजी जीवन की बातें या आपके प्रति जजमेंटल होता है, तो उससे कम बात करें और उनकी सीमाएं तय करें, ताकि वह अपनी लिमिट क्रॉस न कर सकें।
सहायता प्राप्त करें
सहकर्मी का आपके जीवन में अधिक हस्तक्षेप होने लगा तो कार्यक्षेत्र और निजी जीवन दोनों ही प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में अपने वरिष्ठ सहकर्मी, मैनेजर या एचआर को इस बारे में सूचना देते हुए मदद प्राप्त करें।