इन पांच देशों के माता-पिता करते हैं सबसे अच्छी परवरिश, आप भी ले सकते हैं ये सीख
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फ्रांस जैसे देश में अभिभावक अपने बच्चे को शुरु से ही कुछ सीमाओं का ज्ञान देते हैं जैसे अपने बच्चे को खाने के समय संयम बरतना सिखाते हैं। साथ ही वो ये भी बताते हैं कि रात के समय जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर उनका बच्चा रात में रोता है तो वो तुरंत ही चुप कराने नहीं जाते बल्कि पहले ये समझने की कोशिश करते हैं कि उनका बच्चा क्यों रो रहा है। लेकिन इन बातों का ये मतलब नहीं है कि अपने बच्चे को आप भी रात भर के लिए रोता छोड़ दें। अगर बच्चा सोने के लिए रो रहा है तो उसके पास थोड़ी देर न जाने से हो सकता है कि वो अपने आप सोने की कोशिश करे। इस तरह से ली गई नींद में वो देर तक सोएगा। ये सब आदतें अगर बच्चे के अंदर बचपन से डाली जाएगी तो बड़े होने पर उसे आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
जर्मनी और डेनमार्क जैसी जगहों के बच्चे सबसे ज्यादा खुश रहते हैं। यहां के अभिभावक अपने बच्चों की परवरिश के लिए पैरैंट्स शब्द को ही परिभाषित करते हैं। वो बताते हैं कि इन शब्दों में ही उनकी खुशहाल परवरिश छुपी हुई है।
जापानी लोगों का अपने बच्चों को पालने का तरीका बाकी दुनिया से जुदा होता है। ये अपने बच्चे का इतना ज्यादा ध्यान नहीं रखते कि बच्चा पूरी तरह से अभिभावक पर निर्भर हो जाए। जापानी अभिभावक बच्चों को शरुआत से स्कूल अकेले जाना सिखाते हैं जिससे कि इनके बच्चे आत्मनिर्भर बनें। दूसरी सबसे आश्चर्यजनक बात है कि ये अपने बच्चे को सार्वजनिक रुप से अपना प्रेम और स्नेह नहीं दिखाते हैं। जापानियों के अंदर आत्म अनुशासन की ये कला उनके अंदर बचपन से ही डाली जाती है।
चीनी अभिभावक अपने बच्चे की परवरिश में इस बात का ध्यान रखते हैं कि उनके बच्चे आत्मनिर्भर बनें लेकिन इसके साथ ही वो बच्चों के रोजमर्रा के काम और उनके फैसले में दखल देते रहते हैं। चीनी माता-पिता अपने बच्चे को बड़ों का आदर करना बचपन से ही सिखाते हैं। भले ही जापानी अपने बच्चों के फैसले में सहायता करते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वो उनके गलत कामों में भी साथ देते हैं।