कोरोना: लॉकडाउन बच्चों को परिवार से जोड़ रहा है
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ये छुट्टियां बच्चों के लिए गर्मियों के पहले शुरू हुए मॉनसून जैसी हैं। हालांकि, कुछ माएं इन छुट्टियों से ज्यादा खुश नहीं हैं, जबकि कुछ वर्किंग महिलाएं इसे एक लंबे वीकेंड के तौर पर ले रही हैं। कई परिवार इस लॉकडाउन का इस्तेमाल परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और आपसी रिश्ते मजबूत करने में कर रहे हैं। चेन्नई में एक्सेंचर में काम करने वाली आईटी प्रोफेशनल प्रिया आनंद 10 साल और 4 साल के दो बच्चों की मां हैं। वह कहती हैं, "मुझे ऐसा लग रहा है जैसे की अभी वीकेंड ही चल रहा हो।"
वह कहती हैं कि इस वक्त का इस्तेमाल बच्चों को कुकिंग और दूसरे क्राफ्ट सिखाने के लिए किया जा सकता है। वो कहती हैं, "इस बार समर कैंप्स नहीं होंगे और ऐसे में घर ही लर्निंग ग्राउंड बन गया है।" बच्चों के घर में ही बंद होने पर वह कहती हैं, "हां, घर तितर-बितर पड़ा हुआ है, लेकिन मैं घर को ज्यादा वक्त तक साफ करने के लिए तैयार हूं। मुझे बच्चों के घर पर रहने में कोई शिकायत नहीं है।"
तमिलनाडु के मदुरै जिले के थेनी में रहने वाली नागिनी कंडाला का बेटा 12 साल का है। वह बताती हैं, "मेरा बेटा किताबें पढ़कर और हमारे साथ टीवी पर खबरें देखकर वक्त बिताता है। यह उसके लिए एक अच्छा ब्रेक है।" हैदराबाद की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट जीसी कविता कहती हैं कि बड़े बच्चों के मुकाबले टीनेज और छोटे बच्चों को संभालने में कहीं ज्यादा दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि हाल में एक टीनेज लड़की की मां ने उनसे संपर्क किया और कहा कि मौजूदा हालात की गंभीरता के बारे में वो बेटी को समझाएं क्योंकि वह सोशल आइसोलेशन में नहीं रहना चाहती। वो बताती हैं "लड़की की मां ने कहा कि कि उनकी बेटी को घर पर घुटन होती है क्योंकि उसे बाहर जाने और दोस्तों से मिलने की इजाजत नहीं मिल रही है। मुझे उनकी बेटी लड़की को यह समझाने में काफी वक्त लगा कि वह टेक्नोलॉजी के जरिए अपने दोस्तों के साथ वर्चुअली कनेक्टेड है।"
कई महिलाएं इस बात से खुश हैं कि उनके बच्चे इस दौरान हाइजीन के बारे में जागरुक हो रहे हैं और ज्यादा अनुशासित बन रहे हैं। हैदराबाद की फैशन डिजाइनर और मूवी एक्ट्रेस निहारिका रेड्डी के बच्चों की उम्र 9 साल और 6 साल है। रेड्डी बताती हैं कि वह अपने बच्चों के साथ अब ज्यादा वक्त बिताती हैं और उन्हें कहानियां सुनाती हैं, सामान्य वक्त में बिजी शेड्यूल के चलते बच्चों को वो इतना वक्त नहीं दे पाती थीं।
रेड्डी कहती हैं, "मेरे बच्चे अब हाइजीन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं और वे अपने स्नैक्स बनाने और क्राफ्ट्स को सीखने में वक्त लगा रहे हैं।"
रेड्डी खुश हैं कि उनके बच्चे अपने दादा-दादी और अन्य रिश्तेदारों से हर रोज बात कर पाते हैं क्योंकि सभी के पास अब पर्याप्त वक्त है। वो कहती हैं, "हम अब वो सब कुछ कर रहे हैं जिसे हम इतने वक्त से मिस कर रहे थे।"
कविता कहती हैं कि आमतौर पर बड़े-बुजुर्ग अपने बच्चों या पोते-पोतियों से बात करने के लिए तरस जाते हैं। वो पूछती हैं, "आज के दौर में कितने बच्चों के पास इतना टाइम है कि वे रोज़ अपने दादा-दादी या नाना-नानी से बातें कर पाएं।" कविता अपने पड़ोस का एक उदाहरण देती हैं। वह बताती हैं कि उनके पड़ोस की एक कामकाजी महिला अपने बच्चे का इस वजह से ख्याल नहीं रख पा रही है क्योंकि उसके बड़े बच्चे की छुट्टियां हो गई हैं।
कविता बताती हैं, "वह अपने बच्चों और अपने काम के शेड्यूल के बीच में बुरी तरह से उलझ गई है। बच्चे पालना उसके लिए एक बड़ा काम हो गया है और उसे घर संभालने के लिए एक फुल-टाइम मेड को रखना पड़ा।"