कहानी हरियाणा की एक लड़की की। जो अब भी समाज और परिवार की नजर में चुभ रही है, क्योंकि उन लोगों की नजरों में वो आज भी भागी हुई लड़की है। आगे की कहानी, भागी हुई लड़की शिवानी की जुबानी।
भागी हुई लड़कियां: 'मैं एक गरीब लड़के के लिए बाप की दौलत छोड़ भागी'
मेरे पापा अक्सर नौकरी के सिलसिले में विदेश रहते। अमीर-गरीब की जो कैटेगिरी समाज में बनी हुई है, उस हिसाब में हमारा परिवार अमीर था और रवि का परिवार गरीब। रवि की नौकरी तक नहीं लगी थी। इधर मेरे पापा मम्मी से कहा करते थे, ''मैं अपनी बेटी शिवानी का ब्याह ऐसा करूंगा कि पूरे गांव ने नहीं देखा होगा।''
मम्मी अक्सर टोककर कहतीं, ''इस छोरी को इतना मत बिगाड़ो। गरीब घर में ब्याह हुआ तो इसके चोचले नहीं चलेंगे।'' पापा हंसते हुए कहते, ''गरीब घर में क्यों जाएगी मेरी बेटी। बेटी को खूब सारे रुपये बांध के भेजूंगा।''
सब अच्छे से चल रहा था कि मेरे चाचा को रवि और मेरे बारे में पता चल गया। मैंने हिम्मत कर पापा से कहा कि रवि भी हमारी तरह यादव है। वो शादी के लिए राजी भी हुए, लेकिन पता नहीं क्यों वो अचानक अपनी ही बेटी से किया वादा भूल गए और विदेश लौट गए। इस बीच चाचा ने मेरी मार पिटाई शुरू कर दी। चाचा मोहल्ले के सामने पीटते। डराने के लिए करंट लगाते। मम्मी को बुरा तो लगता, पर वो कुछ कहती नहीं थीं। रवि अपने परिवार के साथ बात करने मेरे घर भी आया लेकिन चाचा ने साफ कह दिया, ''छोरी को जान से मार देंगे लेकिन तुम्हारे घर ब्याह नहीं करेंगे।''
चाचा ने तो एक बार खाने में ज़हर तक मिलाकर पिला दिया था। लेकिन मेरी किस्मत में मरना नहीं था। बच गई तो पापा छुट्टी लेकर घर आए और मेरे लिए लड़का खोजकर सगाई की बात चलने लगी। मैंने कहीं से नंबर निकालकर लड़के वालों से कह दिया कि मुझे कोई और पसंद है। मेरी कही इस एक लाइन से वो रिश्ता और मेरा फोन दोनों मुझसे छूट गए।
घरवालों ने मेरे डॉक्यूमेंट्स तक जला दिए। रवि के पापा कहते, 'बेटा तू पुलिस में शिकायत कर दे बाकी हम संभाल लेंगे।' लेकिन मैं घर से निकलती तो निकलती कैसे? लेकिन एक रात रवि के दोस्त की मदद से मैं रात को घर से निकल ली। तय जगह पर रवि से मिली। कई दिन पुलिस कस्टडी में रहे। रिश्तेदारों के यहां भटके। इस बीच रवि के घरवालों को भी खूब धमकाया गया। लेकिन धीरे-धीरे मामला शांत हुआ। आर्य समाज मंदिर में हम दोनों ने शादी कर ली।