Shardiya Navratri 2024 Visit Popular Durga Mata Temples in UP: 3 अक्तूबर 2024 से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जिसका समापन 11 अक्तूबर को नवमी तिथि पर होगा। नौ दिवसीय नवरात्रि का पर्व माता दुर्गा की अराधना का पर्व है। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा धरती पर आती हैं। इस मौके पर नौ दिवसीय विशेष पूजा का आयोजन होता है। देवी माता मंदिरों में भव्य अनुष्ठान होते हैं।
Shardiya Navratri 2024: नवरात्रि में करें यूपी के इन प्राचीन देवी माता मंदिरों के दर्शन, कुछ तो हैं सिद्धपीठ
उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और देवी भक्त हैं तो शारदीय नवरात्रि के मौके पर प्राचीन दुर्गा माता मंदिरों और शक्तिपीठों के दर्शन के लिए जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के शक्तिपीठ
वाराणसी में स्थित विशालाक्षी शक्तिपीठ
भगवान शिव की प्रिय नगरी बनारस के मणिकर्णिका घाट पर अलौकिक शक्तिपीठ है, जहां माता सती की मणिकर्णिका गिरी थी। यहां माता के विशालाक्षी और मणिकर्णी स्वरूप की पूजा होती है।
प्रयागराज में ललिता माता शक्तिपीठ
संगम नगरी प्रयागराज में भी देवी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जिसका नाम ललिता माता मंदिर है। यहां देवी मां के हाथ की अंगुली गिरी थी। यहां माता ललिता रूप की पूजा की जाती है।
चित्रकूट में रामगिरि शक्तिपीठ
चित्रकूट जिले में रामगिरी शक्तिपीठ भी काफी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां माता सती का दायां स्तन गिरा है। इस स्थान पर माता शिवानी के स्वरूप की पूजा होती है।
वृंदावन में श्री उमा शक्तिपीठ
भगवान कृष्ण से जुड़ी नगरी वृंदावन में श्री उमा शक्तिपीठ बना हुआ है। इस मंदिर को कात्यायनी शक्तिपीठ भी कहते हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर माता के बाल के गुच्छे और चूड़ामणि गिरे थे।
बलरामपुर में देवीपाटन शक्तिपीठ
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में देवीपाटन शक्तिपीठ है। माना जाता है कि यहां माता सती का बायां स्कन्ध गिरा था। कुछ लोगों का कहना है कि यहां माता सती का पाटन वस्त्र गिरा था। इस शक्तिपीठ में एक अखंड ज्योति जल रही है। मान्यता है कि त्रेता युग से लगातार यहां अखंड ज्योति जल रही है।
उत्तर प्रदेश के प्राचीन दुर्गा माता मंदिर
मिर्जापुर में विंध्याचल माता मंदिर
वाराणसी के निकटतम जिले मिर्जापुर में देवी का प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। विंध्याचल माता मंदिर के नाम से मशहूर इस स्थान को 51 शक्तिपीठों में प्रमुख माना जाता है। हालांकि यहां माता सती के शरीर को कोई अंग नहीं गिरा है। लेकिन मान्यता है कि देवी मां इस स्थान पर सशरीर निवास करती हैं।
गोरखपुर का तरकुलहा माता मंदिर
गोरखपुर जिले में माता का एक चमत्कारी मंदिर है, जिसे तरकुलहा मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब कोई अंग्रेज मां के मंदिर के पास से गुजरता था तो क्रांतिकारी बंधू सिंह उसका सिर काटकर देवी मां को समर्पित करता था। अंग्रेजों ने बंधू सिंह को पकड़कर सार्वजनिक फांसी दी लेकिन हर बार फांसी का फंदा टूट जाता था। यह 6 बार हुआ जिसपर जल्लाद ने बंधू सिंह से गिड़गिड़ाते हुए कहां कि अगर उन्हें फांसी नहीं दी तो अंग्रेज जल्लाद को मार देंगे। इस पर बंधू सिंह ने माता से प्रार्थना की और 7वीं बार में उन्हें फांसी हो गई।