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Yoga During Periods: पीरियड्स में योग कितना सुरक्षित? जानें एक्सपर्ट्स की राय और जरूरी सावधानियां
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Sat, 16 May 2026 11:56 AM IST
सार
Is Yoga Safe During Periods: ये सवाल अक्सर उन महिलाओं के दिमाग में आता है, जो पीरियड्स में योगासन करना चाहती हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि ये सेफ है या नहीं।
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पीरियड्स में योग कितना सुरक्षित?
- फोटो : AI
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Is Yoga Safe During Periods: पीरियड्स के दौरान महिलाओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या योग करना सुरक्षित है या नहीं। इस समय शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण थकान, पेट दर्द, ऐंठन और मूड स्विंग जैसी समस्याएं आम होती हैं, जिसकी वजह से कई महिलाएं शारीरिक गतिविधियों से बचती हैं। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि हल्का और सही तरीके का योग इस दौरान फायदेमंद हो सकता है।
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पीरियड्स में योग कितना सुरक्षित?
- फोटो : Adobe Stock
हल्का योग फायदेमंद होता है
एक्सपर्ट्स की मानें तो पीरियड्स के दौरान शरीर कमजोर और थका हुआ महसूस कर सकता है, ऐसे में भारी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए। लेकिन हल्का योग जैसे धीमी स्ट्रेचिंग, गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम और रिलैक्सेशन पोज़ शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। यह शरीर को आराम देने के साथ-साथ ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बनाते हैं। इससे थकान कम होती है और शरीर हल्का महसूस करता है।
एक्सपर्ट्स की मानें तो पीरियड्स के दौरान शरीर कमजोर और थका हुआ महसूस कर सकता है, ऐसे में भारी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए। लेकिन हल्का योग जैसे धीमी स्ट्रेचिंग, गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम और रिलैक्सेशन पोज़ शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। यह शरीर को आराम देने के साथ-साथ ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बनाते हैं। इससे थकान कम होती है और शरीर हल्का महसूस करता है।
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- फोटो : Freepik.com
दर्द और ऐंठन में राहत
पीरियड्स के दौरान पेट में ऐंठन और दर्द आम समस्या है। ऐसे में बालासन, शवासन और सुप्त बद्ध कोणासन जैसे योगासन काफी राहत दे सकते हैं। ये आसन पेट की मांसपेशियों को रिलैक्स करते हैं और क्रैम्प्स को धीरे-धीरे कम करने में मदद करते हैं।
पीरियड्स के दौरान पेट में ऐंठन और दर्द आम समस्या है। ऐसे में बालासन, शवासन और सुप्त बद्ध कोणासन जैसे योगासन काफी राहत दे सकते हैं। ये आसन पेट की मांसपेशियों को रिलैक्स करते हैं और क्रैम्प्स को धीरे-धीरे कम करने में मदद करते हैं।
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स्ट्रेस और मूड स्विंग कम होता है
हार्मोनल बदलाव के कारण मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। योग करने से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होता है, जिसे ‘हैप्पी हार्मोन’ भी कहा जाता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।
हार्मोनल बदलाव के कारण मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। योग करने से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होता है, जिसे ‘हैप्पी हार्मोन’ भी कहा जाता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।
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किन योगासनों से बचें
इस दौरान शरीर को ज्यादा दबाव देने वाले आसनों से बचना चाहिए। जैसे कि हैवी ट्विस्टिंग, उल्टे आसन (इन्वर्शन पोज) जैसे शीर्षासन, और बहुत ज्यादा स्ट्रेचिंग वाले योगासन नहीं करने चाहिए। ये शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
इस दौरान शरीर को ज्यादा दबाव देने वाले आसनों से बचना चाहिए। जैसे कि हैवी ट्विस्टिंग, उल्टे आसन (इन्वर्शन पोज) जैसे शीर्षासन, और बहुत ज्यादा स्ट्रेचिंग वाले योगासन नहीं करने चाहिए। ये शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।