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राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी: बेहिसाब चढ़ावा, असीमित गबन, भाग रहे जिम्मेदार; अब 200 करोड़ के घपले की चर्चा

Tue, 16 Jun 2026 10:07 AM IST
Sharukh Khan सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 16 Jun 2026 10:07 AM IST
सार

राम मंदिर के चढ़ावे में हुए गबन का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। इसकी कई वजहें हैं। दरअसल, चढ़ावे का हिसाब लगाने के लिए ही गिनती की जाती थी। मतलब उसके पहले ये राशि बेहिसाब होती थी। उसी दौरान उसमें से रकम पार की जाती थी।

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Ayodhya Ram Mandir Donation scam Several office-bearers of the Shri Ram Mandir Trust are under scrutiny
राम मंदिर में दान की राशि के गबन की जांच जारी। - फोटो : अमर उजाला
राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों के गबन के मामले की तफ्तीश सोमवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने शुरू कर दी। टीम ने मंदिर परिसर में बने ट्रस्ट के कार्यालय पहुंचकर दान राशि के रिकॉर्ड कब्जे में लिए। पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ की और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से बातचीत कर दान राशि की गिनती संबंधी प्रक्रिया जानी। रात तक जारी शुरुआती जांच एसआईटी को कई साक्ष्य मिले हैं।


शासन ने शनिवार को ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। टीम में शामिल लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन दोपहर करीब दो बजे अयोध्या पहुंचे। उन्होंने शहर के प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात की। इसके बाद दोपहर 2:50 बजे मंदिर परिसर पहुंचे। वहां वे सीधे ट्रस्ट के दफ्तर के भीतर गए और जानकारी जुटाई।

कई सवालों के जवाब नहीं दे सके ट्रस्ट के पदाधिकारी
एसआईटी के साथ मंडलायुक्त, डीएम और एसएसपी भी मंदिर परिसर पहुंचे। ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारी भी दफ्तर में मौजूद रहे। शाम करीब पौने छह बजे ट्रस्ट के पदाधिकारी गोपाल राव मंदिर परिसर से बाहर निकलकर चले गए। करीब एक घंटे बाद मंदिर परिसर पहुंचकर ट्रस्ट के दफ्तर पहुंचे।

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अयोध्या - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने उनसे कुछ दस्तावेज मांगे थे, जिन्हें लेने के लिए वे गए थे। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी के कई सवालों के स्पष्ट जवाब ट्रस्ट के पदाधिकारी नहीं दे सके। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के लिए बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों को भी बुलाया गया। एसआईटी ने पूछा कि बैंक ने किन कर्मियों को गिनती में लगा रखा था और उनकी भर्ती किस तरह की गई थी। उनका मुख्य कार्य क्या था?
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राम मंदिर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
कब्जे में लिए सीसीटीवी फुटेज
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने घटना से संबंधित कई सीसीटीवी फुटेज देखे। उन्हें साक्ष्य के तौर पर कब्जे में भी लिया। मामले के खुलासे के बारे में भी जाना। टीम ने यह भी देखा कि दान पात्र कितने हैं, वे कहां-कहां रखे हैं, गिनती से पहले उन्हें किस कमरे में ले जाया जाता है, फिर गिनती किस तरह की जाती है और उसका रिकॉर्ड कहां तथा कैसे सुरक्षित रखा जाता है।

 
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राम मंदिर का फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सही जवाब तलाशना एसआईटी के लिए चुनौती
मामले में अधिकांश जानकारी ट्रस्ट के जरिये ही एसआईटी को मिलेगी, जबकि ट्रस्ट के कई पदाधिकारी व उनसे जुड़े लोग पहले से ही सवालों के घेरे में हैं। ऐसे में पूरी और सही जानकारी हासिल करना भी एसआईटी के लिए चुनौती से कम नहीं होगा।
 
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राम मंदिर का फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पदाधिकारियों पर सवाल
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे में हेरफेर और गबन का मामले में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं। कुछ पर सीधे आरोप हैं, जबकि कई की लापरवाही उजागर हुई है। यह सब उनकी नाक के नीचे हुआ, लेकिन उन्हें भनक तक नहीं लगी। अब सवाल उठ रहा है कि इन पदाधिकारियों के रहते निष्पक्ष जांच कैसे संभव होगी। ट्रस्ट के पदाधिकारी शक्तिशाली और ऊंची पहुंच वाले बताए जा रहे हैं। 
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