लखनऊ विश्वविद्यालय में हबीबुल्लाह व महमूदाबाद हॉस्टल के मोड़ पर रात्रि करीब सवा दस बजे एक छात्रा बदहवास सी जोर-जोर से चिल्ला रही थी।
'बचाओ-बचाओ, मेरी दोस्त को नोंच रहे हैं ये भेड़िए'
Updated Thu, 11 Dec 2014 03:07 PM IST
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'बचाओ-बचाओ, मेरी दोस्त को नोंच रहे हैं ये भेड़िए'
'बचाओ-बचाओ, मेरी दोस्त को नोंच रहे हैं ये भेड़िए'
'बचाओ-बचाओ, मेरी दोस्त को नोंच रहे हैं ये भेड़िए'
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