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जाकिर के तबले संग गूंजा जिटार, क्या आप परिचित है इस म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट से

Mon, 18 Jul 2016 03:38 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Mon, 18 Jul 2016 03:38 PM IST
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zakir hussain and niladri kumar show in lucknow
जाकिर हुसैन और नीलाद्रि कुमार - फोटो : amar ujala

बाहर बारिश की फुहारें थीं लेकिन रविवार की शाम इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान के सभागार में बैठे लोग भी भींग रहे थे। वहां प्रख्यात तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन और नीलाद्रि कुमार का संगीत चल रहा था और सुर-ताल की लयकारियां उन्हें भिगो रही थीं। काफी दिनों बाद नगर ने शास्त्रीय संगीत के रंग में रंगी ऐसी शाम देखी थी।

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जाकिर हुसैन और नीलाद्रि कुमार - फोटो : amar ujala

जाकिर हुसैन तो तबले के उस्ताद हैं ही, नीलाद्रि कुमार भी युवा कलाकार होते हुए अपनी विशिष्ट पहचान और लोकप्रियता बना रहे हैं। इसके पीछे उनकी प्रयोगधर्मिता है। नीलाद्रि ने सितार को एक नया रूप दिया है। वे इसे इलेक्ट्रानिक बनाते हुए जिटार का नाम देते हैं। यह प्रयोग न सिर्फ सितार को एक नई पहचान देता है बल्कि उसकी ध्वनि को भी एक नया विस्तार देता है।

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जाकिर हुसैन - फोटो : amar ujala

हालांकि यह जाकिर हुसैन का बड़प्पन था कि एक आम संगतकार की तरह वे मुख्य कलाकार के रूप में नीलाद्रि कुमार के आलाप, जोड़, झाला का इन्तजार करते रहे। यह इन्तजार 20 मिनट से अधिक का था और फिर गतें शुरू होने पर उन्होंने तबला वादन शुरू किया लेकिन जब उनके जैसा कलाकार संगत करता है तो फिर वह संगत नहीं रह जाता बल्कि वह मुख्य कलाकार के समान ही हो जाता है और इस प्रकार संगत की जगह एक जुगलबन्दी शुरू हो गई।

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जाकिर हुसैन और नीलाद्रि कुमार - फोटो : amar ujala
नीलाद्रि कुमार की भी सराहना इस बात के लिए की जानी चाहिए कि उन्होंने जाकिर हुसैन जैसे कलाकार के संगतकार के रूप में उपस्थित होने के बावजूद पूरे इत्मिनान से आलाप बजाया और फिर गतें शुरू कीं। आरम्भ राग-शुद्ध कल्याण से हुआ जिसमें झपताल में मध्य लय की गत बजाई गई। इसके बाद मौसम के अनुकूल मल्हार के प्रकार का चयन हुआ और फिर अन्त में भैरवी की धुन बजी। 
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सेल्फी - फोटो : amar ujala

कठिन लयकारियां, तैयार तानें, द्रुत गति में भी सहजता से वादन, कई आवर्तनों की गूंज उत्पन्न करने की क्षमता नीलाद्रि के वादन में विशेषता बनकर उभरी। इनसे जाकिर हुसैन का तबला संवाद करता रहा। जहां नीलाद्रि आक्रान्त नहीं थे वहीं जाकिर हुसैन ने भी एक युवा कलाकार को प्रोत्साहित करने के अन्दाज में कहीं भी हावी होने की कोशिश नहीं की। आरम्भ में भातखण्डे संगीत संस्थान की कुलपति श्रुति सडोलीकर काटकर ने स्वागत किया और कलाकारों का परिचय दिया। लोगों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया व साथ में सेल्फी भी ली।

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