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Sawan Somwar: मध्य प्रदेश में हैं भगवान शिव के चमत्कारिक मंदिर, सबकी अपनी अलग कहानी, तस्वीरों में करें दर्शन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 29 Jul 2024 11:50 AM IST
सार
मप्र में ऐसे तो दो ज्योतिर्लिंग हैं, पर इनके अलावा भी कई ऐसे मंदिर है, जिनकी महिमा बताई जाती है। आज हम आपको इस मौके पर भगवान शिव के ऐसे मंदिरों के दर्शन करवाते हैं, जिनकी अपनी अलग कहानी है। तस्वीरों में करते हैं ऐसे ही शिव मंदिरों के दर्शन
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उज्जैन महाकाल का भस्म आरती में किया गया शृंगार
- फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव के प्रिय माह सावन का आज दूसरा सोमवार है। सुबह से शिव मंदिरों में दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ रही है। भगवान शिव के दर्शन, पूजन के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। मप्र में ऐसे तो दो ज्योतिर्लिंग हैं, पर इनके अलावा भी कई ऐसे मंदिर है, जिनकी महिमा बताई जाती है। आज हम आपको इस मौके पर भगवान शिव के ऐसे मंदिरों के दर्शन करवाते हैं, जिनकी अपनी अलग कहानी है। तस्वीरों में करते हैं ऐसे ही शिव मंदिरों के दर्शन
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उज्जैन महाकाल मंदिर में भस्म आरती प्रसिद्ध है
महाकालेश्वर
उज्जैन में स्थित महाकाल बाबा का मंदिर विश्व भर में प्रसिद्ध है। दक्षिण मुखी शिवलिंग के रूप में विराजित महाकाल 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां प्रतिदिन सुबह 4 बजे भस्म से आरती की जाती है। इसके दर्शन करने देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं। वीआईपी का यहां तांता लगा रहता है। सावन-भादौ में हर सोमवार यहां भगवान शिव अलग-अलग रूप में नगर भ्रमण को निकलते हैं। इनकी सवारी में लाखों लोग पहुंचते है। यहां महाकाल लोक भी बनाया गया है, जिसमें शिवलीला दर्शाती कई प्रतिमाएं हैं।
उज्जैन में स्थित महाकाल बाबा का मंदिर विश्व भर में प्रसिद्ध है। दक्षिण मुखी शिवलिंग के रूप में विराजित महाकाल 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां प्रतिदिन सुबह 4 बजे भस्म से आरती की जाती है। इसके दर्शन करने देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं। वीआईपी का यहां तांता लगा रहता है। सावन-भादौ में हर सोमवार यहां भगवान शिव अलग-अलग रूप में नगर भ्रमण को निकलते हैं। इनकी सवारी में लाखों लोग पहुंचते है। यहां महाकाल लोक भी बनाया गया है, जिसमें शिवलीला दर्शाती कई प्रतिमाएं हैं।
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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर
- फोटो : अमंर उजाला
ओंकारेश्वर
खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश का दूसरा ज्योतिर्लिंग है। यह नर्मदा किनारे स्थित है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथा ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर का है। बताया जाता है कि पूरे 12 ज्योतिर्लिंगों में शयन आरती होती है। लेकिन बाबा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रभु का रात्रि विश्राम रहता है। यहां पर बाबा ओंकार के शयन के लिए झूला, पालना, चौसर, पासे बिछाए जाते हैं। पुराणों में कहा गया है कि भोले बाबा का रात्रि विश्राम ओंकारेश्वर में ही है, और वे 3 बजे रात्रि में उठकर उज्जैन के महाकालेश्वर जाते हैं, और वहां स्नान करते हैं। इसलिए वहां की भस्म आरती प्रसिद्ध है, और यहां ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में शयन आरती प्रसिद्ध है।
खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश का दूसरा ज्योतिर्लिंग है। यह नर्मदा किनारे स्थित है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथा ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर का है। बताया जाता है कि पूरे 12 ज्योतिर्लिंगों में शयन आरती होती है। लेकिन बाबा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रभु का रात्रि विश्राम रहता है। यहां पर बाबा ओंकार के शयन के लिए झूला, पालना, चौसर, पासे बिछाए जाते हैं। पुराणों में कहा गया है कि भोले बाबा का रात्रि विश्राम ओंकारेश्वर में ही है, और वे 3 बजे रात्रि में उठकर उज्जैन के महाकालेश्वर जाते हैं, और वहां स्नान करते हैं। इसलिए वहां की भस्म आरती प्रसिद्ध है, और यहां ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में शयन आरती प्रसिद्ध है।
भोपाल के नजदीक स्थित भोजपुर मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
भोजपुर मंदिर
भोपाल से करीब 32 किमी दूर स्थित भोजपुर मंदिर की भी अपनी अलग कहानी है। यहां बहुत बड़े आकार का शिवलिंग है। शिवलिंग की ऊंचाई 12 फीट है। मंदिर देखने में अधूरा लगता है। लोग बताते हैं कि मंदिर का निर्माण और यहां शिवलिंग की स्थापना परमार राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में करवाया था। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक ही रात ने किया जाना था, लेकिन मंदिर की छत पूरी होने से पहले ही सुबह हो गई और यह काम अधूरा रह गया, जो आज तक अधूरा ही है। यह मंदिर चार स्तंभों के सहारे खड़ा है। मंदिर से कुछ दूरी पर बेतवा नदी के किनारे माता पार्तती की गुफा भी है।
भोपाल से करीब 32 किमी दूर स्थित भोजपुर मंदिर की भी अपनी अलग कहानी है। यहां बहुत बड़े आकार का शिवलिंग है। शिवलिंग की ऊंचाई 12 फीट है। मंदिर देखने में अधूरा लगता है। लोग बताते हैं कि मंदिर का निर्माण और यहां शिवलिंग की स्थापना परमार राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में करवाया था। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक ही रात ने किया जाना था, लेकिन मंदिर की छत पूरी होने से पहले ही सुबह हो गई और यह काम अधूरा रह गया, जो आज तक अधूरा ही है। यह मंदिर चार स्तंभों के सहारे खड़ा है। मंदिर से कुछ दूरी पर बेतवा नदी के किनारे माता पार्तती की गुफा भी है।
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मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
पशुपतिनाथ मंदिर
मंदसौर जिले में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर काफी प्रसिद्ध है। शिवना नदी के किनारे बना ये मंदिर काफी प्राचीन है। साढ़े सात फीट लंबा शिवलिंग स्थापित है। प्रतिमा के ऊपर के चार मुख शिव के बाल्यकाल, युवावस्था, अधेड़वस्था, वृद्धावस्था को प्रदर्शित करते है। माना जाता है कि विश्व में अष्टमुखी शिवलिंग सिर्फ यहीं पर है। हर साल शिवना नदी इस शिवलिंग का अभिषेक करने आती है। भगवान शिव की यह प्रतिमा अपनी कलात्मकता के कारण श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है। यहां सालभर ही देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदसौर जिले में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर काफी प्रसिद्ध है। शिवना नदी के किनारे बना ये मंदिर काफी प्राचीन है। साढ़े सात फीट लंबा शिवलिंग स्थापित है। प्रतिमा के ऊपर के चार मुख शिव के बाल्यकाल, युवावस्था, अधेड़वस्था, वृद्धावस्था को प्रदर्शित करते है। माना जाता है कि विश्व में अष्टमुखी शिवलिंग सिर्फ यहीं पर है। हर साल शिवना नदी इस शिवलिंग का अभिषेक करने आती है। भगवान शिव की यह प्रतिमा अपनी कलात्मकता के कारण श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है। यहां सालभर ही देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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