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Dhar Bhojshala: भोजशाला के भविष्य की सुनवाई कल से; एएसआई की रिपोर्ट खुलेगी, इसी से तय होगा आगे का रास्ता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 15 Feb 2026 05:42 PM IST
सार
Bhojshala Controversy: भोजशाला मामले में सोमवार से ASI की 98-दिवसीय सर्वे रिपोर्ट इंदौर हाईकोर्ट में खोली जाएगी। इसी आधार पर स्थल के धार्मिक स्वरूप पर निर्णय होगा। अंतिम फैसले तक पूजा-नमाज व्यवस्था यथावत रहेगी और पक्षकारों को आपत्तियां दर्ज करने का अवसर मिलेगा।
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धार भोजशाला पर कल से हाईकोर्ट में सुनवाई
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन धार की ऐतिहासिक भोजशाला के भविष्य को लेकर सोमवार से हाईकोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। इसकी शुरुआत में पहले दिन एएसआई द्वारा प्रस्तुत की गई सर्वे की रिपोर्ट खोली जाएगी।
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मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है भोजशाला
- फोटो : अमर उजाला
शीर्ष अदालत ने दिए थे अहम निर्देश
दरअसल दो सप्ताह पहले 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी याचिका पर अहम निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के विरुद्ध दायर अपील का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश करेंगे। कोर्ट ने कहा था कि यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा कॉपी करने योग्य न हो, तो विशेषज्ञ और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में उसके निरीक्षण की अनुमति दी जाए।
पूजा-नमाज की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी
पक्षकारों को अपनी आपत्तियां या सुझाव दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा। हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय तक भोजशाला के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। 7 अप्रैल 2003 को जारी एएसआई के आदेश अनुसार पूजा-नमाज की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी। हालांकि शीर्ष अदालत ने मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है, सभी कानूनी दलीलें हाईकोर्ट में खुली रहेंगी।
ये भी पढ़ें- Bhojshala: धार ने धीरज धरा, भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक हुई पूजा, अमन-चैन के बीच नमाज भी हो गई अदा
दरअसल दो सप्ताह पहले 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी याचिका पर अहम निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के विरुद्ध दायर अपील का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश करेंगे। कोर्ट ने कहा था कि यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा कॉपी करने योग्य न हो, तो विशेषज्ञ और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में उसके निरीक्षण की अनुमति दी जाए।
पूजा-नमाज की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी
पक्षकारों को अपनी आपत्तियां या सुझाव दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा। हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय तक भोजशाला के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। 7 अप्रैल 2003 को जारी एएसआई के आदेश अनुसार पूजा-नमाज की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी। हालांकि शीर्ष अदालत ने मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है, सभी कानूनी दलीलें हाईकोर्ट में खुली रहेंगी।
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धार भोजशाला को लेकर 1952 से बढ़ने लगा तनाव
- फोटो : अमर उजाला
एएसआई सर्वे के आधार पर तय होगा भविष्य
याचिकाकर्ता का मानना है कि 98 दिनों के एएसआई सर्वे के आधार पर अब हाईकोर्ट भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करेगा। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन नई दिल्ली और हाई कोर्ट के अभिभाषक विनय जोशी के साथ हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल उच्च न्यायालय इंदौर में सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे।
क्या है भोजशाला का इतिहास?
भोजशाला का इतिहास 11वीं शताब्दी से शुरू होता है। कहा जाता है कि यहां पर देवी सरस्वती का मंदिर था। 12वीं-13वीं सदी में इस मंदिर को तबाह कर दिया गया और इसी जगह पर एक मकबरा और उसके करीब मस्जिद का निर्माण हुआ।
याचिकाकर्ता का मानना है कि 98 दिनों के एएसआई सर्वे के आधार पर अब हाईकोर्ट भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करेगा। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन नई दिल्ली और हाई कोर्ट के अभिभाषक विनय जोशी के साथ हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल उच्च न्यायालय इंदौर में सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे।
क्या है भोजशाला का इतिहास?
भोजशाला का इतिहास 11वीं शताब्दी से शुरू होता है। कहा जाता है कि यहां पर देवी सरस्वती का मंदिर था। 12वीं-13वीं सदी में इस मंदिर को तबाह कर दिया गया और इसी जगह पर एक मकबरा और उसके करीब मस्जिद का निर्माण हुआ।

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