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खजुराहो नृत्य समारोह: पहले दिन मंच पर बिखरे संस्कृति के रंग, शुभांरभ कर राज्यपाल ने कहा- विश्व स्तर पर मिलेगी पहचान

Mon, 21 Feb 2022 01:12 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 21 Feb 2022 01:12 PM IST
सार

राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो में 48वें  खजुराहो नृत्य समारोह-2022 का शुभारंभ किया। 

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Governor Mangubhai Patel launched Khajuraho Dance Festival, said the festival will get recognition at the world level
खजुराहो नृत्य समारोह का शुभारंभ करते राज्यपाल - फोटो : सोशल मीडिया
राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो में 48वें  खजुराहो नृत्य समारोह-2022 का शुभारंभ किया। राज्यपाल ने पर्यटन, संस्कृति एवं अध्यात्म मंत्री उषा ठाकुर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा और खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा के साथ दीप प्रज्जवलित कर समारोह का शुभारंभ किया।


इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नृत्य सार्वभौमिक कला है, जिसका जन्म मानव जीवन के साथ हुआ है। यह शिल्प, नाट्य, संगीत और साहित्य का संगम है। पुराणों में इसे दुष्ट नाशक और ईश्वरी साधना का माध्यम माना गया है। खजुराहो नृत्य समारोह इसी शास्त्रीय नृत्य की साधना का गरिमामय आयोजन है। राज्यपाल ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह खजुराहो की उत्कृष्ट पाषाण कला को विश्व स्तर पर पहचान दिलाएगा। यह न सिर्फ प्रदेश और देश बल्कि विश्व के सांस्कृतिक परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ेगा। 


 
Governor Mangubhai Patel launched Khajuraho Dance Festival, said the festival will get recognition at the world level
दीप प्रज्जवलित करते राज्यपाल और मंत्री - फोटो : सोशल मीडिया

खजुराहो में शास्त्रीय नृत्य संदर्भ का केंद्र स्थापित होगा: मंत्री उषा ठाकुर 
खजुराहो नृत्य समारोह के शुभारंभ अवसर पर संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि भारत में सभी कला की अंतर्निहित दृष्टि अध्यात्म है। मंदिरों की परंपराओं से नृत्य शैलियों का उद्भव हुआ है। तंजौर के मंदिर से भरतनाट्यम, भगवान जगन्नाथ पुरी के मंदिर से ओडीसी नृत्य, नटवर कृष्ण के नृत्य से प्रेरित कथक, केरल के गुरुवायुर मंदिर से कथकली, भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार पर आधारित मोहिनीअट्टम, और मणिपुरी नृत्य वैष्णव संप्रदाय की देन है। नृत्य सभी प्रकार के भावों की लयबद्ध प्रस्तुति है। संपूर्ण ब्रह्मांड भी लय बद्धता के कारण ही संचालित होता है। इन्हीं लयबद्ध नृत्य की मुद्राओं के रूप में खजुराहों की मूर्तियां भारतीय दर्शन की जीवंत झांकियां हैं। सनातन धर्म के चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को दर्शाती हैं। यह बाह्य जगत से अंतर्जगत की यात्रा है। मानव जीवन में नृत्य की महानता और उसके योगदान को देखते हुए खजुराहो में शास्त्रीय नृत्य संदर्भ का केंद्र स्थापित किया जाएगा।


वास्तुकला का अद्भुत नमूना हैं खजुराहो के मंदिर: मंत्री सखलेचा
एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि बुंदेलों द्वारा 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच कला और संस्कृति के संयोग को मंदिरों के रूप में स्थापित किया गया था। यह मंदिर जोमेट्री, गणित और वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। यहां की मूर्तियों में जीवन जीने की कला का चित्रण है, जो दुनिया में कहीं देखने को नहीं मिलती है। 

 
Governor Mangubhai Patel launched Khajuraho Dance Festival, said the festival will get recognition at the world level
कार्यक्रम को संबोधित करती संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
मतंगेश्वर भगवान की धरती है खजुराहो: वी.डी. शर्मा
वहीं, खजुराहो सांसद वी.डी. शर्मा ने कहा कि खजुराहो कला, संस्कृति और अध्यात्म का संगम है। इसे मृतंगेश्वर भगवान की धरती और वर्ल्ड हेरिटेज साइट होने के साथ देश के 17 आईकॉनिक सिटी में से एक होने का गौरव प्राप्त है। यहां वर्ल्ड क्लास ऑडिटोरियम के निर्माण और खजुराहो नृत्य समारोह के आयोजन से खजुराहो के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।



विश्व में विशिष्ट स्थान रखता है खुजराहो नृत्य समारोह: शिवशेखर शुक्ला
इस दौरान प्रमुख सचिव संस्कृति और पर्यटन शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह का मंच विश्व में विशिष्ट स्थान रखता है। देश-विदेश के कई नामी-गिरामी कलाकार के लिए यह मंच बहुत महत्वपूर्ण है। शासन का प्रयास है कि आने वाले समय में देश और विदेशों की अलग-अलग संस्कृति के कलाकारों को अपनी साधना के प्रदर्शन का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने सभी गणमान्य नागरिकों और 8 देशों के राजदूत एवं उच्चायुक्तों के खजुराहो नृत्य समारोह में उपस्थित होने के लिए धन्यवाद दिया। 

 
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Governor Mangubhai Patel launched Khajuraho Dance Festival, said the festival will get recognition at the world level
कार्यक्रम को संबोधित करते संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला - फोटो : सोशल मीडिया

समारोह में शामिल हुए 8 देशों के राजदूत और उच्चायुक्त 
48वें खजुराहो नृत्य समारोह में 8 देशों के राजदूत और उच्चायुक्त सपरिवार  शामिल हुए। कोरिया, अर्जेंटिना, वियतनाम, ब्रूनेई, फिनलेंड, मलेशिया, थाईलेंड और लाओ के राजदूत और उच्चायुक्त शामिल हुए। वियतनाम के राजदूत फाम सान चाऊ, लाओ राजदूत बौनेमे चौआंगहोम, फिनलैंड राजदूत ऋत्वा कौक्कू-रोंडे, ब्रूनेई के उच्चायुक्त दातो अल्हिदुद्दीन मोहम्मद तहा और मलेशिया के उच्चायुक्त हामिद अब्दुल हिदायत ने सपरिवार आकर्षक और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों का आनंद लिया। 



 
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Governor Mangubhai Patel launched Khajuraho Dance Festival, said the festival will get recognition at the world level
खजुराहो नृत्य समारोह में शामिल 8 देशों के राजदूत - फोटो : अमर उजाला

राष्ट्रीय कालिदास सम्मान और राज्य रूपंकर कला पुरस्कारों का हुआ वितरण
समारोह में राष्ट्रीय कालिदास सम्मान, शास्त्रीय नृत्य के लिए सुनयना हजारी लाल को वर्ष 2019-20 और शांता, वी.पी. धनंजयन को वर्ष 2020-21 के लिए प्रदान किया गया। उन्हें 2 लाख रुपये की सम्मान राशि, सम्मान पट्टिका, शाल और श्रीफल प्रदान किया गया। साथ ही राज्य रूपंकर कला पुरस्कार वर्ष 2022 के लिए प्रदान किए गए। देवकृष्ण जटाशंकर जोशी पुरस्कार बदनावर की प्रिया सिसोदिया, मुकुंद सखाराम भांड पुरस्कार इंदौर के स्वपन तरफदार, सैयद हैदर रजा पुरस्कार जबलपुर के दुर्गेश बिरथरे, दत्तात्रेय दामोदर देवलालीकर पुरस्कार अशोकनगर के नरेंद्र जाटव, जगदीश स्वामीनाथन पुरस्कार अशोक नगर के संजय धवले, विष्णु चिंचालकर पुरस्कार ग्वालियर के मुनि शर्मा, नारायण श्रीधर बेंद्रे पुरस्कार भोपाल के अग्नेश केरकेट्टा, रघुनाथ कृष्णराव फड़के पुरस्कार जबलपुर के ऋतुराज श्रीवास्तव, राम मनोहर सिन्हा पुरस्कार सागर की ज्योति सिंह और लक्ष्मी शंकर राजपूत पुरस्कार देवास की डॉ. सोनाली चौहान (पीठवे) को प्रदान किया गया।

 


 

खजुराहो नृत्य समारोह के पहले दिन स्व. पंडित बिरजू महाराज के शिष्यगण कलाश्रम नई दिल्ली ने कथक समूह की मनमोहक प्रस्तुति दी। तबले की थाप पर पैरों की ताल ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसी क्रम में शांता-वी.पी. धनंजयन और साथियों द्वारा भरतनाट्यम समूह नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गयी। पारंपरिक परिधानों के साथ मंझे हुए कलाकारों की संगीतमय वातावरण में ओजपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। समारोह के दूसरे दिन आज सुजाता महापात्रा भुवनेश्वर द्वारा ओडीसी, निरुपमा राजेंद्र बेंगलुरु द्वारा भरतनाट्यम कथक समागमा और जयरामा राव एवं साथी दिल्ली द्वारा कुचिपुड़ी समूह नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी।

 
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