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Omkareshwar Temple: यहां रात में विश्राम करने आते बाबा महाकाल! होती है त्रिकाल पूजा, सावन में खास तैयारियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओमकारेश्वर Published by: उदित दीक्षित Updated Mon, 14 Jul 2025 07:36 AM IST
सार

Khandwa Omkareshwar Temple: मध्यप्रदेश के खंडवा में स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग चतुर्थ ज्योतिर्लिंग है। मान्यता है कि बाबा महाकाल यहां रात्रि विश्राम करते हैं। यहां ओम आकार का पर्वत है, जिस पर शिवलिंगाकार मंदिर स्थित है।  

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Omkareshwar Temple of Khandwa Where Lord Mahakal is Believed to Rest at Night
खंडवा का ओंकारेश्वर मंदिर की कहानी। - फोटो : अमर उजाला

भारतवर्ष में बारह ज्योतिर्लिंग हैं, जिनमें चतुर्थ ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की धार्मिक और पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में स्थापित हैं। मान्यता है कि प्रभु श्री राम से 14 पीढ़ी पूर्व मांधाता राजा हुए थे, जिनकी तपस्या से ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर यहां प्रकट हुए हैं। यहां स्थित ज्योतिर्लिंग मंदिर में प्राचीन समय से ही अखंड दीप प्रज्वलित है, जिसमें एक ही दीपक में तीन बातीं प्रज्वलित की जाती हैं, जो कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश भगवान को समर्पित हैं।



यहां ओंकार पहाड़ी पर सात किलोमीटर का ओंकार पथ परिक्रमा मार्ग है। यह पूरा पर्वत ही ओम आकर में बना है। यही नहीं, जिस पर्वत पर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं, वह पर्वत स्वयं भी शिवलिंग की आकृति में स्थापित है। इसके चारों ओर मध्य प्रदेश की जीवनदायनी मां नर्मदा नदी बहती है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर धार्मिक मान्यता है कि बाबा महाकाल दिनभर अखिल ब्रह्मांड में विचरण करते हैं। वे रात्रि विश्राम ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग धाम में ही करते हैं। इसी के चलते भोले बाबा के शयन के लिए यहां रोजाना रात्रि के समय झूला, पालना, चौपड़ और पासे बिछाए जाते हैं। वहीं मान्यता अनुसार रात्रि विश्राम के बाद सुबह 3:00 बजे उठकर बाबा महाकाल उज्जैन स्थित महाकालेश्वर धाम जाते हैं। जहां वे स्नान करते हैं। इसलिए वहां की भस्म आरती प्रसिद्ध है, लेकिन ओंकारेश्वर की शयन आरती प्रसिद्ध है।

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Omkareshwar Temple of Khandwa Where Lord Mahakal is Believed to Rest at Night
खंडवा का ओंकारेश्वर मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

प्राचीन समय से होती हैं त्रिकाल पूजाएं
भगवान ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर धाम में प्राचीन समय से ही परम्परानुसार त्रिकाल पूजाएं होती हैं। यहां सुबह 5 बजे से ही सभी भक्तों के लिए दर्शन के लिए पट खुल जाते हैं। यहां दिन में सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 5:00 बजे आरती होती है, जिसके बाद मध्यकाल में दोपहर 1:00 बजे और उसके बाद रात्रि 10:00 बजे शयन आरती यहां की जाती है। इसके साथ ही श्रावण मास के प्रथम दिवस से ही यहां मां नर्मदा की महाआरती भी प्रारंभ की गई है जोकि रोजाना शाम सात बजे की जा रही है।

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शीघ्र और विशेष दर्शन की व्यवस्थाएं
ओंकारेश्वर पहुंचने वाले भक्त यदि विशेष दर्शन करना चाहते हैं तो इसके लिए मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन के सहयोग से ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। इसको लेकर श्रीओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की अधिकृत वेबसाइट के माध्यम से शीघ्र दर्शन की बुकिंग 300/ रुपए प्रति यात्री के अनुसार की जा सकती है। इसके लिए मंदिर संस्थान द्वारा क्यूआर कोड भी जारी किया गया है। साथ ही इसे गूगल पर सर्च करके भी यहां की बुकिंग सरलता से की जा सकती है। वहीं प्रोटोकॉल दर्शनार्थ आने वाले भक्तों के लिए यहां 250 रुपए का स्वैच्छिक शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं यदि कोई श्रद्धालु किसी तरह की खास पूजा विधान कराना चाहता है तो वह मंदिर संस्थान की वेबसाइट के माध्यम से बुकिंग कर अपने अनुष्ठान पूर्ण करा सकता है।

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Omkareshwar Temple of Khandwa Where Lord Mahakal is Believed to Rest at Night
ओंकारेश्वर मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

मंदिर के लिए सरलतम पहुंच मार्ग
ओंकारेश्वर नगरी से ज्योतिर्लिंग श्री ॐकारेश्वर मंदिर पहुंचने के लिए दो मार्ग हैं। पहला पुराना पैदल पुल, और दूसरा झूला पुल। यहां से यात्री पैदल ही ओंकारेश्वर मंदिर पहुंच सकते हैं। स्थानीय जिला प्रशासन और पुनासा एसडीएम द्वारा भक्तों को यहां पहुंचने और दर्शन के दौरान कोई परेशानी न हो, इसके लिए जगह-जगह साइन बोर्ड, दर्शन समय सारणी, विशेष दर्शन, ऑनलाइन बुकिंग, यात्री विश्रामालय, जूते-चप्पल फ्री सेवा, बुजुर्ग और विकलांग जनों के लिए झूला पुल स्टैंड से व्हील चेयर निःशुल्क सेवा जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं।

श्रावण सोमवार में रहती हैं विशेष व्यवस्थाएं
भगवान ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर महाराज को श्रावण मास में आने वाले प्रत्येक सोमवार पर विशेष भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही इस दिन यहां विशेष आरती भी की जाती है। इसके साथ ही श्रावण मास में पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जाता है। यही नहीं, प्रत्येक सोमवार को शाम 4:00 बजे ओंकारेश्वर भगवान की शाही सवारी के रूप में पालकी यात्रा निकाली जाती है। इस दौरान अति प्राचीन कोटितीर्थ घाट पर वैदिक विद्वान जनों की उपस्थिति में ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर का महाअभिषेक होता है। पालकी के दौरान नगर वासियों द्वारा गुलाल उत्सव मनाया जाता है। इसके बाद भगवान का नौका विहार होता है। और भगवान ओंकारेश्वर नगर भ्रमण पर निकलकर अपने भक्तों का हाल-चाल जानने निकलते हैं।

Omkareshwar Temple of Khandwa Where Lord Mahakal is Believed to Rest at Night
ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करते पुजारी। - फोटो : अमर उजाला

ट्रेन या बस से कैसे ओंकारेश्वर तक पहुंचे?
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु ट्रेन, बस या अपने निजी वाहनों का उपयोग कर सकते हैं। यही नहीं कुछ श्रद्धालु तो पैदल भी यहां तक पहुंचते हैं। यदि आप ट्रेन के माध्यम से यहां पहुंचना चाहते हैं तो आपको निकट के खंडवा रेलवे जंक्शन या इंदौर स्टेशन पर उतरना होगा। इसके बाद आप टैक्सी, ऑटो रिक्शा या यात्री बस की मदद से ओंकारेश्वर तक पहुंच सकते हैं।

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खंडवा का ओंकारेश्वर मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

वाहन पार्किंग की व्यवस्था क्या?
वहीं यदि कोई श्रद्धालु यहां तक सड़क मार्ग से आना चाहते हैं तो महाराष्ट्र की ओर से या इसके विपरीत इंदौर से आने वाले श्रद्धालु इंदौर इच्छापुर मार्ग यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। और इसी सड़क मार्ग का पैदल यात्री भी उपयोग करते हैं। हालांकि यदि आप निजी वाहनों से यहां आते हैं, तब पहले आपको अपने वाहन को पार्किंग में खड़ा करना होगा। इसको लेकर यहां ताम्रकार पार्किंग, कुबेर भंडारी पार्किंग, P1 पार्किंग, ट्रेचिंग ग्राउंड पार्किंग में स्थानीय नगर परिषद के द्वारा व्यवस्था की गई हैं।

भंडारे, बोटिंग और शंकराचार्य प्रतिमा के लिए व्यवस्था
ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को कतारों में लगना होंता है। इसके लिए भक्त या तो झूला पुल या दूसरी ओर मंदिर रैंप से कतार में लग सकते हैं। वहीं यहां आने वाले भक्तों को भंडारे या प्रसाद पाने के लिए मंदिर ट्रस्ट के द्वारा ओमकार भोजन प्रसादालय जोकि मंदिर संस्थान द्वारा संचालित है उसमें व्यवस्था की गई है। वहीं यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां नर्मदा नदी में बोटिंग का आनंद भी ले सकते हैं। इसके लिए सभी मुख्य घाटों पर व्यवस्थाएं की गई हैं। साथ ही यदि श्रद्धालु आदि गुरु शंकराचार्य जी की मूर्ति के दर्शन करना चाहते हैं तो उन्हें ओंकार परिक्रमा पथ की यात्रा करना होगी।

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