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तस्वीरें: राम सिंह पठानिया ने फूंका था अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का पहला बिगुल, इन सपूतों की भी रही भूमिका

Sat, 15 Aug 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, ऊना/शिमला।
अमर उजाला नेटवर्क, ऊना/शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 15 Aug 2026 05:00 AM IST
सार

भारत की आजादी की लड़ाई का इतिहास केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या पंजाब तक सीमित नहीं है। हिमालय की गोद में बसे हिमाचल प्रदेश ने भी स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। यहां के वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत और रियासती दमन के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका और देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेश उन महान सपूतों को याद कर रहा है, जिनके साहस और बलिदान ने राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा दी।

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Himachal freedom heroes; Wazir Ram Singh Pathania sounded the first bugle of rebellion against the British.
वजीर राम सिंह पठानिया(फाइल)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

वजीर राम सिंह पठानिया


भारत की आजादी की लड़ाई का इतिहास केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या पंजाब तक सीमित नहीं है। हिमालय की गोद में बसे हिमाचल प्रदेश ने भी स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। यहां के वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत और रियासती दमन के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका और देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। हिमाचल के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र वजीर राम सिंह पठानिया के बिना अधूरा है। नूरपुर रियासत के वीर सेनानी राम सिंह पठानिया को अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का अग्रदूत माना जाता है। वर्ष 1848-49 में उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया और नूरपुर किले पर कब्जा कर स्वतंत्र शासन की घोषणा तक कर दी। राम सिंह पठानिया ने स्थानीय राजाओं और जनता को संगठित कर अंग्रेजों को चुनौती दी। हालांकि अंग्रेजों ने इस विद्रोह को दबा दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उनका संघर्ष 1857 की क्रांति से पहले अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ उठी सबसे बड़ी आवाजों में गिना जाता है। इतिहासकार उन्हें उत्तर भारत में औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रारंभिक क्रांतिकारियों में शामिल करते हैं।

Himachal freedom heroes; Wazir Ram Singh Pathania sounded the first bugle of rebellion against the British.
बाबा कांशी राम। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

बाबा कांशी राम
 कांगड़ा के पहाड़ी गांधी यानी बाबा कांशी राम को पहाड़ी गांधी के नाम से जाना जाता है। जलियांवाला बाग हत्याकांड से व्यथित होकर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आजीवन संघर्ष का संकल्प लिया। उन्होंने प्रतिज्ञा की कि भारत के स्वतंत्र होने तक सफेद कपड़े नहीं पहनेंगे और जीवनभर काले वस्त्र धारण किए।  

Himachal freedom heroes; Wazir Ram Singh Pathania sounded the first bugle of rebellion against the British.
भाई हिरदा राम। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

भाई हिरदा राम
मंडी के भाई हिरदा राम गदर आंदोलन से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारियों में थे। उन्होंने अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। गिरफ्तारी और कठोर यातनाओं के बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।

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रानी खैरगढ़ी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

रानी खैरगढ़ी
मंडी रियासत की रानी खैरगढ़ी ने स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को संरक्षण दिया। उन्होंने अंग्रेज विरोधी गतिविधियों का खुलकर समर्थन किया और जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। महिलाओं की भागीदारी के प्रतीक के रूप में उनका नाम आज भी सम्मान से लिया जाता है।

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हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार। - फोटो : अमर उजाला

डॉ. वाईएस परमार
डॉ. यशवंत सिंह परमार ने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों को एकजुट कर आधुनिक हिमाचल प्रदेश के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्हें हिमाचल प्रदेश का शिल्पकार और प्रथम मुख्यमंत्री माना जाता है।

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