फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

फांसी की सजा पर युग के परिजनों ने बजाईं तालियां, रोने लगे तीनों हत्यारे

Thu, 06 Sep 2018 10:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 06 Sep 2018 10:22 AM IST
विज्ञापन
Shimla Yug Murder Case Death Penalty to three culprits Side Story

जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में युग हत्याकांड के तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाते ही पीड़ित परिजनों ने तालियां बजाना शुरू कर दीं। सबसे पहले चंद्र शर्मा, फिर तेजिंद्र पाल और अंत में विक्रांत बख्शी को सजा सुनाई गई। अंतिम दोषी को सजा सुनाने पर पीछे बैठे परिजनों ने ताली बजाना शुरू की तो उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया। अदालत में ही एक साथ बैठीं युग की मां पिंकी और दादी चंद्रलेखा की आंखों में आंसू आ गए। पिता भी युग को न्याय दिलवाने की इस जंग में फैसला आने पर भावुक हो गए। वहीं, सजा का एलान होते ही तीनों हत्यारों के चेहरे पीले पड़ गए। वे फूट-फूटकर रोने लगे। तीनों के चेहरों पर मौत का खौफ था। 

Shimla Yug Murder Case Death Penalty to three culprits Side Story

अदालत से बाहर लाते वक्त इनके चेहरों पर नकाब था। दोपहर एक बजे अदालत की प्रक्रिया शुरू हो गई, इससे पहले ही तीनों दोषियों को अदालत में लाया जा चुका था। जज दो बजे अदालत में पहुंचे और उन्होंने खड़े होकर बारी-बारी से पहले ही दोषी करार दिए जा चुके तीनों को फांसी की सजा सुनाई। सजा सुनाते ही अदालत का माहौल शांत पड़ गया।

Shimla Yug Murder Case Death Penalty to three culprits Side Story

अदालत में फैसला सुनने के लिए शायद ही इससे पूर्व इतनी भीड़ जमा हुई हो। इस चर्चित मामले में युग की निर्मम हत्या करने वाले तीनों को हर कोई देखने की कोशिश कर रहा था। सजा सुनाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने अदालत को खाली करवाया और कुछ देर उन्हें अंदर ही रोके रखा। परिसर में भीड़ कम होने के बाद उन्हें बाहर ले जाया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Shimla Yug Murder Case Death Penalty to three culprits Side Story

फैसला आने पर युग की मां पिंकी, पिता विनोद और दादी चंद्रलेखा की आंखों से आंसू छलक पड़े। लंबे इंतजार के बाद इनके कलेजे को ठंडक पहुंची। युग की मां पिंकी ने कहा कि आज मेरे मासूम बच्चे की आत्मा को शांति मिलेगी, जो चार सालों से भटक रही थी। उसके हत्यारों को उनके किए की सजा मिली है। दादी चंद्रलेखा फैसला आने के बाद कुछ कह ही नहीं पा रही थीं। पिता विनोद गुप्ता ने कहा कि आज युग को न्याय मिला है, पिछले चार सालों से लगातार उसे न्याय दिलवाने के लिए वह संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अदालत और न्यायिक व्यवस्था पर उनका भरोसा और बढ़ गया है। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।

विज्ञापन
Shimla Yug Murder Case Death Penalty to three culprits Side Story

खेलने गया युग कभी लौट कर नहीं आया- 14 जून 2014 को युग रोज की तरह शाम करीब चार बजे राम बाजार स्थित अपने घर से बाहर खेलने के लिए निकला। कुछ देर बाद तेज बारिश हुई लेकिन वह नहीं लौटा। शाम छह बजे परिजनों से उसकी तलाश शुरू की लेकिन उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा। युग के पिता विनोद गुप्ता पेशे से कारोबारी हैं। उन्होेंने थाना सदर में गुमशुदगी की रपट दर्ज करवाई। वह इस बात से बेखबर थे कि उनके पड़ोसी चंद्र शर्मा और तजिंद्र सिंह ने ही उनके लाडले का अपहरण किया है क्योंकि वह भी विनोद के साथ युग को ढूंढने का नाटक करते रहे। इनमें से चंद्र शर्मा हरदम उनके साथ रहता ताकि हर गतिविधि पर वह आसानी से नजर रख सके । युग के न मिलने पर सितंबर 2014 को यह मामला सीआईडी को सौंप दिया गया।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed