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Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में आने वाले अखाड़ों का क्या है रहस्य? जानें इसका इतिहास और महत्व

Thu, 23 Jan 2025 03:53 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Thu, 23 Jan 2025 03:53 PM IST
सार

महाकुंभ में हिस्सा लेने वाले साधु-संतों के समूह को "अखाड़ा" कहा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कुंभ के संदर्भ में साधु-संतों के समूहों को अखाड़ा क्यों कहा जाता है? इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसका उद्देश्य क्या है?
 

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Maha Kumbh 2025 what is akhada know history importance and 13 akhara list in hindi
क्या है अखाड़ा, कैसे हुई इसकी शुरुआत? - फोटो : Amar Ujala
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Mahakumbh 2025: महाकुंभ 2025 का आयोजन 13 जनवरी से प्रारंभ हो चुका है। इस आयोजन में देश-विदेश से साधु-संत और श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान के लिए एकत्र होते है। महाकुंभ में हिस्सा लेने वाले साधु-संतों के समूह को "अखाड़ा" कहा जाता है। हालांकि, सामान्यतः "अखाड़ा" शब्द उस स्थान के लिए प्रयोग किया जाता है, जहां पहलवान कुश्ती का अभ्यास करते हैं। लेकिन कुंभ के संदर्भ में साधु-संतों के इन समूहों को अखाड़ा क्यों कहा जाता है, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। अगर आपके मन में भी ये सवाल आता है, तो आइए आज हम आपको इसका जवाब बताते हैं।

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Maha Kumbh 2025 what is akhada know history importance and 13 akhara list in hindi
क्या है अखाड़ा, कैसे हुई इसकी शुरुआत? - फोटो : adobe stock
क्या है अखाड़ा?
अखाड़ों को हिंदू धर्म और संस्कृति के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संरक्षक के रूप में देखा जाता है। इस परंपरा की शुरुआत का श्रेय आदि शंकराचार्य को जाता है। उन्होंने साधु-संतों के संगठनों को 'अखाड़ा' नाम दिया। शैव, वैष्णव और उदासीन पंथों के साधु-संतों के कुल 13 अखाड़े मुख्य रूप से मान्यता प्राप्त हैं। इनमें शैव संप्रदाय के सात, बैरागी वैष्णव संप्रदाय के तीन और उदासीन संप्रदाय के तीन अखाड़े शामिल हैं।

इन अखाड़ों का नाम श्री पंच दशनाम जूना (भैरव) अखाड़ा, श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, श्री शम्भू पंच अग्नि अखाड़ा, श्री शम्भू पंचायती अटल अखाड़ा, श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा, पंचायती अखाडा श्री निरंजनी, श्री पंच निर्माेही अनी अखाडा, श्री पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा, श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा, तपोनिधि श्री आनंद अखाड़ा, श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल, श्री पंचायती अखाडा बडा उदासीन है। इन अखाड़ों का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और इनका अस्तित्व सदियों से चला आ रहा है।
 
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क्या है अखाड़ा, कैसे हुई इसकी शुरुआत? - फोटो : adobe stock
अखाड़ों का उद्देश्य
ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में हिंदू धर्म की रक्षा के उद्देश्य से आदि शंकराचार्य ने शस्त्र और शास्त्र विद्या में निपुण साधुओं के संगठनों की स्थापना की। यूं तो अखाड़ा कुश्ती से जुड़ा हुआ शब्द है, लेकिन जहां भी दांव-पेंच की गुंजाइश होती है, वहां भी इसका प्रयोग होता है। ऐसे में इन संगठनों को भी अखाड़ा नाम दिया गया। इन अखाड़ों का उद्देश्य न केवल धार्मिक परंपराओं को संरक्षित करना था, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर धर्म और पवित्र स्थलों की रक्षा करना भी था। नागा साधु जैसे अखाड़े इसका जीवंत उदाहरण हैं, जो युद्ध और शस्त्र विद्या से जुड़ी परंपराओं को जीवित रखते हैं।

 
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क्या है अखाड़ा, कैसे हुई इसकी शुरुआत? - फोटो : adobe stock
सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक
महाकुंभ के दौरान अखाड़ों की उपस्थिति हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ये अखाड़े पवित्र ग्रंथों, धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं को संरक्षित कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। महाकुंभ के अवसर पर साधु-संतों द्वारा किया जाने वाला शाही स्नान भी विशेष महत्व रखता है। यह स्नान कुंभ के मुख्य आकर्षणों में से एक होता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
 

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क्या है अखाड़ा, कैसे हुई इसकी शुरुआत? - फोटो : adobe stock
महाकुंभ 2025 के दौरान कई शुभ तिथियां आएंगी, जिन्हें पवित्र स्नान के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है। इन तिथियों पर लाखों श्रद्धालु और साधु-संत गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे। इस प्रकार, महाकुंभ न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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