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Bahula Chauth: आज है बहुला चौथ,जानिए पूजाविधि, महत्व एवं शुभ मुहूर्त

अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 15 Aug 2022 12:21 AM IST
जानें बहुला चौथ की तिथि और पूजा विधि
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Bahula Chauth: भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला चतुर्थी या बहुला चौथ के नाम से जाना जाता है।ये तिथि गणेशजी के पूजन के साथ-साथ श्री कृष्ण और गायों के पूजन के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण और गणेशजी की विधि विधान से पूजा करने पर निसंतान को संतान की प्राप्ति होती है। इस दिन संकष्टी चतुर्थी के साथ-साथ बहुला चतुर्थी का व्रत भी रखा जाता है। इसीलिए इसे कृष्ण चतुर्थी या बहुला चौथ के नाम से भी जानते हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार इस साल बहुला चतुर्थी व्रत 15 अगस्त के दिन रखा जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन व्रत रखने और श्री कृष्ण की विधिपूर्वक पूजा आदि करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि बहुला चौथ के दिन श्री कृष्ण के साथ-साथ गणेश जी की पूजा से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं बहुल चौथ की तिथि, मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और कथा। 
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शुभ मुहूर्त
बहुला चतुर्थी तिथि का आरंभ: 14 अगस्त, रविवार, रात्रि 10: 35 मिनट से 
बहुला चतुर्थी तिथि समाप्त:  15 अगस्त, सोमवार, रात्रि 09: 01 मिनट पर 
उदयातिथि के आधार पर बहुला चतुर्थी व्रत 15 अगस्त को रखा जाएगा।
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बहुला चतुर्थी का महत्व
मान्यता है कि बहुला चतुर्थी व्रत संतान को मान-सम्मान और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला होता है। नि:संतान दम्पति को संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस व्रत को रखने से संतान को कष्टों से मुक्ति मिलती है और धन-धान्य में बढ़ोत्तरी होती है।
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बहुला पूजा विधि
  • इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान के बाद शुभ रंग के स्वच्छ कपड़े पहनें। 
  • महिलाएं पूरा दिन निराहार व्रत रखकर शाम के समय गाय और बछड़े की पूजा करती हैं। 
  • शाम को पूजा में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं जिन्हें भगवान गणेश और श्री कृष्ण को अर्पित किया जाता है। 
  • इस भोग को बाद में गाय और बछड़े को खिला दिया जाता है।
  • पूजा के बाद दाएं हाथ में चावल के दाने लेकर बहुला चौथ की कथा सुननी चाहिए,तत्पश्चात गाय और बछड़े की प्रदिक्षणा कर सुख-शांति की प्रार्थना करें।   
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व्रत कथा
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार कृष्णजी की लीलाओं को देखने के लिए कामधेनु गाय ने बहुला के रूप में नन्द की गोशाला में प्रवेश किया। कृष्ण जी को यह गाय बहुत पसंद आई, वे हमेशा उसके साथ समय बिताते थे। बहुला का एक बछड़ा भी था, जब बहुला चरने के लिए जाती तब वो उसको बहुत याद करता था।एक बार जब बहुला चरने के लिए जंगल गई, चरते चरते वो बहुत आगे निकल गई, और एक शेर के पास जा पहुंची। शेर उसे देख खुश हो गया और अपना शिकार बनाने की सोचने लगा।बहुला डर गई, और उसे अपने बछड़े का ही ख्याल आ रहा था ।जैसे ही शेर उसकी ओर आगे बढ़ा, बहुला ने उससे बोला कि वो उसे अभी न खाए, घर में उसका बछड़ा भूखा है, उसे दूध पिलाकर वो वापस आ जाएगी, तब वो उसे अपना शिकार बना ले।शेर ने कहा कि मैं कैसे तुम्हारी इस बात पर विश्वास कर लूँ? तब बहुला ने उसे विश्वास दिलाया और कसम खाई कि वो जरुर आएगी।बहुला वापस गौशाला जाकर बछड़े को दूध पिलाती है, और बहुत प्यार कर, उसे वहां छोड़, वापस जंगल में शेर के पास आ जाती है। शेर उसे देख हैरान हो जाता है। दरअसल ये शेर के रूप में कृष्ण होते है, जो बहुला की परीक्षा लेने आते है। कृष्ण अपने वास्तविक रूप में आ जाते है, और बहुला को कहते है कि मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हुआ, तुम परीक्षा में सफल रही। समस्त मानव जाति द्वारा सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन तुम्हारी पूजा अर्चना की जाएगी और समस्त जाति तुमको गौमाता कहकर संबोधित करेगी व जो भी ये व्रत रखेगा उसे सुख, समृद्धि, धन, ऐश्वर्या व संतान की प्राप्ति होगी। 
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