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Gayatri Mantra : भूलकर भी न करें इस तरह गायत्री मंत्र का जप, जानें 7 खास बातें

Fri, 26 Jul 2019 08:48 AM IST
कशिश मिश्रा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: कशिश मिश्रा Updated Fri, 26 Jul 2019 08:48 AM IST
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gayatri jayanti 2019 know benefits of chanting gayatri mantra

शास्त्रों में गायत्री मंत्र का बहुत महत्व होता है। गायत्री जयंती ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें दिन मनाई जाती है। गायत्री मंत्र को वेदों में बड़ा ही चमत्कारी और फायदेमंद बताया गया है। इस मंत्र का जप आमतौर पर उपनयन संस्कार के बाद किया जाता है। आखिर क्यों हर किसी को गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए। जानें इस मंत्र के बारे में 7 ऐसी बातें...

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वेदों की कुल संख्या चार है। इन चारों वेदों में गायत्री मंत्र का उल्लेख किया गया है। इस मंत्र के ऋषि विश्वामित्र हैं और देवता सविता हैं। माना जाता है कि इस मंत्र में इतनी शक्ति है कि नियमित तीन बार इसका जप करने वाले व्यक्ति के आस-पास नकारात्मक शक्तियां यानी भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाएं नहीं फटकती हैं।

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गायत्री मंत्र के जप से कई प्रकार का लाभ मिलता है। यह मंत्र कहता है 'उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।' यानी इस मंत्र के जप से बौद्धिक क्षमता और मेधा शक्ति यानी स्मरण की क्षमता बढ़ती है। इससे व्यक्ति का तेज बढ़ता है साथ ही दुःखों से छूटने का रास्ता मिलता है।

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गायत्री मंत्र का जप सूर्योदय से दो घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त से एक घंटे बाद तक किया जा सकता है। मौन मानसिक जप कभी भी कर सकते हैं लेकिन रात्रि में इस मंत्र का जप नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि रात में गायत्री मंत्र का जप लाभकारी नहीं होता है।

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गायत्री मंत्र में चौबीस अक्षर हैं। यह चौबीस अक्षर चौबीस शक्तियों-सिद्धियों के प्रतीक हैं। यही कारण है कि ऋषियों ने गायत्री मंत्र को भौतिक जगत में सभी प्रकार की मनोकामना को पूर्ण करने वाला बताया है।

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