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FIFA World Cup: कौन हैं अर्जेंटीना के कोच लियोनल स्केलोनी? मेसी को भेजे उनके एक मैसेज ने बदली टीम की तकदीर
Sun, 18 Dec 2022 01:26 PM IST
रोहित राज
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रोहित राज
Updated Sun, 18 Dec 2022 01:26 PM IST
सार
लियोनल स्केलोनी 40 साल के थे और सीनियर टीम को कोचिंग देने का उनके पास कोई अनुभव नहीं था। अर्जेंटीना ने किसी दिग्गज कोच को बुलाने की जगह एक लो-प्रोफाइल कोच मुख्य टीम की जिम्मेदारी सौंपी।
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अर्जेंटीना के कोच लियोनल स्केलोनी और पूर्व दिग्गज डिएगो माराडोना
- फोटो : अमर उजाला
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अर्जेंटीना की टीम विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुकी है। उसका मुकाबला रविवार (18 दिसंबर) को फ्रांस से है। अर्जेंटीना की टीम 36 साल बाद विश्व कप जीतने के लिए उतरेगी। इस टूर्नामेंट में उसके कप्तान लियोनल मेसी की जमकर तारीफ हो रही है। दुनिया के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में शुमार किए जाने वाले मेसी ने अब तक छह मैचों में चार गोल और तीन असिस्ट किए हैं। अर्जेंटीना की सफलता में जितना योगदान मेसी का है, उतना ही कोच/मैनेजर लियोनल स्केलोनी का।
लियोनल स्केलोनी और लियोनल मेसी
- फोटो : सोशल मीडिया
अंडर-17 टीम के मुख्य कोच थे स्केलोनी
अर्जेंटीना ने कोच जॉर्ज सैंपोली को विश्व कप के बाद हटा दिया। 2017 में कोच बनाए गए सैंपोली के पास पांच साल का करारा था, लेकिन उन्हें एक साल बाद ही बर्खास्त कर दिया गया। अर्जेंटीना ने अंडर-17 के कोच लियोनल स्केलोनी को यह जिम्मेदारी देने का फैसला किया। वह 40 साल के थे और सीनियर टीम को कोचिंग देने का उनके पास कोई अनुभव नहीं था। अर्जेंटीना ने किसी दिग्गज कोच को बुलाने की जगह एक लो-प्रोफाइल कोच मुख्य टीम की जिम्मेदारी सौंपी।
अर्जेंटीना ने कोच जॉर्ज सैंपोली को विश्व कप के बाद हटा दिया। 2017 में कोच बनाए गए सैंपोली के पास पांच साल का करारा था, लेकिन उन्हें एक साल बाद ही बर्खास्त कर दिया गया। अर्जेंटीना ने अंडर-17 के कोच लियोनल स्केलोनी को यह जिम्मेदारी देने का फैसला किया। वह 40 साल के थे और सीनियर टीम को कोचिंग देने का उनके पास कोई अनुभव नहीं था। अर्जेंटीना ने किसी दिग्गज कोच को बुलाने की जगह एक लो-प्रोफाइल कोच मुख्य टीम की जिम्मेदारी सौंपी।
लियोनल स्केलोनी को उछालते अर्जेंटीना के खिलाड़ी
- फोटो : सोशल मीडिया
मेसी के साथ खेल चुके हैं स्केलोनी
2005 में जब लियोनल मेसी ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था तब स्केलोनी अर्जेंटीना की टीम में थे। 2006 में जब मेसी ने अपना पहला विश्व कप मैच खेला, तब भी स्केलोनी उस टीम में थे। स्केलोनी ने 2015 में पेशेवर फुटबॉल से संन्यास लिया था। उसके बाद वह जॉर्ज सैंपोली के साथ सेविला की टीम में जुड़ गए थे। वह असिस्टेंट कोच बनाए गए थे। सैंपोली सेविला के मुख्य कोच थे। इसके बाद जब सैंपोली 2017 में अर्जेंटीना के कोच बने तब भी स्केलोनी उनके साथ थे।
2005 में जब लियोनल मेसी ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था तब स्केलोनी अर्जेंटीना की टीम में थे। 2006 में जब मेसी ने अपना पहला विश्व कप मैच खेला, तब भी स्केलोनी उस टीम में थे। स्केलोनी ने 2015 में पेशेवर फुटबॉल से संन्यास लिया था। उसके बाद वह जॉर्ज सैंपोली के साथ सेविला की टीम में जुड़ गए थे। वह असिस्टेंट कोच बनाए गए थे। सैंपोली सेविला के मुख्य कोच थे। इसके बाद जब सैंपोली 2017 में अर्जेंटीना के कोच बने तब भी स्केलोनी उनके साथ थे।
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लियोनल स्केलोनी और लियोनल मेसी
- फोटो : सोशल मीडिया
स्केलोनी कैसे बने अर्जेंटीना के कोच?
सैंपोली को बर्खास्त किए जाने के बाद अर्जेंटीना फुटबॉल संघ ने अपने पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों डिएगो सिमिओने, मार्सेलो गालाराडो और मॉरिसियो पोचेटिनो को कोच बनाने का प्रयास किया। तीनों ने सैंपोली का हश्र देखने के बाद इस पद को स्वीकार करने से मना कर दिया। अर्जेंटीना फुटबॉल संघ ने फिर कड़ा फैसला लिया और किसी विदेशी कोच को लाने की जगह अंडर-17 टीम के मुख्य कोच लियोनल स्केलोनी को यह जिम्मेदारी सौंप दी।
इस फैसले का विरोध अर्जेंटीना के पूर्व दिग्गजों ने किया। यहां तक कि दिवंगत डिएगो माराडोना ने 2018 में कहा था, ''वह ट्रैफिक को तो निर्देश दे नहीं सकता, राष्ट्रीय टीम को कैसे संभालेगा? क्या हम सभी पागल हो गए हैं।''
सैंपोली को बर्खास्त किए जाने के बाद अर्जेंटीना फुटबॉल संघ ने अपने पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों डिएगो सिमिओने, मार्सेलो गालाराडो और मॉरिसियो पोचेटिनो को कोच बनाने का प्रयास किया। तीनों ने सैंपोली का हश्र देखने के बाद इस पद को स्वीकार करने से मना कर दिया। अर्जेंटीना फुटबॉल संघ ने फिर कड़ा फैसला लिया और किसी विदेशी कोच को लाने की जगह अंडर-17 टीम के मुख्य कोच लियोनल स्केलोनी को यह जिम्मेदारी सौंप दी।
इस फैसले का विरोध अर्जेंटीना के पूर्व दिग्गजों ने किया। यहां तक कि दिवंगत डिएगो माराडोना ने 2018 में कहा था, ''वह ट्रैफिक को तो निर्देश दे नहीं सकता, राष्ट्रीय टीम को कैसे संभालेगा? क्या हम सभी पागल हो गए हैं।''
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पाब्लो आइमर, लियोनल स्केलोनी और वाल्टर सैमुअल
- फोटो : सोशल मीडिया
स्केलोनी ने मेसी को क्या मैसेज भेजा?
आलोचनाओं के बीच स्केलोनी ने अपने कोचिंग स्टाफ की एक टीम बनाई। उन्हें अर्जेंटीना के पूर्व स्टार खिलाड़ियों पाब्लो आइमर, वाल्टर सैमुअल और रोबर्टो आयला को अपने साथ जोड़ा । इसके बाद स्केलोनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लियोनल मेसी को मनाने की थी। वह अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल नहीं खेलना चाहते थे। स्केलोनी ने मेसी को एक व्हाट्सएप्प मैसेज भेजा। उन्होंने लिखा, "हैलो लियो, मैं स्केलोनी हूं। पाब्लो आइमर के साथ हम आपसे बात करना चाहते हैं।" मेसी बचपन में आइमर को अपना आदर्श मानते थे। वह सीनियर खिलाड़ियों की इज्जत भी करते थे। इस कारण वह इस मैसेज के बाद स्केलोनी और आइमर से मिलने गए। फिर तीनों के बीच चर्चा हुई और मेसी खेलने के लिए तैयार हो गए।
स्केलोनी ने बाद में ईएसपीएन से बातचीत में बताया था कि मेसी से उनकी क्या बात हुई थी। उन्होंने कहा था, ''मेसी ने हमें बताया कि वह वापस आने के लिए तैयार हैं। अगर हम उसे बुलाते हैं तो वह खेलने के लिए तैयार है। मेसी न केवल अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का विस्तार करने के लिए आश्वस्त थे, बल्कि वह उन टूर्नामेंट को जीतना चाहते थे जो पहले नहीं जीत पाए थे।''
आलोचनाओं के बीच स्केलोनी ने अपने कोचिंग स्टाफ की एक टीम बनाई। उन्हें अर्जेंटीना के पूर्व स्टार खिलाड़ियों पाब्लो आइमर, वाल्टर सैमुअल और रोबर्टो आयला को अपने साथ जोड़ा । इसके बाद स्केलोनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लियोनल मेसी को मनाने की थी। वह अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल नहीं खेलना चाहते थे। स्केलोनी ने मेसी को एक व्हाट्सएप्प मैसेज भेजा। उन्होंने लिखा, "हैलो लियो, मैं स्केलोनी हूं। पाब्लो आइमर के साथ हम आपसे बात करना चाहते हैं।" मेसी बचपन में आइमर को अपना आदर्श मानते थे। वह सीनियर खिलाड़ियों की इज्जत भी करते थे। इस कारण वह इस मैसेज के बाद स्केलोनी और आइमर से मिलने गए। फिर तीनों के बीच चर्चा हुई और मेसी खेलने के लिए तैयार हो गए।
स्केलोनी ने बाद में ईएसपीएन से बातचीत में बताया था कि मेसी से उनकी क्या बात हुई थी। उन्होंने कहा था, ''मेसी ने हमें बताया कि वह वापस आने के लिए तैयार हैं। अगर हम उसे बुलाते हैं तो वह खेलने के लिए तैयार है। मेसी न केवल अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का विस्तार करने के लिए आश्वस्त थे, बल्कि वह उन टूर्नामेंट को जीतना चाहते थे जो पहले नहीं जीत पाए थे।''