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Smartphones: स्मार्टफोन की कीमतों में 40% तक का तगड़ा उछाल, वीवो और सैमसंग समेत इन ब्रांड्स ने दिया झटका
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Wed, 08 Apr 2026 07:01 AM IST
सार
Smartphone Price Hike: भारत में स्मार्टफोन खरीदना अब पहले से महंगा हो गया है। कई बड़ी कंपनियों ने अपने डिवाइस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है। चिप की कमी, वैश्विक हालात और AI की बढ़ती मांग ने बाजार को प्रभावित किया है।
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स्मार्टफोन की कीमत बढ़ी
- फोटो : एआई जनरेटेड
भारतीय मोबाइल बाजार में इन दिनों हलचल मची हुई है, लेकिन यह खबर ग्राहकों के लिए अच्छी नहीं है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड्स जैसे वीवो, सैमसंग, ओप्पो, रियलमी, शाओमी और नथिंग ने अपने हैंडसेट्स की कीमतों में भारी इजाफा किया है। कुछ मॉडल्स की कीमतों में तो 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे एंट्री-लेवल और बजट सेगमेंट के ग्राहकों के लिए नया फोन खरीदना अब पहले जैसा आसान नहीं रहा। रिपोर्ट बताती है कि 2025 के अंत से अब तक लगभग आठ बड़े ब्रांड्स ने अपने लोकप्रिय मॉडल्स के दाम औसतन 1,500 रुपये तक बढ़ा दिए हैं।
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स्मार्टफोन कंपेरिजन
- फोटो : iQOO/OnePlus/Vivo
क्यों लग रही है कीमतों में 'आग'?
स्मार्टफोन के महंगे होने के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर 'मेमोरी चिप' (DRAM और NAND) की भारी किल्लत है। दरअसल, सेमीकंडक्टर बनाने वाली बड़ी कंपनियां जैसे सैमसंग, माइक्रोन और एसके हाइनिक्स अब अपना पूरा ध्यान 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के लिए इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स बनाने पर लगा रही हैं। एनवीडिया (Nvidia) जैसे एआई डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण साधारण फोन में लगने वाली चिप्स का उत्पादन कम हो गया है, जिससे इनकी लागत 50-60% तक बढ़ गई है। इसे तकनीकी विशेषज्ञ 'एआई टैक्स' का नाम दे रहे हैं, जिसका बोझ अंततः आम ग्राहकों पर डाल दिया गया है।
स्मार्टफोन के महंगे होने के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर 'मेमोरी चिप' (DRAM और NAND) की भारी किल्लत है। दरअसल, सेमीकंडक्टर बनाने वाली बड़ी कंपनियां जैसे सैमसंग, माइक्रोन और एसके हाइनिक्स अब अपना पूरा ध्यान 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के लिए इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स बनाने पर लगा रही हैं। एनवीडिया (Nvidia) जैसे एआई डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण साधारण फोन में लगने वाली चिप्स का उत्पादन कम हो गया है, जिससे इनकी लागत 50-60% तक बढ़ गई है। इसे तकनीकी विशेषज्ञ 'एआई टैक्स' का नाम दे रहे हैं, जिसका बोझ अंततः आम ग्राहकों पर डाल दिया गया है।
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वैश्विक तनाव और गिरता रुपया भी जिम्मेदार
- फोटो : AI
वैश्विक तनाव और गिरता रुपया भी जिम्मेदार
सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि दुनिया के मौजूदा हालात भी आपके फोन को महंगा बना रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे शिपिंग और लॉजिस्टिक की लागत बढ़ गई है। साइबर मीडिया रिसर्च (CMR) के विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितता के कारण ग्राहक अब पुराने फोन को ही रिपेयर कराकर चलाने को मजबूर हैं। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये ने भी आग में घी डालने का काम किया है, जिससे कंपनियों के लिए पार्ट्स आयात करना और भी खर्चीला हो गया है।
सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि दुनिया के मौजूदा हालात भी आपके फोन को महंगा बना रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे शिपिंग और लॉजिस्टिक की लागत बढ़ गई है। साइबर मीडिया रिसर्च (CMR) के विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितता के कारण ग्राहक अब पुराने फोन को ही रिपेयर कराकर चलाने को मजबूर हैं। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये ने भी आग में घी डालने का काम किया है, जिससे कंपनियों के लिए पार्ट्स आयात करना और भी खर्चीला हो गया है।
स्मार्टफोन
- फोटो : AI
रिपेयरिंग पर जोर दे रहे ग्राहक
महंगाई का असर अब साफ दिखने लगा है। साल 2026 के शुरुआती हफ्तों में स्मार्टफोन की बिक्री में करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई है। मिड-रेंज और बजट फोन खरीदने वाले लोग अब अपनी जरूरतों में कटौती कर रहे हैं। लोग रसोई गैस और राशन जैसे जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं और नया फोन खरीदने के बजाय पुराने फोन की स्क्रीन या बैटरी बदलवाकर उसका जीवन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल से जून (Q2) की तिमाही मोबाइल इंडस्ट्री के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाली है और फिलहाल कीमतों में कमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
महंगाई का असर अब साफ दिखने लगा है। साल 2026 के शुरुआती हफ्तों में स्मार्टफोन की बिक्री में करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई है। मिड-रेंज और बजट फोन खरीदने वाले लोग अब अपनी जरूरतों में कटौती कर रहे हैं। लोग रसोई गैस और राशन जैसे जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं और नया फोन खरीदने के बजाय पुराने फोन की स्क्रीन या बैटरी बदलवाकर उसका जीवन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल से जून (Q2) की तिमाही मोबाइल इंडस्ट्री के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाली है और फिलहाल कीमतों में कमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
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प्रीमियम सेगमेंट में मुकाबला बरकरार
- फोटो : Samsung
प्रीमियम सेगमेंट में मुकाबला बरकरार
दिलचस्प बात यह है कि इस महंगाई के बीच एपल (Apple) और सैमसंग के प्रीमियम मॉडल्स खुद को बेहतर स्थिति में रख रहे हैं। एपल का लेटेस्ट आईफोन 17 अपनी मजबूत सप्लाई चेन की वजह से इस बढ़ोतरी से कम प्रभावित हुआ है, जिससे अमीर ग्राहकों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प बना हुआ है। वहीं, सैमसंग की गैलेक्सी S26 सीरीज को भी काफी सोच-समझकर पेश किया गया है ताकि चीनी ब्रांड्स के महंगे होते हैंडसेट्स के मुकाबले ग्राहकों को अपनी ओर खींचा जा सके। हालांकि, बजट सेगमेंट में लड़ाई मुश्किल है और आने वाले समय में 'सेकेंड हैंड' या 'यूज्ड फोन' के बाजार में बड़ी बढ़त देखने को मिल सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि इस महंगाई के बीच एपल (Apple) और सैमसंग के प्रीमियम मॉडल्स खुद को बेहतर स्थिति में रख रहे हैं। एपल का लेटेस्ट आईफोन 17 अपनी मजबूत सप्लाई चेन की वजह से इस बढ़ोतरी से कम प्रभावित हुआ है, जिससे अमीर ग्राहकों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प बना हुआ है। वहीं, सैमसंग की गैलेक्सी S26 सीरीज को भी काफी सोच-समझकर पेश किया गया है ताकि चीनी ब्रांड्स के महंगे होते हैंडसेट्स के मुकाबले ग्राहकों को अपनी ओर खींचा जा सके। हालांकि, बजट सेगमेंट में लड़ाई मुश्किल है और आने वाले समय में 'सेकेंड हैंड' या 'यूज्ड फोन' के बाजार में बड़ी बढ़त देखने को मिल सकती है।