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UPI Fraud: यूपीआई से इस साल 800 करोड़ के फ्रॉड! सरकार ने दिए चौंकाने वाले आंकड़े, कम रिकवरी दर ने बढ़ाई चिंता
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 17 Dec 2025 07:07 PM IST
सार
UPI Fraud Report: यूपीआई से होने वाले फ्रॉड के आंकड़े डराने वाले हैं। संसद में सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 यूपीआई उपयोगकर्ताओं के 1,087 करोड़ रुपये डूब गए। वहीं, मौजूदा वित्त वर्ष में इसमें कमी आई है। जानिए क्या कहते हैं UPI से होने वाले फ्रॉड के आंकड़े।
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यूपीआई फ्रॉड
- फोटो : AI जनरेटेड
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भारत में डिजिटल पेमेंट की दुनिया में एक बड़ी खबर सामने आई है। UPI ने एक ओर जहां डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बना दिया है, वहीं दूसरी इससे जमकर फ्रॉड भी हो रहे हैं। संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों से यूपीआई के जरिए होने वाले फ्रॉड के आंकड़े सामने आए हैं। सरकार द्वारा साझा किए गए डेटा से स्पष्ट है कि वित्त वर्ष 2024 में ऑनलाइन ठगी अपने चरम पर थी, लेकिन अब इन मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि, ठगी के बाद पैसा वापस मिलने की दर ने एक नई चिंता को जन्म दे दिया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि सरकार ने सदन में क्या जानकारी दी है।
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यूपीआई पेमेंट
- फोटो : अमर उजाला
वित्त वर्ष 2024 रहा सबसे खौफनाक साल
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा संसद में साझा की गई जानकारी के मुताबिक, मार्च 2024 को खत्म हुआ वित्त वर्ष (FY24) यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे भारी रहा। इस एक साल के भीतर देश में करीब 13.42 लाख ऑनलाइन ठगी के मामले दर्ज किए गए, जिनमें आम जनता के लगभग 1,087 करोड़ रुपये डूब गए। यूपीआई सिस्टम के मेनस्ट्रीम बनने के बाद से यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था। अगर इसकी तुलना पिछले वर्षों से करें, तो यह एक बहुत बड़ी उछाल थी, जो यह दर्शाती है कि उस समय स्कैमर्स कितने ज्यादा सक्रिय थे और सिस्टम में सुरक्षा की दरकार थी।
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UPI
- फोटो : Adobe Stock
अब सुधर रहे हैं हालात, फ्रॉड में आई गिरावट
राहत की बात यह है कि उस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब ठगी के मामलों में गिरावट देखने को मिल रही है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में ये मामले घटकर 12.64 लाख रह गए और ठगी की रकम भी कम होकर 981 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, मौजूदा वित्त वर्ष (FY26) में नवंबर तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्राफ और नीचे आया है। अब तक करीब 10.64 लाख मामले सामने आए हैं, जिनमें फ्रॉड की कुल रकम 805 करोड़ रुपये रही। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार और एजेंसियों की सख्ती अब काम कर रही है और फ्रॉड की जो आंधी चल रही थी, उसकी रफ्तार अब थमने लगी है।
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UPI फ्रॉड
- फोटो : FREEPIK
पैसा वापस मिलने की उम्मीद बेहद कम
भले ही फ्रॉड की संख्या में कमी आई हो, लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि अगर आपके साथ ठगी हो गई, तो पैसा वापस मिलना लगभग नामुमकिन है। सरकार ने संसद को बताया कि अप्रैल-सितंबर 2025 के दौरान 92% शिकायतों पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई तो की गई, लेकिन रिकवरी यानी पैसा वापस मिलने की दर सिर्फ 6% रही। यह आंकड़ा यह साबित करने के लिए काफी है कि फ्रॉड होने के बाद कानूनी मदद मिलने के बावजूद, एक बार खाते से निकला पैसा वापस पाना लोहे के चने चबाने जैसा है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
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यूपीआई स्कैम
- फोटो : FREEPIK
सरकार और NPCI ने कसी नकेल
लगातार बढ़ रहे खतरों से निपटने के लिए आरबीआई और एनपीसीआई ने अब कमर कस ली है। आरबीआई ने एक ऐसे डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव रखा है जो बैंकों और फिनटेक कंपनियों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयर करेगा। वहीं, यूपीआई ऑपरेट करने वाली संस्था एनपीसीआई ने भी नियमों को काफी सख्त कर दिया है। अब नए डिवाइस में लॉग-इन करने के नियम, ट्रांजैक्शन की लिमिट और कूलडाउन पीरियड जैसे फीचर्स लागू किए गए हैं। इसके अलावा, एआई (AI) और मशीन लर्निंग की मदद से संदिग्ध लेन-देन को तुरंत पहचाना जा रहा है ताकि फ्रॉड होने से पहले ही उसे ब्लॉक किया जा सके।
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