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Car AC: कार का AC कितने टन का होता है? जानिए कैसे काम करता है आपकी गाड़ी का कूलिंग सिस्टम

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Wed, 27 May 2026 01:08 PM IST
सार

Car AC Tonnage: कार तो चलाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं उसका AC कितने टन का है? जानिए हैचबैक, सेडान और बड़ी SUV कारों में कंपनियां कितने टन का AC लगाती हैं और घर के एसी से ये कितनी अलग हैं।

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कार का AC करता है तेज कूलिंग - फोटो : एआई जनरेटेड
जब हम अपने घर के लिए AC खरीदते हैं, तो कमरे के साइज के हिसाब से 1 टन, 1.5 टन या 2 टन का चुनाव करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस कार में आप सफर कर रहे हैं, उसका AC कितने टन का होता है? कार कंपनियों के ब्रोशर में इंजन की पावर तो लिखी होती है, लेकिन AC की क्षमता अक्सर छुपी रहती है। आइए, समझते हैं कि आपकी गाड़ी को चिल्ड रखने वाला यह सिस्टम असल में कितना पावरफुल होता है।
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कार की एसी - फोटो : Adobe Stock
क्या कार के AC को भी “टन” में मापा जाता है?
घर और ऑफिस में लगे एयर कंडीशनर की क्षमता अक्सर 1 टन, 1.5 टन या 2 टन में बताई जाती है। लेकिन कारों के AC के साथ ऐसा कम सुनने को मिलता है। इसकी वजह यह है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में AC की क्षमता को सीधे "टन" की बजाय BTU यानी ब्रिटिश थर्मल यूनिट या किलोवॉट में मापा जाता है। एक टन लगभग 12,000 BTU के बराबर होता है।

आसान भाषा में समझें तो ज्यादातर छोटी हैचबैक और सेडान कारों का AC लगभग 1 से 1.5 टन के घरेलू AC के बराबर कूलिंग देता है। वहीं, बड़ी SUV और लग्जरी गाड़ियों में यह क्षमता 2 टन या उससे ज्यादा के बराबर हो सकती है।
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छोटी कारों में कम क्षमता का AC होता है - फोटो : Freepik
कार के सेगमेंट के हिसाब से AC की क्षमता
गाड़ी के केबिन का साइज और उसमें बैठने वाले लोगों की क्षमता के आधार पर AC का साइज तय होता है:
  • छोटी कारें (हैचबैक और सेडान): ऑल्टो, स्विफ्ट, आई20 या डिजायर जैसी कारों में आमतौर पर 1 से 1.2 टन (लगभग 10,000 से 14,000 BTU/घंटा) क्षमता का AC होता है। इनमें एक सिंगल कूलिंग सिस्टम (डैशबोर्ड के पास) काम करता है।
  • कॉम्पैक्ट SUV (नेक्सॉन, क्रेटा, ब्रेजा): इन गाड़ियों का केबिन चौड़ा और ऊंचा होता है, इसलिए इनमें 1.2 से 1.4 टन (लगभग 14,000 से 17,000 BTU/घंटा) क्षमता वाले AC का इस्तेमाल किया जाता है।
  • बड़ी SUV और लग्जरी कारें (फॉर्च्यूनर, इनोवा, सफारी): इन बड़ी 7-सीटर गाड़ियों में पीछे की सीटों के लिए भी अलग से वेंट्स और 'डुअल कूलिंग पॉइंट' होते हैं। इनमें 1.5 से लेकर 2 टन (लगभग 18,000 से 24,000+ BTU/घंटा) तक का हैवी-ड्यूटी AC लगा होता है।
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घर के AC से होता है अलग - फोटो : Freepik
कार का AC घर के AC से अलग क्यों होता है?
  • घर का AC लगातार एक कमरे को ठंडा करता है, जबकि कार का AC चलते वाहन में काम करता है। कार धूप में खड़ी हो, ट्रैफिक में फंसी हो या हाईवे पर दौड़ रही हो, हर स्थिति में AC को अलग तरह से काम करना पड़ता है।
  • कार के AC सिस्टम में मुख्य रूप से कंप्रेसर, कंडेंसर, इवैपोरेटर और रेफ्रिजरेंट गैस का इस्तेमाल होता है। यह सिस्टम इंजन की ताकत से चलता है। इसलिए जब AC ऑन होता है तो कार के माइलेज पर भी थोड़ा असर पड़ता है।
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इलेक्ट्रिक कारों में AC कम कर सकता है रेंज - फोटो : Tata Motors
इलेक्ट्रिक कारों में AC कैसे काम करता है?
EV यानी इलेक्ट्रिक कारों में AC सीधे बैटरी पावर से चलता है। इसलिए AC का इस्तेमाल ड्राइविंग रेंज को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से कई इलेक्ट्रिक कार कंपनियां अब ज्यादा एफिशिएंट हीट पंप (Heat Pump) सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि कम बिजली में बेहतर कूलिंग और हीटिंग मिल सके।

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