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जौनपुर हादसे में बड़ी चूक आई सामने, समय से मदद मिलती तो बच जाती जान
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Tue, 09 Feb 2021 07:34 PM IST
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वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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जौनपुर हादसे में घायल पिकअप सवार मनोज यादव ने बताया कि रात करीब डेढ़ बजे अंतिम संस्कार कर हम लोग घर के लिए निकले थे। रास्ते में एक होटल पर रुककर सभी ने चाय पी। इसके बाद पिकअप से हमलोग घर की ओर बढ़े। चालक रमेश, पूर्व प्रधान उमाशंकर यादव और संतोष मास्टर (शिक्षक) आगे बैठे थे। बाकी अन्य लोग पीछे थे।
घर पहुंचकर अंतिम संस्कार के बाद की औपचारिकताएं पूरी करने पर चर्चा चल रही थी। करीब 20 मिनट बाद अचानक तेज आवाज हुई। सामने से आ रही एक ट्रक ने साइड से जोरदार टक्कर मारी और फिर हमारा वाहन सड़क किनारे जाकर पलट गया। कुछ देर तक आंखों के सामने धूल का गुबार छाया रहा। इसके छंटते ही मैं खड़ा हुआ तो देखा सब लोग यहां-वहां बिखरे पड़े हैं।
कुछ लोग कराह रहे थे तो किसी की आवाज भी नहीं निकल रही थी। वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुट गए। कमला दादा पिकअप के नीचे थे। उनका सिर वाहन के नीचे दबा था। अकेले प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी।
कुछ देर में संतोष मास्टर भी होश में आकर मदद में जुट गए, मगर तब तक देर हो चुकी थी। लालू को भी होश आ गया था, मगर जब उसने शव देखा तो उसकी हिम्मत टूट गई। वह ऊपर ही नहीं आ रहा था। करीब बीस मिनट में ही पुलिस पहुंच गई और उसके तुरंत बाद एंबुलेंस भी आ गई।
रामकुमार, कमला यादव, अमर बहादुर, मुन्नीलाल, दलश्रृंगार, इंद्रजीत यादव की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। अन्य सभी घायलों को अस्पताल भेजवाया गया। पिकअप चालक रमेश का कहीं पता नहीं था। वह मौके से भाग गया था। अगर वहां होता तो कम से कम कमला दादा सहित एक-दो अन्य लोगों की जान बचा लेते।
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वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
हसरत अधूरी रह गई अधूरी
सड़क हादसे में मृत कमला यादव की आठ संतानों में चार पुत्र और चार पुत्रियां हैं। इनमें तीन पुत्र राकेश, अशोक और अखिलेश की शादी हो चुकी है। वहीं तीन बेटी सरोजा, सरिता, अनिता का भी वह विवाह कर चुके थे। सबसे छोटी बेटी सविता और पुत्र विकास की शादी शेष थी।
बेटी की शादी के लिए वह प्रयासरत थे। लगातार वर ढूंढ रहे थे। उनकी कोशिश थी कि इस वर्ष हर हाल में बेटी का विवाह कर दें, मगर उनकी यह हसरत अधूरी रह गई। पत्नी प्रभुदेई बार-बार यही कहते हुए विलाप कर रही थीं। बेटा, बहू और बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था।
डीएम-एसपी ने अस्पताल पहुंच जाना घायलों का हाल
वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर जलालपुर के लहंगपुर के पास भीषण हादसे की सूचना के बाद एएसपी सिटी डॉ. संजय कुमार भोर में ही घटनास्थल पर पहुंच गए। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचवाने के बाद वाहनों को सड़क सेे हटवाया। सुबह डीएम मनीष कुमार वर्मा और एसपी राजकरन नय्यर ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उनसे घटना के बारे में जानकारी ली।
सीएमएस डॉ. अनिल कुमार शर्मा को सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार को बिना देर किए डॉक्टरों का पैनल बनाकर पोस्टमार्टम कराने को कहा। डीएम की पहल पर दोपहर में ही सभी छह मृतकों के शव का पोस्टमार्टम हुआ।
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वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
समर बहादुर की मौत वाराणसी में हुई थी। लिहाजा उनका पोस्टमार्टम वाराणसी में कराया गया। जिला अस्पताल में पीड़ितों से मिलने और मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाने के लिए शाहगंज विधायक व पूर्व मंत्री शैलेंद्र यादव ललई, मल्हनी विधायक लकी यादव, सपा जिलाध्यक्ष लालबहादुर यादव, वरिष्ठ नेता डॉ. केपी यादव, ऋषि यादव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
हादसों का जिम्मेदार कौन
निर्माणाधीन वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। तीन दिन पहले ही सवारियों से भरी बस एक पिकअप से टकरा गई थी। इसमें 12 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसके पहले छह दिसंबर को इसी मार्ग पर बरातियों से भरी बोलेरो और बस में आमने-सामने की भिड़ंत में दूल्हे के मामा सहित चार लोगों की मौत हो गई थी।
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वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
बस और पिकअप की टक्कर शाम ढलने के बाद हुई तो बोलेरो और बस में भिड़ंत की घटना भोर की है। यह सभी घटनाएं निर्माणाधीन हाइवे पर महज पांच सौ मीटर के दायरे में हुई हैं। इसके अलावा भी इस मार्ग पर आए दिन हादसे हो रहे हैं।
इनके पीछे निर्माण करा रही संस्था की लापरवाही को भी बड़ा कारण बताया जा रहा है। जलालपुर के पास हाईवे के एक लेन को चालू कर दिया गया है, जबकि दूसरे लेन पर काम चल रहा है। त्रिलोचन, फूलपुर, पिंडरा बाजार की भीड़ से बचने के लिए जौनपुर से बनारस आने-जाने वाले नए बाईपास मार्ग का ही इस्तेमाल करते हैं।
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वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
उनमें यह भ्रम होता है कि इस लेन में सिर्फ एक तरफ से ही वाहन आ रहे हैं। नतीजा अचानक दूसरी तरफ से वाहन के सामने आने पर चालक संतुलन खो दे रहे हैं। दिन में तो दूर से ही वाहन आते दिख जाते हैं, लेकिन अंधेरा होने पर इसका अनुमान नहीं लग पाता। इसके अलावा जगह-जगह मिट्टी का ढूहा खोदकर छोड़ देना भी एक वजह है।
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