जौनपुर हादसे में घायल पिकअप सवार मनोज यादव ने बताया कि रात करीब डेढ़ बजे अंतिम संस्कार कर हम लोग घर के लिए निकले थे। रास्ते में एक होटल पर रुककर सभी ने चाय पी। इसके बाद पिकअप से हमलोग घर की ओर बढ़े। चालक रमेश, पूर्व प्रधान उमाशंकर यादव और संतोष मास्टर (शिक्षक) आगे बैठे थे। बाकी अन्य लोग पीछे थे।
जौनपुर हादसे में बड़ी चूक आई सामने, समय से मदद मिलती तो बच जाती जान
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हसरत अधूरी रह गई अधूरी
सड़क हादसे में मृत कमला यादव की आठ संतानों में चार पुत्र और चार पुत्रियां हैं। इनमें तीन पुत्र राकेश, अशोक और अखिलेश की शादी हो चुकी है। वहीं तीन बेटी सरोजा, सरिता, अनिता का भी वह विवाह कर चुके थे। सबसे छोटी बेटी सविता और पुत्र विकास की शादी शेष थी।
बेटी की शादी के लिए वह प्रयासरत थे। लगातार वर ढूंढ रहे थे। उनकी कोशिश थी कि इस वर्ष हर हाल में बेटी का विवाह कर दें, मगर उनकी यह हसरत अधूरी रह गई। पत्नी प्रभुदेई बार-बार यही कहते हुए विलाप कर रही थीं। बेटा, बहू और बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था।
डीएम-एसपी ने अस्पताल पहुंच जाना घायलों का हाल
वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर जलालपुर के लहंगपुर के पास भीषण हादसे की सूचना के बाद एएसपी सिटी डॉ. संजय कुमार भोर में ही घटनास्थल पर पहुंच गए। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचवाने के बाद वाहनों को सड़क सेे हटवाया। सुबह डीएम मनीष कुमार वर्मा और एसपी राजकरन नय्यर ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उनसे घटना के बारे में जानकारी ली।
सीएमएस डॉ. अनिल कुमार शर्मा को सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार को बिना देर किए डॉक्टरों का पैनल बनाकर पोस्टमार्टम कराने को कहा। डीएम की पहल पर दोपहर में ही सभी छह मृतकों के शव का पोस्टमार्टम हुआ।
हादसों का जिम्मेदार कौन
निर्माणाधीन वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। तीन दिन पहले ही सवारियों से भरी बस एक पिकअप से टकरा गई थी। इसमें 12 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसके पहले छह दिसंबर को इसी मार्ग पर बरातियों से भरी बोलेरो और बस में आमने-सामने की भिड़ंत में दूल्हे के मामा सहित चार लोगों की मौत हो गई थी।
इनके पीछे निर्माण करा रही संस्था की लापरवाही को भी बड़ा कारण बताया जा रहा है। जलालपुर के पास हाईवे के एक लेन को चालू कर दिया गया है, जबकि दूसरे लेन पर काम चल रहा है। त्रिलोचन, फूलपुर, पिंडरा बाजार की भीड़ से बचने के लिए जौनपुर से बनारस आने-जाने वाले नए बाईपास मार्ग का ही इस्तेमाल करते हैं।
उनमें यह भ्रम होता है कि इस लेन में सिर्फ एक तरफ से ही वाहन आ रहे हैं। नतीजा अचानक दूसरी तरफ से वाहन के सामने आने पर चालक संतुलन खो दे रहे हैं। दिन में तो दूर से ही वाहन आते दिख जाते हैं, लेकिन अंधेरा होने पर इसका अनुमान नहीं लग पाता। इसके अलावा जगह-जगह मिट्टी का ढूहा खोदकर छोड़ देना भी एक वजह है।