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जानें, साधु क्यों करते हैं तपती आंच में ये हठयोग...
Tue, 28 Feb 2017 04:52 PM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 28 Feb 2017 04:52 PM IST
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हठयोग करते साधु
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साधु तपती आंच में हठयोग क्यों करते हैं? इस हठयोग से आखिर धरतीवासियों को क्या फायदा होता है? इन सवालों का जवाब पाते ही आप हैरान रह जाएंगे। एक इंसान जो अपने परिवार को छोड़कर, सारी रिश्ते-नाते तोड़कर ईश्वर की भक्ति में इस कदर लीन हो जाता है कि उसे खुद का भी कोई ठिकाना नहीं होता। साधु बनने के बाद इंसान आम जनमानस की सुख-समृद्घि की कामना के लिए हठ योग करता है। धुनी रमां कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जाता है।
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हठयोग करते साधु
फर्रुखाबाद में पिछले दिनों लगे ऐतिहासिक मेला श्रीरामनगरिया में भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए साधु धूनी ताप रहे थे। साधु हठयोग का सहारा लेते हैं। वसंत पंचमी से शुरू हुआ धूना अनुष्ठान ज्येष्ठ माह के दशहरा तक चलता है।
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हठयोग करते साधु
हनुमान मंदिर भोलेपुर के महंत बाबा बालकदास बताते हैं कि ऋतुओं के विपरीत यह साधु अपनी हठ तपस्या से भगवान को प्रसन्न कर आम जनमानस की सुख-समृद्घि की कामना करते हैं। धूनी ताप रहे साधु रघुवीरदास, बजरंगदास और मुकेश दास वर्ष भर भगवान की साधना में लीन रहते हैं। भस्म शरीर पर लपेटकर साधु खुले आसमान के नीचे अपने चारों ओर कंडों की आंच जलाकर बैठते हैं।
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हठयोग करते साधु
महंत बताते हैं कि ज्येष्ठ माह के दशहरे से कार्तिक माह की चौथ तक साधु मेघ-डंबर अनुष्ठान करते हैं। इसके तहत वह 24 घंटे खुले आसमान के नीचे बैठकर भगवान से वर्षा कराने की कामना करते हैं। कार्तिक माह से माघ तक यह साधु कभी गंगा में खड़े होकर तो कभी 300 मटके ठंडे जल से स्नान कर प्रकृति के विपरीत जाकर अपने शरीर को कष्ट देते हैं।
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साधु संत
साधुओं की साज सज्जा भस्म लपेटने से होती है। धूनी पर बैठकर साधु चंदन, रोली व बंधन से श्रृंगार करते हैं। साधुओं अपने चारों ओर कंडों पर वैदिक रीति से पूजन करते हैं इसके बाद कपड़े से अपने आप को ढककर अपने इष्ट के ध्यान में खो जाते हैं।
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