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जानें, ‘लाखों दिलों पर राज’ कर रहे 10 महान कवियों का ‘रहस्य’

Wed, 22 Mar 2017 12:05 PM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 22 Mar 2017 12:05 PM IST
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world poetry day story
डेमो पिक
‘कवि’ और ‘कविता’। देखने, पढ़ने और सुनने में ये दो शब्द छोटे जरूरत लगते हैं लेकिन इनकी विशालता धरती, आसमान और सागर से भी बड़ी है। भावों को शब्दों की माला में पिरोकर सीधा हृदय तक पहुंचाने वाले कवियों के बारे में किसी ने सच ही कहा है-  ‘जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि’।  ‘विश्व कविता दिवस’ (World Poetry Day-21 मार्च) के मौके पर हम ऐसे ही 10 महान कवियों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी जादुई कलम से युगों-युगों की बातें यूं ही कह दी थीं।  


 
world poetry day story
अटल बिहारी बाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर, मध्यप्रदेश में हुआ। फिलहाल अटलजी स्वास्थ्य खराब होने के कारण सक्रिय राजनीति से अलग हैं लेकिन प्रधानमंत्री रहते उनके किए काम अक्सर चर्चा के केंद्र में रहते हैं। उन्होंने कानपुर के डी०ए०वी० कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एम०ए० की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। लोकप्रिय जननायक और कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ ये एक अत्यंत सक्षम और संवेदनशील कवि, लेखक और पत्रकार भी रहे हैं। 
अटल की मशहूर कविता-
बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा। 


 
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गोपाल दास नीरज
गोपाल दास सक्सेना ‘नीरज’ का जन्म 4 जनवरी 1925 को ग्राम पुरावली, जिला इटावा उत्तर प्रदेश में हुआ था। कवि सम्मेलनों में अपार लोकप्रियता के चलते नीरज को बंबई फिल्म जगत ने गीतकार के रूप में नई उमर की नई फसल के गीत लिखने का निमन्त्रण दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। पहली ही फिल्म में उनके लिखे कुछ गीत जैसे कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे और देखती ही रहो आज दर्पण न तुम, प्यार का यह मुहूरत निकल जायेगा बेहद लोकप्रिय हुए जिसका परिणाम यह हुआ कि वह बम्बई में रहकर फिल्मों के लिये गीत लिखने लगे। फिल्मों में गीत लेखन का सिलसिला मेरा नाम जोकर, शर्मीली, प्रेम पुजारी जैसी अनेक चर्चित फिल्मों में कई वर्षों तक जारी रहा। नीरज ने कानपुर से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था लेकिन हार गए।
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महादेवी वर्मा
फर्रुखाबाद में 26 मार्च 1907 को जन्मीं महादेवी वर्मा हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वह हिंदी साहित्य में छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और सुमित्रानंदन पंत के साथ महत्वपूर्ण स्तंभ मानी जाती हैं। उन्हें आधुनिक मीरा भी कहा गया है। मशहूर कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती” भी कहा है। 
महादेवी वर्मा की मशहूर कविता...
अलि, मैं कण-कण को जान चली, सबका क्रन्दन पहचान चली। 

जो दृग में हीरक-जल भरते, जो चितवन इन्द्रधनुष करते। 
टूटे सपनों के मनको से, जो सुखे अधरों पर झरते। 
जिस मुक्ताहल में मेघ भरे, जो तारो के तृण में उतरे
मै नभ के रज के रस-विष के, आँसू के सब रंग जान चली।

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मुनव्वर राना
मशहूर कवि और शायर मुनव्वर राना का जन्म 26 नवंबर 1952 को यूपी के रायबरेली जिले में हुआ था। ग़ज़ल गाँव, पीपल छाँव, बदन सराय, नीम के फूल, सब उसके लिए, घर अकेला हो गया,  कहो ज़िल्ले इलाही से, बग़ैर नक़्शे का मकान, फिर कबीर जैसी काव्य कृतियों के माध्यम से उन्होंने लोगों का दिल जीत लिया। 
मैं लोगों से मुलाकातों के लम्हें याद रखता हूँ मैं बातें भूल भी जाऊं तो लहजे याद रखता हूँ
सर-ए-महफ़िल निगाहें मुझ पे जिन लोगों की पड़ती हैं निगाहों के हवाले से वो चेहरे याद रखता हूं, ज़रा सा हट के चलता हूँ

ये मुनव्वर राना की लोकप्रिय कविता है। 
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