जानें, ‘लाखों दिलों पर राज’ कर रहे 10 महान कवियों का ‘रहस्य’
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अटल की मशहूर कविता-
बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा।
महादेवी वर्मा की मशहूर कविता...
अलि, मैं कण-कण को जान चली, सबका क्रन्दन पहचान चली।
जो दृग में हीरक-जल भरते, जो चितवन इन्द्रधनुष करते।
टूटे सपनों के मनको से, जो सुखे अधरों पर झरते।
जिस मुक्ताहल में मेघ भरे, जो तारो के तृण में उतरे
मै नभ के रज के रस-विष के, आँसू के सब रंग जान चली।
मैं लोगों से मुलाकातों के लम्हें याद रखता हूँ मैं बातें भूल भी जाऊं तो लहजे याद रखता हूँ
सर-ए-महफ़िल निगाहें मुझ पे जिन लोगों की पड़ती हैं निगाहों के हवाले से वो चेहरे याद रखता हूं, ज़रा सा हट के चलता हूँ
ये मुनव्वर राना की लोकप्रिय कविता है।