जिस उम्र में पैसा हाथ में आने पर युवा बाइक या अन्य शौक पूरे करने को मचल उठते हैं। वहीं, ये युवा ऐसे हैं जो उन सपनों को पूरा करने की तैयारी में हैं जो अकेले उनके नहीं, पूरे परिवार के हैं। उन्हें यह ख्याल है कि यह पैसा उन्होंने कितनी मेहनत से कमाया है...
EXCLUSIVE: इनाम के रुपयों से शौक नहीं पिता का कर्ज चुकाएंगे सौरभ चौधरी, सांझा किए 'सपने'
बात ऐसे युवा खिलाड़ियों की हो रही है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय फलक पर देश का नाम रोशन किया है। प्रतियोगिताओं में मेडल जीते हैं और अब प्रदेश सरकार ने लखनऊ में इन्हें सम्मानित किया है। सभी को इनाम स्वरूप धनराशि मिली है। इसके बाद मानो इन खिलाड़ियों के सपनों को नए पंख लग गए। मेरठ के खिलाड़ियों ने यहां भी एक अलग मिसाल पेश की है। ‘अमर उजाला’ ने जब खिलाड़ियों से बात की तो उन्होंने पूरे उत्साह के साथ अपनी खुशियों और सपनों को सांझा किया।
सबसे पहले पिता का कर्ज चुकाएंगे
जकार्ता एशियन खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल में देश को स्वर्ण पदक दिलाकर मान बढ़ाने वाले सौरभ चौधरी अब अगले लक्ष्य की ओर बढ़ चले हैं। उन्हें सरकार की ओर से 50 लाख के इनाम की घोषणा की गई है। सौरभ को अर्जेंटीना में 6 अक्टूबर से शुरू हो रहे युवा ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना है। यहां से लौटने के बाद वह अपनी इनामी राशि लेने लखनऊ जाएंगे। यहां तक का सफर तय करने के लिए सौरभ चौधरी को ही नहीं उनके परिवार को भी काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। सौरभ का शूटर बनने का सपना माता-पिता को पूरा करना था। इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण परिवार को बैंक से लोन लेना पड़ा। सौरभ अपनी इस धनराशि से सबसे पहले पिता का कर्ज चुकाएंगे। पिता जगमोहन का कहना है कि महंगाई के इस दौर में हर जरूरत को पूरा कर पाना संभव नहीं है। सौरभ को उसकी जरूरत की हर चीज मिले, ताकि वह देश का मान बढ़ाए।
पिता को सौंप दिया चेक
एशियन खेलों में बैडमिंटन टीम का हिस्सा रहे मेरठ के मनु अत्री को प्रदेश सरकार ने पांच लाख रुपये का चेक प्रदान किया है। बुधवार को चेक मिलने के बाद मनु अत्री हैदराबाद रवाना हो गए। मनु को यह पुरस्कार सैफ खेलों में दो स्वर्ण और एक सिल्वर पदक मिलने के कारण भी दिया है। मनु अत्री को 2016 ओलंपिक में प्रतिभाग करने के लिए सरकार की ओर से 10 लाख रुपये का चेक दिया गया था। प्रदेश सरकार से मिले 5 लाख के चेक को मनु ने अपने पिता को सौंपा दिया, लेकिन पिता राजाराम ने उस चेक को बेटे को लौटा दिया। उनका मानना है कि मनु को इस पैसे की सबसे अधिक जरूरत है। 2010 के लक्ष्य को साधने के लिए मनु अत्री कड़ा अभ्यास शुरू कर चुके हैं। वह इस पैसे को मनु अत्री के अभ्यास में सामने आने वाली जरूरतों को पूरा करने में खर्च करेंगे। वह मानते हैं कि एक खिलाड़ी के लिए देश की ओर से प्रतिनिधित्व करना भी बड़ी बात है।
माता-पिता का घर का सपना पूरा करेंगी
मूलरूप से मुजफ्फरनगर की रहने वालीं कुश्ती खिलाड़ी दिव्या काकरान वर्तमान में लोनी बॉर्डर से सटे ग्राम गोकुलपुर में किराए के मकान में परिवार के साथ रह रही हैं। माता-पिता ने सिलाई का काम कर दिव्या के हर सपने को पूरा किया। खुद का घर न होने की टीस मन में हमेशा रही। प्रदेश सरकार से मिले 30 लाख के चेक ने दिव्या के परिवार का मानों सपना ही पूरा कर दिया। दिव्या का कहना है कि वह इस राशि से दिल्ली में खुद का घर खरीदकर माता-पिता को तोहफे के रूप में देंगी। इससे पहले उन्हें 2010 में अंबाला में संपन्न हुए दंगल में भारत केसरी का खिताब और 10 लाख का नकद इनाम मिला था। चेक मिलने के बाद दिव्या ने सबसे पहले अपने माता-पिता को सूचना दी। भाई देव काकरान भी साथ रहा।
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