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PGI में नहीं मिल रहा मुख्यमंत्री सेहत योजना का लाभ: पंजाब सरकार ने केंद्र को लिखा था पत्र, क्या बोले मंत्री?
Tue, 14 Jul 2026 08:23 PM IST
शाहिल शर्मा
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 14 Jul 2026 08:23 PM IST
सार
केंद्र का जवाब न आने से नाराज स्वास्थ्य मंत्री ने साफ कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ भेदभाव करना बंद करे। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में पीजीआई का निर्माण पंजाब की जमीन पर पंजाब के लोगों के लिए किया था।
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बलबीर सिंह, पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पीजीआई चंडीगढ़ में मरीजों को पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। इसे लेकर सूबा सरकार खासी नाराज है। पंजाबियों को इस सुविधा का लाभ पीजीआई में मिले, इसके लिए पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने 21 मई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को पत्र भी लिखा था मगर अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं आया है।
केंद्र का जवाब न आने से नाराज स्वास्थ्य मंत्री ने साफ कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ भेदभाव करना बंद करे। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में पीजीआई का निर्माण पंजाब की जमीन पर पंजाब के लोगों के लिए किया था। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तो बाद में पंजाब से अलग हुए लिहाजा पीजीआई पर पहला हक पंजाबियों का है।
यह संस्थान पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में स्थापित किया गया था। नवंबर 1966 में पंजाब से अलग होने के बाद चंडीगढ़ हरियाणा की भी राजधानी बना। फिर भी राजधानी पर बड़ा दावा पंजाब का ही है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, इसके अलावा पीजीआई में केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना का भी लाभ दिया जाता है और यह भी कैशलेस योजना है। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यदि पीजीआई में आयुष्मान योजना का लाभ मिल सकता है तो पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना का लाभ क्यों नहीं मिल सकता जबकि यह योजना भी कैशलेस है।
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केंद्र का जवाब न आने से नाराज स्वास्थ्य मंत्री ने साफ कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ भेदभाव करना बंद करे। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में पीजीआई का निर्माण पंजाब की जमीन पर पंजाब के लोगों के लिए किया था। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तो बाद में पंजाब से अलग हुए लिहाजा पीजीआई पर पहला हक पंजाबियों का है।
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यह संस्थान पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में स्थापित किया गया था। नवंबर 1966 में पंजाब से अलग होने के बाद चंडीगढ़ हरियाणा की भी राजधानी बना। फिर भी राजधानी पर बड़ा दावा पंजाब का ही है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, इसके अलावा पीजीआई में केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना का भी लाभ दिया जाता है और यह भी कैशलेस योजना है। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यदि पीजीआई में आयुष्मान योजना का लाभ मिल सकता है तो पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना का लाभ क्यों नहीं मिल सकता जबकि यह योजना भी कैशलेस है।
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मंत्री बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना जनता की सेहत से जुड़ी है, लिहाजा इस मामले में राजनीति न की जाए। उनके अनुसार इस बाबत केंद्र सरकार को 21 मई को पत्र लिखा गया था। करीब दो महीने बीतने वाले हैं मगर केंद्र की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। उनके अनुसार यदि केंद्र सरकार इस मसले पर जवाब नहीं देती तो वे खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मिलेंगे।
क्या है मुख्यमंत्री सेहत योजना?
पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना एक स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसका उद्देश्य लोगों को मुफ्त और बेहतर इलाज प्रदान करना है। इसके तहत पंजाब के प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक का पूरी तरह मुफ्त और कैशलेस इलाज प्रदान किया जाता है। आम लोगों के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों सहित पंजाब के सभी निवासी इसके पात्र हैं। पंजाब और चंडीगढ़ के 900 से अधिक सूचीबद्ध सरकारी व निजी अस्पतालों में 2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज करा सकते हैं।
क्या है मुख्यमंत्री सेहत योजना?
पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना एक स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसका उद्देश्य लोगों को मुफ्त और बेहतर इलाज प्रदान करना है। इसके तहत पंजाब के प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक का पूरी तरह मुफ्त और कैशलेस इलाज प्रदान किया जाता है। आम लोगों के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों सहित पंजाब के सभी निवासी इसके पात्र हैं। पंजाब और चंडीगढ़ के 900 से अधिक सूचीबद्ध सरकारी व निजी अस्पतालों में 2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज करा सकते हैं।